बिजनेस स्टैंडर्ड - आयुष्मान भारत: गुजरात में नहीं बाधा
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आयुष्मान भारत: गुजरात में नहीं बाधा

विनय उमरजी /  08 27, 2018

आयुष्‍मान भव:

बिजनेस स्टैंडर्ड आयुष्मान भारत: गुजरात में नहीं बाधाराज्य स्वास्थ्य आश्वासन योजना- मुख्यमंत्री अमृतं को सफलतापूर्वक 6 साल पूरे
संप्रग की राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना और राज्य की मुख्यमंत्री अमृतं के तहत 2.2 करोड़ से अधिक लाभार्थी कवर
मुख्यमंत्री अमृतं के लाभार्थियों को 3 लाख रुपये तक का सालाना पारिवारिक कवर
मुख्यमंत्री अमृतं के सॉफ्टवेयर के जरिये लाभार्थियों और अस्पतालों के डेटाबेस का प्रबंधन
वर्तमान योजनाओं में 95 फीसदी लाभार्थी कवर

25 सितंबर को शुरुआत होने वाली आयुष्मान भारत योजना के चार भागों की शृंखला की पहली कड़ी में गुजरात में तैयारी का जायजा

बिजनेस स्टैंडर्ड आयुष्मान भारत: गुजरात में नहीं बाधापरिवार की सालाना आमदनी 36,000 रुपये होने के बावजूद 48 वर्षीय वेचाटजी ठाकोर गुजरात के गांधीनगर के कलोल में पीएसएम अस्पताल में पौरुष ग्रंथि में सूजन और पित्त की थैली की पथरी का इलाज करा रहे हैं। वह अस्पताल के बिल को लेकर बिल्कुल भी चिंतित नहीं हैं। इस खेतिहर मजदूर के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आयुष्मान भारत स्वास्थ्य योजना अभी महज एक घोषणा है, लेकिन उन्हें राज्य की मुख्यमंत्री अमृतं स्वास्थ्य आश्वासन योजना का असल में लाभ मिल रहा है। ठाकोर के परिवार में 12 सदस्य हैं। लेकिन उन्हें बीमार पडऩे के बाद अभी तक किसी वित्तीय दिक्कत का सामना नहीं करना पड़ा। इसका श्रेय मुख्यमंत्री अमृतं को दिया जाना चाहिए, जिसमें 44.85 लाख परिवार या 2.2 करोड़ लोग कवर हैं।

ठाकोर ने कहा, 'लेकिन निस्संदेह 5 लाख रुपये के कवर वाली आयुष्मान भारत 3 लाख रुपये के कवर वाली मुख्यमंत्री अमृतं से बेहतर होगी।' मुख्यमंत्री अमृतं की शुरुआत वर्ष 2012 में हुई, जिस समय नरेंद्र मोदी मुख्यमंत्री थे। शुरुआत में इसका मकसद गरीब रेखा से नीचे (बीपीएल) परिवारों को गंभीर बीमारियों के इलाज की सेवा (तृतीयक सेवाएं) मुहैया कराना था। लेकिन विस्तारित मुख्यमंत्री अमृतं वात्सल्य योजना के तहत 3 लाख रुपये से कम सालाना आमदनी वाले गरीब रेखा से ऊपर के परिवारों को भी शामिल कर लिया गया है। आयुष्मान भारत में सामाजिक आर्थिक और जातीय जनगणना में चिह्नित बीपीएल लाभार्थी स्वत: ही शामिल हो जाएंगे। हालांकि मुख्यमंत्री अमृतं और मुख्यमंत्री अमृतं वात्सल्य में लाभार्थियों तक पहुंचने और पंजीकरण करने के लिए स्थानीय स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं की जरूरत होती है। 

गुजरात सरकार के सूत्रों का अनुमान है कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना प्राथमिक एवं द्वितीयक चिकित्सा सेवाओं को भी कवर करती है, इसलिए अगर उसे भी शामिल किया जाए तो राज्य में मुख्यमंत्री अमृतं के लिए पात्र 95 फीसदी बीपीएल परिवार कवर हैं। आयुष्मान भारत को शुरू करने के लिए उठाए जा रहे कदमों के बावजूद न लाभार्थियों और न ही स्थानीय प्रशासन को आयुष्मान भारत के बारे में कोई जानकारी है। हालांकि मोदी ने 15 अगस्त को औपचारिक रूप से राष्ट्रीय स्वास्थ्य सुरक्षा योजना का उद्घाटन किया, जिसमें सालाना 5 लाख रुपये का स्वास्थ्य बीमा कवर मुहैया कराकर 10 करोड़ वंचित परिवारों को शामिल करने की योजना है। 

बिजनेस स्टैंडर्ड आयुष्मान भारत: गुजरात में नहीं बाधाहालांकि मेहसाणा के काडी तालुका के कुंडल गांव में स्थानीय स्वास्थ्य केंद्र में स्वास्थ्यकर्मी पहले की तरह की काम कर रहे हैं। इस केंद्र में खूब भीड़ है, जहां हर सप्ताह करीब 35 मरीज आ रहे हैं क्योंकि इस क्षेत्र में इसी केंद्र डायलिसिस की सुविधा है। यहां काम करने वाली झलक दवे ने कहा, 'हमें आयुष्मान भारत के बारे में अभी कोई सूचना नहीं मिली है।' मुख्यमंत्री अमृतं की व्यवस्थाएं ठीक से चल रही हैं। दवे मुख्यमंत्री अमृतं के सॉफ्टेवयर को इस्तेमाल करने में पूरी तरह कुशल हैं। पिछले छह वर्षों के दौरान इस योजना और सॉफ्टवेयर दोनों के दायरों में इजाफा हुआ है। पहले सॉफ्टवेयर से केवल लाभार्थियों को पंजीकृत किया जाता था, लेकिन अब इसके जरिये अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों को सूची में भी शामिल किया जा रहा है। इलाज के लिए आने वाले मरीज दवे को अपना मुख्यमंत्री अमृतं पहचान पत्र दिखाते हैं। वह उनके फिंगरप्रिंट स्कैन के अलावा कंप्यूटर में ब्योरे दर्ज करती हैं। इसके बाद सॉफ्टवेयर दवे के सामने मरीज के स्वास्थ्य का रिकॉर्ड, उस समय चल रहे इलाज और डॉक्टर के निर्देश पेश करता है। 

