बिजनेस स्टैंडर्ड - जीएसटीएन पर दूर नहीं हुई मुश्किल
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जीएसटीएन पर दूर नहीं हुई मुश्किल

देवाशिष महापात्र / बेंगलूरु 08 28, 2018

 

जीएसटीएन में रिसेट और तिमाही फाइलिंग जैसे विकल्प नहीं हैं

बिजनेस स्टैंडर्ड जीएसटीएन पर दूर नहीं हुई मुश्किल

तकनीकी अड़चन

 संशोधन और रिसेट विकल्प की कमी

तिमाही फाइलिंग का विकल्प नहीं होना

दिक्कत दूर करने में लगने वाला लंबा समय

इनपुट टैक्स क्रेडिट पाने में मुश्किल

वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) लागू हुए एक साल से अधिक समय हो चुका है लेकिन जीएसटी नेटवर्क (जीएसटीएन) की तकनीकी खामियों को अब तक दूर नहीं किया जा सका है। छोटे और मझोले कारोबारियों का कहना है कि यह उनके अनुकूल नहीं है क्योंकि इसमें रिसेट और तिमाही फाइलिंग जैसे विकल्प नहीं हैं। अलबत्ता जीएसटीएन के अधिकारियों का दावा है कि छोटे कारोबारियों की अधिकांश दिक्कतों को दूर कर लिया गया है और व्यवस्था को उनकी मांगों के अनुरूप अपग्रेड किया गया है।  कारोबारियों का कहना है कि जीएसटी हेल्पडेस्क के जरिये उनकी दिक्कतों को दूर करने में समय लगता है जिससे कभी-कभी रिटर्न दाखिल करने में देर हो जाती है। इससे उन पर जुर्माना लग जाता है।

फेडरेशन ऑफ कर्नाटक चेंबर्स ऑफ कॉमर्स ऐंड इंडस्ट्री की कर सलाहकार परिषद की प्रमुख विजयलक्ष्मी ने कहा, 'संशोधन और रिसेट का विकल्प नहीं होना रिटर्न दाखिल करने वालों के लिए एक बहुत बड़ी समस्या है। पहले रिसेट का विकल्प होता था जिससे कोई गलती होने पर उसे दुरुस्त किया जा सकता था। हम चाहते हैं कि यह विकल्प फिर से दिया जाए ताकि कारोबारियों को अगले महीने तक इंतजार करने के बजाय तुरंत गलती को दुरुस्त करने का मौका मिल जाए।'

उन्होंने साथ ही कहा कि 5 करोड़ तक टर्नओवर वाले छोटे और मझोले कारोबारियों के लिए रिटर्न फाइल करने की व्यवस्था में बदलाव के बावजूद अभी तक इस विकल्प को सॉफ्टवेयर सिस्ट में शामिल नहीं किया गया है। 

जीएसटी परिषद ने जुलाई में छोटे और मझोले कारोबारियों को छूट देते हुए हर महीने के बजाय तिमाही रिटर्न फाइल करने की सुविधा देने का फैसला किया था। अलबत्ता उन्हें हर महीने रिटर्न फाइल करना पड़ रहा है क्योंकि तिमाही फाइलिंग का विकल्प अभी जीएसटीएन पर उपलब्ध नहीं है।

छोटे कारोबारियों की संस्थाओं का यह भी कहना है कि एंट्री बिल में कर भुगतान नहीं दिख रहा है जिससे कई आयातक इनपुट टैक्स क्रेडिट का दावा नहीं कर पा रहे हैं। कर्नाटक स्मॉल स्केल इंडस्ट्रीज एसोसिएशन की जीएसटी संबंधी समिति के प्रमुख टी उमाशंकर ने कहा, 'जीएसटी हेल्पडेस्क में मशीन के बजाय इंसान को तवज्जो दिए जाने की जरूरत है। अभी अगर आप शिकायत करते हैं तो आपको एक टिकट नंबर मिलता है और दिक्कत दूर होने में बहुत समय लगता है।' 

पिछले साल जुलाई में जीएसटी लागू होने के बाद जीएसटीएन को शुरू से ही तकनीकी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। इस कारण सरकार कई बार रिटर्न दाखिल करने की समयसीमा बढ़ा चुकी है। अभी इसका संचालन इन्फोसिस के पास है जिसने जीएसटी प्लेटफॉर्म को विकसित करने और चलाने का सौदा 2015 में 13.80 अरब रुपये में हासिल किया था। कंपनी ने इस बारे में टिप्पणी करने से इनकार कर दिया।
Keyword: GSTN, GST, वस्तु एवं सेवा कर, जीएसटी, Industry, Input tax, Credit, Infosys,
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