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भारत बना तीन कंपनियों वाला बाजार

राम प्रसाद साहू और रोमिता मजूमदार / मुंबई August 31, 2018

वोडाफोन और आइडिया ने 40.8 करोड़ ग्राहक आधार के साथ देश की सबसे बड़ी दूरसंचार कंपनी बनने के लिए अपने परिचालन के विलय का ऐलान किया है। विलय के बाद बनने वाली इकाई के पास 41 फीसदी बाजार हिस्सेदारी है। नई कंपनी वोडाफोन आइडिया के नाम से जानी जाएगी और इसके पास दुनिया के दूसरे सबसे बड़े दूरसंचार बाजार में 32.2 फीसदी राजस्व बाजार हिस्सेदारी होगी। दोनों इकाइयों ने करीब एक साल पहले विलय की घोषणा की थी और इस हफ्ते इसे नैशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल की मंजूरी मिली।
 
नई कंपनी वोडाफोन आइडिया लि. के लिए नया निदेशक मंडल बनाया गया है। इसमें 12 निदेशक (छह स्वतंत्र निदेशक शामिल) होंगे और कुमार मंगलम बिड़ला उसके चेयरमैन होंगे। निदेशक मंडल ने बालेश शर्मा को सीईओ नियुक्त किया है।  कंपनी ने मजबूती के साथ शुरुआत की है और यह नौ दूरसंचार सर्किल में राजस्व के लिहाज से अग्रणी स्थिति में है और 12 सर्किल में इसके पास सबसे ज्यादा ग्राहक हैं। टैरिफ पर घमासान के बीच प्रतिस्पर्धी स्थिति में सुधार के अलावा इस विलय से 140 अरब रुपये सालाना की बचत होगी और इसमें मेलजोल के चलते परिचालन खर्च में मिलने वाला 84 अरब रुपये का फायदा शामिल है। विलय हालांकि हो चुका है, लेकिन दो ब्रांड, कस्टमर प्लान और वितरण नेटवर्क की अलग मौजूदगी बनी रहेगी। कंपनी ने संकेत दिया कि मेट्रो, शहरी, ग्रामीण और दूरदराज के बाजारों में ग्राहकों के मजबूत जुड़ाव के चलते ऐसा किया गया है।
 
कंपनी की तात्कालिक प्राथमिकता विभिन्न सेवाओं की पेशकश में अपनी स्थिति एकीकृत करने की होगी। वोडाफोन आइडिया के सीईओ बालेश शर्मा ने कहा, दो लोकप्रिय ब्रांड के साथ भारत की अग्रणी दूरसंचार ऑपरेटर होने के नाते कंपनी के पास काफी संसाधन हैं जिससे वह ग्राहकों की पसंद को बनाए रख पाएगी और नई तकनीक की पेशकश सुनिश्चित कर पाएगी। हम खुदरा व एंटरप्राइज ग्राहकों की बेहतरी के लिए प्रतिबद्ध हैं। साथ ही हम नए उत्पादों, सेवाओं और समाधान के जरिए उनकी डिजिटल व कनेक्टिविटी की जरूरतें पूरी करेंगे।
 
नई इकाई आइडिया की तरफ से 67.5 अरब रुपये की इक्विटी और वोडाफोन की तरफ से 86 अरब रुपये की इक्विटी डाले जाने के बाद 193 अरब रुपये के नकद शेष के साथ शुरुआत करेगी। दोनों कंपनियों की तरफ से दूरसंचार टावर की बिक्री से 78.5 अरब रुपये मिलेंगे। दूरसंचार विभाग को 39 अरब रुपये का बकाया चुकाने के बाद कंपनी के पास यह नकदी है। डॉयचे बैंक रिसर्च के श्रीनिवास राव ने कहा, विलय से दो फायदे तात्कालिक मिलेंगे - स्पेक्ट्रम की पूलिंग से नेटवर्क की क्षमता बढ़ेगी (करीब 50 फीसदी) और टावर का किराया कम होगा। 42 फीसदी ग्राहक हिस्सेदारी और शहरी बाजारों में मजबूत स्पेक्ट्रम पोर्टफोलियो से नई इकाई शायद ही छोटी होगी। राव के मुताबिक, आठ बाजारों में यह अग्रणी है और पांच बाजारों मजबूत, जो दूरसंचार क्षेत्र की 65 फीसदी हिस्सेदारी का प्रतिनिधित्व करता है। इसके पास हालांकि बड़ा आधार है और स्पेक्ट्रम का संसाधन है, लेकिन कड़ी प्रतिस्पर्धा वाले बाजार में राजस्व बाजार हिस्सेदारी को बनाए रखने की इसकी क्षमता को लेकर चिंता है। 
 
जेपी मॉर्गन के वी के जॉर्ज व आकाश वर्मा का मानना है कि यह काम कठिन होगा, खास तौर से यह देखते हुए कि रिलायंस जियो शायद ही कीमत के मामले पर नरम पड़ेगी।  दूरसंचार विश्लेषक पहले ही कह चुके हैं कि नई इकाई पर 1092 अरब रुपये का कर्ज होगा, लिहाजा वह कीमत के मोर्चे पर आक्रामकता के साथ आगे बढऩे की स्थिति में नहीं होगी। कंपनी के सामने ग्रामीण ग्राहक आधार को जियो फोन के चलते पहुंची क्षति को सीमित करने और प्रतिस्पर्धी के मुकाबले औसत राजस्व प्रति ग्राहक को उच्चस्तर पर संरक्षित रखने की चुनौती होगी।
Keyword: vodafone, telecom, idea, वोडाफोन-आइडिया विलय,
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