बिजनेस स्टैंडर्ड - घरेलू वित्तीय देनदारियां 2017-18 में बढ़ी
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घरेलू वित्तीय देनदारियां 2017-18 में बढ़ी

अभिषेक वाघमारे /  08 30, 2018

भारतीय रिजर्व बैंक की सालाना रिपोर्ट

बिजनेस स्टैंडर्ड घरेलू वित्तीय देनदारियां 2017-18 में बढ़ीवित्त वर्ष 2017-18 के लिए भारतीय रिजर्व बैंक की सालाना रिपोर्ट में देश के लोगों और परिवारों के बारे में एक अहम रुझान नजर आया है। वित्तीय संस्थानों मसलन बैंकों, गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों, आवास वित्त निगम और बीमा फंडों के लिए परिवार की देनदारी बढ़ी है और यह उनकी खर्च करने लायक आमदनी का 4 फीसदी है जो सात सालों में सबसे ज्यादा है। वहीं परिवारों की वित्तीय देनदारी वर्ष 2011-12 में सकल राष्ट्रीय खर्च योग्य आय (जीएनडीआई) का 3.2 फीसदी था जो घटकर 2016-17 में जीएनडीआई का 2.4 फीसदी हो चुका है।

जीडीएनआई के 2.4 फीसदी तक की गिरावट की वजह नोटबंदी रही जबकि 2017-18 में देनदारियों में बढ़ोतरी की वजह से अर्थव्यवस्था में रिकवरी है। विशेषज्ञों का कहना है कि आवास ऋण लेने और शादी, सोना और गहने की खरीदारी के अलावा दूसरे निजी कारणों की वजह से लिए पर्सनल लोन लेने के बढ़ते रुझान से देनदारियों में तेजी आई है। केयर रेटिंग्स में मुख्य अर्थशास्त्री मदन सबनवीस का कहना है कि जीएनडीआई 2017-18 में घट गई क्योंकि सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि कम रही है। उन्होंने बताया, 'वास्तविक जीडीपी में धीमी वृद्धि और मुद्रास्फीति के निचले स्तर की वजह से जीएनडीआई पर स्वभाविक रूप से असर पड़ा है।' 

परिवारों की वित्तीय देनदारियों में बढ़ोतरी इस बात से भी जाहिर होती है कि बकाया गैर-खाद्य ऋण में पर्सनल लोन की हिस्सेदारी मार्च 2015 के 19.4 फीसदी से बढ़कर मार्च 2018 के अंत में 24.8 फीसदी हो गई। जून 2018 में यह 25.3 फीसदी के स्तर पर रही। उद्योग के ऋण में पर्सनल लोन ने अपनी हिस्सेदारी बना ली है जो पिछले चार सालों में घट रहा था जबकि बाकी का हिस्सा सेवा क्षेत्र में चला गया है।  उद्योग ऋण की हिस्सेदारी मार्च 2015 के 44.3 फीसदी से अचानक घटकर मार्च 2018 में गैर-खाद्य ऋण का 35.1 फीसदी हो गया और इस तरह इसमें 9 फीसदी की गिरावट देखी गई। सेवा क्षेत्र में यह 23 फीसदी से बढ़कर 26 फीसदी हो गया। पर्सनल लोन के तहत आवासीय और 'अन्य' पर्सनल लोन ने परिवार की वित्तीय देनदारियों में सबसे ज्यादा योगदान दिया है। 

मार्च 2015 के आखिर में 10.5 फीसदी गैर-खाद्य ऋण से लेकर बैंक ऋण में आवासीय ऋण (प्राथमिक आवास में शामिल घर भी) की हिस्सेदारी मार्च 2018 में बढ़कर 12.7 फीसदी हो गई। जून 2018 के आखिर में इसमें 13.1 फीसदी की वृद्धि हुई है। उद्योग का नजरिया है कि आवासीय और रियल एस्टेट क्षेत्र में मंदी से आवास कीमतें कुछ हद तक कम हुई हैं और विशेषज्ञों का कहना है कि इस उद्योग में मंदी की वजह से घर खरीदने वालों को मौका मिला है। एनारॉक प्रॉपर्टी कंसल्टेंट्स के अरुण चिटनिस का कहना है, 'नोटबंदी के बाद से ही रियल एस्टेट क्षेत्र दबाव से गुजर रहा है। ग्राहकों ने इसे खरीदारी के सही वक्त के तौर पर इसकी पहचान की है। अच्छे सौदे के लिए भी काफी मकान उपलब्ध हैं।' 

विश्लेषकों का कहना है कि आवास के अलावा 'अन्य' कर्ज में असुरक्षित पर्सनल लोन हो सकते हैं जो गहने आदि के बदले में लिए जाते हैं उनमें बढ़ोतरी हुई है और यह मार्च 2015 के आखिर के 2.3 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर मार्च 2018 तक 5 लाख करोड़ रुपये हो गया। कुल गैर खाद्य ऋण में 'अन्य' कर्जों की हिस्सेदारी इसी समान अवधि के दौरान 4 फीसदी से बढ़कर 6.6 फीसदी हो गई। वाहन ऋण की हिस्सेदारी सबसे ज्यादा है लेकिन अन्य पर्सनल लोन सेगमेंट की तुलना में क्रेडिट कार्ड की बकाया रकम में वृद्धि ज्यादा तेज रही है। क्रेडिट कार्ड की बकाया रकम में वृद्धि मार्च 2015 के 300 अरब रुपये से बढ़कर मार्च 2018 में 700 अरब रुपये हो गई जो कुल गैर-खाद्य ऋण का करीब 1 फीसदी है।

आरबीआई की सालाना रिपोर्ट से यह भी संकेत मिला कि घरेलू स्तर पर वित्तीय बचत और फंड प्रवाह की तिमाही अनुमान लगाने की कोशिश की जा रही है। इसमें कहा गया, 'बैंक के प्राथमिक अनुमानों के मुताबिक घरेलू क्षेत्र की शुद्ध वित्तीय परिसंपत्ति 2017-18 में बढ़कर जीएनडीआई का 7.1 फीसदी हो गई। इस बढ़ोतरी की वजह यह थी कि घरेलू देनदारियों में बढ़ोतरी के बावजूद मुद्रा के रूप में घरेलू परिसंपत्ति में वृद्धि हुई।'

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