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फसल बीमा खत्म होने से किसानों पर संकट

बीएस संवाददाता / पटना August 26, 2018

 
बिहार में फसल बीमा योजना के बंद होने से किसानों के सामने एक नई समस्या खड़ी हो गई है। इस वजह से बैंक अब फसल ऋण देने से इनकार कर रहे हैं। हालांकि, राज्य सरकार ने बैंकों से तुरंत इस बारे में स्थिति सुधारने को कहा है।  राज्य में इस साल खरीफ के मौसम से बिहार सरकार ने केंद्र सरकार की महत्त्वाकांक्षी फसल बीमा योजना को बंद करने का ऐलान किया था। सरकार के मुताबिक इस योजना से बीमा कंपनियां प्रीमियम के रूप में मोटी रकम कमा रही हैं, जबकि किसानों को दावे के विरुद्ध काफी कम रकम मिल रही थी। इसीलिए राज्य सरकार ने इस बार इस योजना के तहत करीब 500 करोड़ रुपये के प्रीमियम के भुगतान से साफ इनकार कर दिया। इसकी जगह सरकार ने फसल बीमा योजना के नाम से एक नई योजना की शुरुआत की है। इसके तहत किसी भी आपदा की स्थिति में अगर खेत में खड़ी 20 फीसदी से ज्यादा फसल बरबाद होती है, तो किसानों को इस योजना के तहत प्रति एकड़ 20,000 रुपये मिलेंगे। लेकिन इस योजना का लाभ सिर्फ सीमांत और छोटे किसानों को ही मिलेगा। 
 
हालांकि इस योजना की वजह से बैंक अब किसानों को फसल ऋण देने से इनकार कर रहे हैं। राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति की बैठक में ऐसे कई मामले आए। बैंकरों ने इस बारे में राज्य सरकार से स्थिति स्पष्ट करने को कहा। उनके मुताबिक फसल ऋण हासिल करने के लिए फसल बीमा कराना जरूरी होता है। बिहार में इस बीमा योजना को बंद कर दिए जाने से उनके सामने व्यावहारिक समस्या खड़ी हो गई है। राज्य के उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने बताया कि वह इस मुद्दे को केंद्र सरकार के समक्ष उठाएंगे। उन्होंने कहा, 'सिर्फ फसल बीमा नहीं होने की वजह से किसानों को फसल ऋण नहीं दिया जाना ठीक नहीं है। हम इस मुद्दे को केंद्र सरकार के समक्ष रखेंगे। तब तक हमने बैंकों से इस बारे में किसानों की मदद करना जारी रखने को कहा है।'
 
हालांकि, राज्य सरकार की इस महत्त्वाकांक्षी योजना में किसानों ने अब तक कुछ खास दिलचस्पी नहीं दिखाई है। राज्य के 1.50 करोड़ किसानों में से अब तक महज 3 लाख ने इस बारे में निबंधन किया है। वहीं, फसल ऋण नहीं मिलने की वजह से राज्य का ऋण विकास भी सुस्त पड़ गया है। 
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