बिजनेस स्टैंडर्ड - बाकी है समस्या
 Search  BS Hindi  Web   BS E-Paper|      Follow us on 
Business Standard
Friday, November 16, 2018 05:06 AM     English | हिंदी

होम

|

बाजार

|

कंपनियां

|

अर्थव्यवस्था

|

मुद्रा

|

विश्लेषण

|

निवेश

|

जिंस

|

क्षेत्रीय

|

विशेष

|

विविध

|

अर्थनामा

 
होम विशेष खबर

बाकी है समस्या

संपादकीय /  August 26, 2018

वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के क्रियान्वयन को लेकर जो हड़बड़ाहट दिखाई गई उसकी वजह से कई समस्याएं सामने आने लगी हैं जो भविष्य में देश की कारोबारी लागत में काफी इजाफा कर सकती हैं। ई-वे बिल व्यवस्था के कारण उत्पन्न दिक्कतें और निर्यातकों को एकीकृत जीएसटी (आईजीएसटी) रिफंड में देरी की समस्या को अभी भी दूर किया जाना है। इस बीच कई नई समस्याएं सर उठाने लगी हैं। इनमें से पहली है कर्नाटक में अथॉरिटी ऑफ एडवांस रूलिंग (एएआर) का एक विचित्र निर्णय। इसके मुताबिक किसी कंपनी के मुख्यालय मसलन एचआर, आईटी या अन्य प्रशासनिक बातों से जुड़ी अगर कोई गतिविधि होती है तो इसे आपूर्ति मानते हुए वहां कार्यरत कर्मचारियों की वेतन लागत पर जीएसटी लगाया जाएगा। हालांकि शाखा कार्यालय पूरा इनपुट टैक्स क्रेडिट और अनुपालन लागत प्राप्त कर सकेगा। यह याद रहे कि कंपनी और कर अधिकारियों के बीच मुख्यालय की लागत के आकलन से जुड़ी अनिरंतरताएं एकदम अनावश्यक हैं क्योंकि वास्तव में मुख्यालय और शाखा कार्यालय एक ही कर चुकता करने वाले संस्थान हैं।

 
कर्नाटक के प्राधिकरण का कहना है कि यह निर्णय जीएसटी अधिनियम के उस नियम पर आधारित है जो मुख्यालय और शाखा कार्यालय को अलग-अलग विधिक इकाई मानता है लेकिन ऐसा सैद्धांतिक तौर पर जीएसटी की गंतव्य आधारित प्रकृति को देखकर किया गया है। जैसा कि कर विशेषज्ञों का कहना है, यह कानून की मूल भावना के विरुद्ध है। जीएसटी की प्रकृति से जुड़ा ऐसा ही एक मामला विभिन्न राज्यों में फैक्टरी से इतर बिक्री से जुड़ा हुआ है। किसी एक राज्य की एक कंपनी अगर अपना उत्पाद किसी अन्य राज्य में स्थित फैक्टरी से मंगाना चाहती है तो उसे आईजीएसटी चुकाना होगा, इससे अनुपालन लागत बढ़ सकती है और विनिर्माताओं को बिना वजह परेशान होना पड़ेगा।
 
एक समस्या जिसने शुरुआत से ही देश की कराधान प्रणाली को अपनी चपेट में ले रखा है, वह है उलट ड्यूटी। यानी विनिर्मित वस्तुओं पर कर दर का कम होना जबकि कच्चे माल पर कर दर ज्यादा होना। यह समस्या जीएसटी में भी नजर आ रही है। इस मामले में तो यह राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन सरकार के मेक इन इंडिया कार्यक्रम को भी प्रभावित कर सकती है। हाल ही में बहुराष्ट्रीय लोकोमोटिव निर्माताओं मसलन जीई, एल्सटॉम और बॉम्बार्डियर, ने सरकार के समक्ष इस मसले पर लॉबीइंग की। उनका कहना है कि लोकोमोटिव पर 5 फीसदी शुल्क है जबकि कच्चे माल पर शुल्क 18 फीसदी से 28 फीसदी के बीच है। जुलाई में दिए गए एक निर्णय में जीएसटी परिषद ने उन मामलों में रिफंड की इजाजत दे दी थी जहां शुल्क ढांचा उलट प्रकृति का था। यानी वैगन निर्माताओं को अतिरिक्त इनपुट टैक्स का भार उठाना होगा। भारत जैसा देश जो हैवी इंजीनियरिंग में और अधिक प्रत्यक्ष विदेशी निवेश जुटाने के लिए उत्सुक है, उसके लिए यह वास्तव में बहुत विचित्र स्थिति है।
 
निश्चित तौर पर इन तमाम मसलों को आगामी सितंबर माह में आयोजित होने वाली जीएसटी परिषद की अगली बैठक में हल कर लिया जाएगा लेकिन व्यापक तथ्य यही है कि जीएसटी के आगमन के बाद भी देश के कराधान के चरित्र में कोई खास बदलाव नहीं आया है। अपील के साथ-साथ विषय आधारित स्पष्टीकरण की पुरानी व्यवस्था अभी गई नहीं है। इनमें से कई मसले हल हो सकते थे अगर इस जटिल और क्रांतिकारी व्यवस्था को लागू करने के पहले अच्छी तरह परखा गया होता। परंतु जल्दी क्रियान्वयन करने से केवल देश की उस कर व्यवस्था की खामियां ही सामने आई हैं जो हकीकत में एक बहुत बड़े बदलाव की वाहक हो सकती थी।
Keyword: IGST, GST, tax, credit, refund, AAR, वस्तु एवं सेवा कर, जीएसटी,,
Advertisements
  Cover from Earthquake & Floods. Buy Home Insurance
   Get seamless access to Business Standard & WSJ.com starting at just Rs. 49/- per month*
Display Name  Email-Id  
Post your comment

CAPTCHA Image Reload Image Enter Code*:
  आपका मत
 क्या पटरी पर लौट रहा देश का निर्यात?
हां नहीं  
पढ़िये
ईमेल
About us Authors Partner with us Jobs@BS Advertise with us Terms & Conditions Contact us RSS Site Map  
Business Standard Private Ltd. Copyright & Disclaimer feedback@business-standard.com
This site is best viewed with Internet Explorer 6.0 or higher; Firefox 2.0 or higher at a minimum screen resolution of 1024x768
* Stock quotes delayed by 10 minutes or more. All information provided is on "as is" basis and for information purposes only. Kindly consult your financial advisor or stock broker to verify the accuracy and recency of all the information prior to taking any investment decision. While due diligence is done and care taken prior to uploading the stock price data, neither Business Standard Private Limited, www.business-standard.com nor any independent service provider is/are liable for any information errors, incompleteness, or delays, or for any actions taken in reliance on information contained herein.