बिजनेस स्टैंडर्ड - दिवालिया खरीद में बड़ी कंपनियां आगे
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दिवालिया खरीद में बड़ी कंपनियां आगे

देव चटर्जी / मुंबई 08 29, 2018

ये कंपनियां तेजी से विजेता के तौर पर उभर रही हैं

बिजनेस स्टैंडर्ड दिवालिया खरीद में बड़ी कंपनियां आगेदिवालिया कंपनियों की खरीदारी में अदाणी समूह, रिलायंस इंडस्ट्रीज और टाटा समूह जैसे बड़े कारोबारी समूहों को बेहतर क्रेडिट मेट्रिक्स और बैंकों के साथ शून्य डिफॉल्ट के ट्रैक रिकॉर्ड से मदद मिल रही है। ऋण शोधन अक्षमता एवं दिवालिया संहिता (आईबीसी), 2016 के तहत शुरू की गई दिवालिया प्रक्रिया में ये दिग्गज कंपनियां तेजी से विजेता के तौर पर उभर रही हैं। सज्जन जिंदल के नेतृत्व वाली जेएसडब्ल्यू ग्रुप भी दबावग्रस्त परिसंपत्तियों के अधिग्रहण के दौर में शामिल थी लेकिन उसे फिलहाल कोई उल्लेखनीय सफलता नहीं मिली है। 

बैंकरों का कहना है कि टाटा स्टील द्वारा बैंकों को 352 अरब रुपये के भुगतान के साथ भूषण स्टील को हासिल किए जाने के बाद अब टाटा पावर आईसीआईसीआई वेंचर्स के साथ संयुक्त उद्यम के जरिये प्रयागराज पावर के अधिग्रहण की दौड़ में आगे चल रही है।

संयुक्त उद्यम इस सौदे के लिए 60 अरब रुपये के भुगतान और बैंकों को 15 फीसदी इक्विटी जारी करने की पेशकश कर रहा है। इसी प्रकार, अदाणी समूह 38 अरब रुपये की पेशकश के साथ जीएमआर समूह की 1,370 मेगावॉट क्षमता वाली छत्तीसगढ़ परियोजना के अधिग्रहण के लिए तैयार है।

समझा जाता है कि अदाणी पावर 14 अरब रुपये की गैर-वित्त पोषित देनदारियों की भी जिम्मेदारी लेगी। अदाणी विल्मर भी रुचि सोया के लिए सबसे बड़ी बोलीदाता के तौर पर उभरी है। रुचि सोया के लिए बैंकों को 60 अरब रुपये के भुगतान संबंधी अदाणी की पेशकश से बैंकों को 60 फीसदी नुकसान हो सकता है। 

लेनदारों ने कहा कि आलोक इंडस्ट्रीज के लिए आरआईएल सबसे बड़ी बोलीदाता के तौर पर उभरी है। आरआईएल अनिल अंबानी समूह के साथ संकटग्रस्त दूरसंचार कंपनी रिलायंस कम्युनिकेशंस की दूरसंचार बुनियादी ढांचा परिसंपत्तियों को 181 अरब रुपये में अधिग्रहण के लिए समझौते पर हस्ताक्षर पहले ही कर चुकी है।

एक लेनदार ने कहा, 'इतना तो स्पष्ट है कि बड़ी कंपनियों को आईबीसी 2016 का सबसे अधिक फायदा मिला है। चूंकि नए मालिकों को इन कंपनियों के केवल आधे ऋण बोझ की ही जिम्मेदारी है, इसलिए वे पिछले प्रवर्तकों के मुकाबले कहीं अधिक तेजी से इन कंपनियों का पुनरुद्धार करने में समर्थ होंगे। साथ ही इससे ब्याज लागत में भी तेजी से कमी आएगी।'

जेएसडब्ल्यू ग्रुप भी भूषण पावर के लिए 197 अरब रुपये की बोली के साथ दौड़ में शामिल थी लेकिन उसे सफलता नहीं मिल पाई। जेएसडब्ल्यू ग्रुप मोनेट इस्पात का अधिग्रहण कर चुकी है जिसे रिजर्व बैंक के निर्देश पर बैंकों ने पिछले साल ऋण समाधान के लिए नैशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (एनसीएलटी) में भेजा था।

बैंकरों ने कहा कि टाटा पावर और अदाणी पावर दोनों को गुजरात के मुंद्रा में अपनी मेगा बिजली परियोजनाओं के संचालन में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। आयातित कोयला कीमतों में तेजी के मद्देनजर बिजली दरों में बढ़ोतरी के आग्रह को सर्वोच्च न्यायालय द्वारा ठुकराए जाने के बाद दोनों कंपनियों ने स्थानीय सरकार से इन परियोजनाओं में बहुलांश हिस्सेदारी के अधिग्रहण के जरिये मदद की गुहार लगाई है।

गुजरात सरकार इसी संदर्भ में एक समिति गठित कर बैंकों, कंपनियों एवं राज्य बिजली बोर्डों से समाधान पर राय ले रही है। विश्लेषकों ने कहा कि बैंकों द्वारा तमाम बिजली कंपनियों को ऋण समाधान के लिए एनसीएलटी भेजे जाने से बड़ी कंपनियों को फायदा होगा। 

Keyword: defaulter, company, auction, अदाणी समूह, रिलायंस इंडस्ट्रीज, टाटा समूह,
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