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बीमा के ब्रेकर पर अटक न जाए गाड़ी!

शैली सेठ मोहिले / मुंबई 08 30, 2018

वाहन बीमा के नए नियम शनिवार से अमल में आ जाएंगे

बिजनेस स्टैंडर्ड बीमा के ब्रेकर पर अटक न जाए गाड़ी!वाहन बीमा के नए नियमों का वाहनों की बिक्री पर असर पडऩे के आसार हैं। इसकी वजह यह है कि बीमा पॉलिसी के कुछ पहलुओं को लेकर भ्रम की स्थिति होने के कारण कार और दोपहिया खरीदार खरीदारी टाल सकते हैं। वाहन बीमा के नए नियम शनिवार से अमल में आ जाएंगे। 

ये नियम लागू होने में मुश्किल से 48 घंटे बचे हैं। ऐसे में कार डीलरों के पास उन घबराए हुए खरीदारों की लगातार कॉल आ रही हैं, जिन्होंने पिछले एक पखवाड़े में नए वाहनों की बुकिंग की है। नए नियमों में कार खरीदारों के लिए कम से कम 3 साल और दोपहिया खरीदारों के लिए कम से कम 5 साल का बीमा पहले ही खरीदना अनिवार्य बनाया गया है।

उच्चतम न्यायालय ने 20 अगस्त को बीमा कंपनियों को निर्देश दिया था कि वे लंबी अवधि के थर्ड पार्टी कवर की बिक्री शुरू करें क्योंकि इस समय बहुत कम वाहनों का बीमा है। देश में सड़क पर चलने वाले सभी वाहनों के लिए बीमा अनिवार्य है, लेकिन मालिक एक बार बीमा पॉलिसी की अवधि खत्म होने के बाद नवीनीकरण नहीं कराते हैं।

लंबी अवधि और प्रीमियम के अग्रिम भुगतान से खरीदार सालाना नवीनीकरण के झंझट से बचेंगे। लेकिन इससे नए वाहनों की शुरुआती लागत में भी बढ़ोतरी होगी, जिससे उनकी ऑन-रोड कीमतों में अचानक भारी बढ़ोतरी होगी। मारुति सुजूकी इंडिया के एक डीलर ने कहा, 'बाजार में बहुत अधिक भ्रम की स्थिति है।'

उन्होंने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि इस नियम पर रोक लगेगी क्योंकि इससे कीमतों में भारी बढ़ोतरी होगी। उन्होंने कहा कि पहले कोई सूचना दिए बिना ये नियम लागू किए जा रहे हैं। कुछ दिन पहले बुकिंग करने वाले ग्राहक यह जानने के लिए फोन कर रहे हैं कि उनकी लागत कितनी बढ़ेगी।  

इंजन के आकार के आधार पर प्रीमियम अलग-अलग होंगे। उदाहरण के लिए 1,500 सीसी से अधिक क्षमता की नई निजी कार का शुरुआती बीमा कवर कम से कम 24,305 रुपये होगा, जो अब 7,890 रुपये है। वहीं 350सीसी से अधिक इंजन क्षमता वाली मोटरसाइकिलों के बीमा पर 13,024 रुपये खर्च करने होंगे, जबकि इस समय 2,323 रुपये ही खर्च होते हैं।  

हालांकि कार कंपनियां चिंतित नहीं हैं। उनका मानना है कि यह कदम से बिक्री पर थोड़े समय असर पड़ेगा। कार बनाने वाली एक अन्य कंपनी के कार्याधिकारी ने नाम न प्रकाशित करने का आग्रह करते हुए कहा, 'निस्संदेह ग्राहकों और हम विनिर्माताओं को कुछ समय परेशानी होगी क्योंकि ग्राहक खरीदारी टालेंगे।

लेकिन हमें उम्मीद है कि जल्द ही स्थितियां सामान्य हो जाएंगी।' दूसरी कार विनिर्माता कंपनी के कार्याधिकारी ने कहा, 'बीमा कंपनियों को एक महीने या कुछ ज्यादा समय तक मोहलत देने को लेकर बातचीत चल रही है।' सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (सायम) के कार्यकारी निदेशक सौगत सेन ने कहा, 'लघु अवधि में थोड़ा असर पड़ सकता है क्योंकि खरीदारी के लिए शुरुआती लागत बढ़ेगी।' 

नए नियमों के तहत खरीदारों के पास दो विकल्प होंगे। एक विकल्प यह है कि वे एक साल की वह पॉलिसी चुन सकते हैं, जिसमें एक साल ओन डेमेज (ओडी) प्रीमियम और तीन साल का अनिवार्य थर्ड पार्टी (टीपी) प्रीमियम शामिल होगा।  दूसरा विकल्प यह है कि एक व्यापक कवर लिया जाए, जिसमें ओडी और टीपी दोनों तीन साल के लिए होंगे। अगर ग्राहक दूसरा विकल्प चुनता है तो उसके वाहन बीमा प्रीमियम में भारी बढ़ोतरी होगी। ऊपर जिस कार कंपनी के अधिकारी का हवाला दिया गया है, उन्होंने कहा कि नए नियमों में कुछ अस्पष्टताएं हैं। 

उदाहरण के लिए इसमें यह साफ नहीं किया गया है कि अगर खरीदार तीन साल से पहले अपनी बीमा कंपनी बदलना चाहता है तो क्या प्रावधान हैं? ओन डेमेज का प्रबंधन नए बीमा कंपनी कर सकती है, लेकिन खरीदार द्वारा पहले ही जमा कराई जा चुकी एकमुश्त राशि का क्या होगा?  

इसके अलावा इस समय अगर वाहन दुर्घटनाग्रस्त नहीं होता है तो दूसरे वर्ष में 'नो क्लेम बोनस' मिलता है, जबकि नए नियमों के तहत 'नो क्लेम बोनस' के लिए तीन साल का इंतजार करना पड़ेगा। ग्राहकों के लिए यह भी एक चुनौती है और अभी यह किसी को नहीं पता कि इरडा इसे कैसे हल करेगा।

इस बीच दोपहिया वाहन कंपनियां भी कमर कस रही हैं। बिक्री में मंदी के असर को टालने के लिए बजाज ऑटो ने बुधवार को घोषणा की कि वह 31 अगस्त तक चुनिंदा मॉडलों पर मुफ्त बीमा देगी। हालांकि उसकी प्रतिस्पर्धी कंपनियों ने ऐसी किसी योजना की घोषणा नहीं की है। हीरो मोटोकॉर्प के एक प्रवक्ता ने कहा कि कंपनी की ऐसी कोई योजना नहीं है।

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