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केरल को उपकर के लिए लेनी होगी जीएसटी परिषद से मंजूरी

दिलाशा सेठ / नई दिल्ली September 02, 2018

बाढ़ से जूझ रहे केरल ने राज्य वस्तु एवं सेवा कर (एसजीएसटी) पर अतिरिक्त उपकर लगाकर धन जुटाने का प्रस्ताव किया है, जिससे पुनर्वास के लिए धन जुटाया जा सके। इसके लिए जीएसटी परिषद से मंजूरी लेने की जरूरत पड़ सकती है, जो जीएसटी मामले में फैसला लेने वाला शीर्ष निकाय है। एसजीएसटी पर 10 प्रतिशत कर लगाने प्रस्ताव है। कुछ वित्त मंत्रियों का मानना है कि इससे आम लोगों पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा, जो पहले ही प्राकृतिक आपदा से जूझ रहे हैं। उनका कहना है कि इसे कुछ वस्तुओं तक सीमित रखा जाना चाहिए।
 
केरल के वित्त मंत्री थॉमस आइजक ने दो साल के लिए एसजीएसटी पर 10 प्रतिशत उपकर लगाने का प्रस्ताव रखा है, जिससे कि सालाना 1,000 करोड़ रुपये जुटाए जा सकें। उन्होंने कहा कि 28-29 सितंबर को होने वाली बैठक में इस मसले को रखा जाएगा। बहरहाल असम के वित्त मंत्री हेमंत विस्व शर्मा ने कहा कि प्राकृतिक आपदा की स्थिति में जीएसटी कानून में अतिरिक्त उपकर का प्रावधान है, लेकिन यह कुछ वस्तुओं तक सीमित रखा जाना चाहिए।  केरल के वित्त मंत्री ने बिजनेस स्टैंडर्ड से कहा, 'हम 2 साल के लिए उपकर लागू करने पर विचार कर रहे हैं। स्थिति को देखते हुुए सभी वस्तुओं पर कर लगाना तार्किक राजकोषीय नीति होगी।' उन्होंने कहा कि हम प्रति साल 1,000 करोड़ रुपये जुटाने पर विचार कर रहे हैं क्योंकि केंद्र सरकार हमारी मदद करने को तैयार नहीं है। आइजक ने कहा कि केरल के मुख्यमंत्री राहत कोष में पहले ही 1,000 करोड़ रुपये आ चुके हैं, जबकि राज्य को कम से कम 4,000 करोड़ रुपये की जरूरत है।  प्रस्ताव पर चर्चा करने के लिए आइजक 11 सितंबर को केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली से मिलेंगे। 
 
एक अन्य राज्य के वित्त मंत्री ने भी नाम न दिए जाने की शर्त पर कहा कि अतिरिक्त उपकर कुछ वस्तुओं तक ही सीमित होना चाहिए, खासकर जो 28 प्रतिशत कर के दायरे में आते हैं। उन्होंने कहा, 'परिषद ही इस पर अंतिम फैसला कर सकती है। सभी वस्तुओं पर कर केरल के लोगों पर बहुत बड़ा बोझ होगा।'
Keyword: kerala, flood, fund, bank, GST,,
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