बिजनेस स्टैंडर्ड - बैंकिंग सुधार जारी रखे सरकार
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बैंकिंग सुधार जारी रखे सरकार

अद्वैत राव पालेपू और अनूप रॉय / मुंबई 08 29, 2018

भारतीय रिजर्व बैंक की सालाना रिपोर्ट

आरबीआई ने कहा ...

दोहरी बैलेंस शीट की समस्या का हो समाधान
चालू खाते के घाटे का वित्तपोषण एफडीआई के प्रवाह से होगा
फंसी संपत्तियों के समधान के दायरे में एनबीएफसी भी आएंगे
विनिर्माण गतिविधियों में धीरे-धीरे आ रही है तेजी
निवेश और मांग में बनी हुई है नरमी

बिजनेस स्टैंडर्ड बैंकिंग सुधार जारी रखे सरकारभारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) चाहता है कि सरकार दोहरी बैलेंस शीट और कराधान के मसलों, तथा कृषि एवं प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) से जुड़ी समस्याओं के समाधान के लिए संरचानात्मक सुधारों में तेजी लाए। केंद्रीय बैंक को उम्मीद है कि इससे आने वाले दिनों में चालू खाते के घाटे में सुधार होगा। आरबीआई को बिजली क्षेत्र में फंसे कर्ज के मामले में हाल ही में इलाहाबाद उच्च न्यायालय के आदेश से बल मिला है। अदालत ने फंसी संपत्तियों पर राहत देने से इनकार कर दिया। 12 फरवरी को जारी अधिसूचना में आरबीआई ने बैंकों से कहा था कि अगर फंसे कर्ज पर 180 दिन में समाधान नहीं होता है तो उसे दिवालिया प्रक्रिया में ले जाएं।

अब आरबीआई 12 फरवरी की अपनी अधिसूचना का विस्तार गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) तक करना चाहती है। आरबीआई ने अपने विनियम के दायरे में आने वाले सभी क्षेत्रों में सुधार लाने का संकेत दिया है, वहीं कुछ एनबीएफसी के वरिष्ठï अधिकारियों ने कहा कि एकसमान नियमों से एनबीएफसी में व्यापक बदलाव नहीं आएगा। बैंक द्वारा शुरू की गई समाधान योजना में पक्ष बनाए जाने के बाद भी एनबीएफसी कंसोर्टियम में छोटी भागीदार होगी। एक बड़ी एनबीएफसी के वरिष्ठï अधिकारी ने कहा, 'हम बैंक के सभी नियमों का पहले से ही पालन कर रहे हैं। दिवालिया नियमों के दायरे में एनबीएफसी को शामिल किए जाने से हमारे परिचालन में कोई बदलाव नहीं आएगा।' 

केंद्रीय बैंक दबाव वाली संपत्तियों के मसले के समाधान के लिए दृढ़ दिख रहा है और उसने सरकार से आग्रह किया है कि अगले चरण के सुधार जारी रखे जाएं। आरबीआई ने अपनी सालाना रिपोर्ट में कहा है, 'ढांचागत सुधारों में तेजी लाने के लिए यह समय मुफीद है और इससे देश की अर्थव्यवस्था के विकास को गति मिलेगी।' आरबीआई ने कहा कि बैंक और कॉरपोरेट दोनों की बैलेंस शीट में फंसे कर्ज के समाधान की प्रणाली होने से उधारी आवंटन में वृद्धि हो रही है। आने वाले समय में बैंकों की उधारी और बढऩे की संभावना है।

इस बीच, बैंक उधारी दर में कटौती का लाभ ग्राहकों को देने में सक्षम नहीं हो पा रहे हैं क्योंकि उनके खाते में फंसे कर्ज का काफी ज्यादा बोझ है। आरबीआई की सालाना रिपोर्ट में विनिर्माण गतिविधियों में तेजी आने का भरोसा दिख रहा है क्योंकि पिछले साल से क्षमता उपयोगिता बढ़ रही है। आरबीआई ने कहा कि इससे पूंजीगत व्यय चक्र में सुधार का आधार तैयार हो रहा है। विनिर्माण क्षेत्र की वृद्घि में मुख्य योगदान निर्माण, कोयला खनन, उर्वरक और सीमेंट क्षेत्रों का है। इसके साथ ही सरकार की ओर से सस्ते आवास, सड़क और बंदरगाह परियोजनाओं को बढ़ावा दिए जाने से बुनियादी ढांचा परियोजनाएं भी विकास को बढ़ावा देंगी।

रिपोर्ट में कहा गया है, 'बुनियादी ढांचा क्षेत्रों में विकास को गति देने के साथ ही रोजगार बढ़ाने की भी काफी संभावनाएं हैं।' हालांकि मांग और निवेश स्थिर बना हुआ है। रिपोर्ट में कहा गया है, 'नीतियों को लेकर अनिश्चितता और अटकी परियोजनाओं के कारण निवेश के माहौल पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है।' निजी क्षेत्र और सरकार की ओर से खपत धीमी रहने से कुल मांग में कमी आई है। सकल नियम पूंजी सृजन 2016-17 में जीडीपी का 43.2 फीसदी था जो 2017-18 में जीडीपी का 35.6 फीसदी रहा। हालांकि निवेश दर में वृद्घि हुई है और यह 2017-18 में बढ़कर जीडीपी का 34.1 फीसदी हो गई, जो 2016-17 में 33.2 फीसदी थी। विमुद्रीकरण, जीएसटी, बॉन्डों और शेयरों की वैश्विक बिकवाली, पूंजी निकासी और बैंकों में फंसे कर्ज के झटकों से अब अर्थव्यवस्था उबरती दिख रही है। हालांकि मुद्रास्फीति को अब भी चिंता बनी हुई है।

आरबीआई ने कहा, 'मुद्रास्फीति का वर्तमान परिदृश्य अनिश्चितता भरा है।' विभिन्न राज्य सरकारों द्वारा आवास किराया भत्ता (एचआरए) में वृद्घि करने से 2018-19 में मुख्य महंगाई में वृद्धि हो सकती है। इसके साथ ही भू-राजनीतिक जोखिमों से कच्चे तेल और जिंसों की कीमतों से भी मुद्रास्फीति का दबाव बढ़ सकता है। खरीफ के मसर्थन मूल्य में इजाफा करने से भी कीमतों पर कुछ प्रभाव पड़ेगा। वैश्विक वित्तीय बाजार में उतार-चढ़ाव से भी मुद्रास्फीति बढऩे का जोखिम बना हुआ है।

रिपोर्ट में राज्य सरकारों और केंद्र सरकार की राजकोषीय स्थिति को लेकर भी चिंता जताई गई है, जिसमें पिछले साल की तुलना में गिरावट आई है। 2017-18 के संशेाधित अनुमान में केंद्र और राज्यों के समेकित सकल राजकोषीय घाटा जीडीपी के 6.6 फीसदी के मुकाबले 2018-19 में 5.9 फीसदी पर रहने का अनुमान लगाया गया है। केंद्रीय बैंक ने कहा कि उसका लक्ष्य तरलता प्रबंधन परिचालन को मौद्रिक नीति के रुख के अनुरूप रखना है।
Keyword: bank, loan, debt, RBI, GST, bond, भारतीय रिजर्व बैंक,
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