गुर्दे की मरीज मीनाबेन बावालिया काडी सेंटर में डायलिसिस के लिए आई हैं। प्रवेश की औपचारिकताएं पूरी करने के बाद उन्हें 2,300 रुपये के बिल का प्रिंटआउट दिया गया है। यह बिल मिलने से वह चिंतित नहीं हैं। वह जानती हैं कि सरकार अस्पतालों और केंद्रों को गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए सीधे भुगतान करती है। राज्य आयुष्मान भारत के तहत यह चुन सकते हैं कि वे पहचान पत्रों का प्रबंधन कैसे करेंगे। गुजरात ने पहले ही लाभार्थियों को जारी मुख्यमंत्री अमृतं कार्ड का इस्तेमाल जारी रखने का फैसला किया है और उसे इनमें कोई समस्या नजर नहीं आती है। 

गुजरात में एक स्वास्थ्य अधिकारी ने कहा, 'केंद्र आयुष्मान लाभार्थियों के लिए ई-कार्ड जारी करेगा। इन कार्डों और मुख्यमंत्री अमृतं योजना के वर्तमान डेटा को सॉफ्टवेयर में दर्ज किया जाएगा। इसलिए सॉफ्टेवयर किसी फर्जीवाड़े के बारे में बता देगा। हमें नहीं लगता कि आयुष्मान योजना शुरू होने के बाद लाभार्थियों के डेटा को संभालने में कोई दिक्कत आएगी।' हालांकि केंद्र सरकार की तरफ से इस बारे में कोई दिशानिर्देश नहीं जारी किए गए हैं कि वर्तमान मुख्यमंत्री अमृतं योजना को आयुष्मान भारत से कैसे जोड़ा जाएगा। लेकिन अधिकारियों को भरोसा है कि इसमें कोई अड़चन नहीं आएगी। 

स्वास्थ्य आयुक्त (चिकित्सा सेवाएं एवं चिकित्सा शिक्षा) जयंती रवि ने कहा, 'इन्हें जोडऩे में कोई दिक्कत नहीं आएगी। राज्य सरकारों को यह विकल्प दिया गया है कि वे जिस सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल करना चाहती हैं, उसका इस्तेमाल कर सकती हैं। गुजरात में हमारा मुख्यमंत्री अमृतं सॉफ्टवेयर और आयुष्मान भारत का सॉफ्टवेयर एक साझा एप्लीकेशन प्रोग्राम इंटरफेस के जरिये बिना किसी बाधा के जुड़ जाएंगे।' आयुष्मान भारत को शुरू करने की 25 सितंबर की अंतिम तिथि के बारे में रवि ने कहा कि बीमा प्रदाता के लिए निविदाएं आमंत्रित करने का काम तेज किया गया है। हालांकि योजना का पूरे राज्य में प्रचार-प्रसार इसकी शुरुआत के वक्त शुरू होगा। 

गुजरात ने 'मिश्रित मॉडल' चुना है, जिसके तहत प्रत्येक परिवार को 50,000 रुपये तक के इलाज का कवर बीमा कंपनी देगी, जबकि 4.5 लाख रुपये का शेष कवर सरकार देगी। ओरियंटल इंश्योरेंस कंपनी ने प्रत्येक परिवार के लिए 50,000 रुपये तक के कवर की बोली 361 रुपये पर हासिल की है। कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि गुजरात में मुख्यमंत्री अमृतं योजना की सफलता, बिस्तर एवं अस्पतालों की दृष्टि से बेहतर सुविधाओं, मुख्यमंत्री अमृतं के तहत पहले ही पैनल में शामिल हो चुके निजी अस्पतालों की संख्या और प्राथमिक चिकित्सा केंद्रों पर डॉक्टरों की संख्या को देखते हुए राज्य में आयुष्मान भारत की शुरुआत अन्य राज्यों की तुलना में ज्यादा आसान रहेगी। 

भारतीय प्रबंध संस्थान, अहमदाबाद में स्वास्थ्य सेवा प्रबंधन केंद्र के चेयर राजेश चंदवानी ने कहा, 'बीमा पर ज्यादा निर्भरता से गुजरात में इलाज की लागत बढ़ती। मिश्रित मॉडल शुद्ध बीमा मॉडल की तुलना में ज्यादा बेहतर है।'  मुख्यमंत्री अमृतं के तहत इलाज के लिए बड़ी तादाद में लाभार्थियों के आने से कलोल के पीएसएम अस्पताल जैसे निजी अस्पताल इलाज की दरों से संतुष्ट हैं। उदाहरण के लिए उन्हें कोरोनरी बैलून एंजियोप्लास्टि के लिए 24,150 रुपये मिलते हैं। पीएसएम अस्पताल में प्रमुख चिकित्सक डॉ. जयदत्त मेहता ने कहा, 'अस्पताल में 75 फीसदी सर्जरी और अन्य गंभीर रोगों का इलाज बीपीएल लाभार्थियों का होता है। आयुष्मान के दिशानिर्देश अभी नहीं आए हैं।'
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