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केरल में बाढ़ का असर : आपूर्ति घटने से बढ़े रबर के दाम

टी ई नरसिम्हन / चेन्नई August 26, 2018

केरल में बारिश और बाढ़ की वजह से रबर की कीमतें करीब छह फीसदी बढ़कर 23 अगस्त को 134 रुपये प्रति किलोग्राम पर पहुंच गईं, जो 31 जुलाई को 127 रुपये प्रति किलोग्राम थीं। केरल रबर की 85 फीसदी घरेलू मांग पूरी करता है।  टायर बनाने वाली कंपनियां कीमतों से ज्यादा उपलब्धता को लेकर चिंतित हैं। प्राकृतिक रबर की सबसे ज्यादा खपत टायर उद्योग में ही होती है। टायर कंपनियों का मानना है कि चालू वित्त वर्ष के दौरान रबर की उपलब्धता मांग से करीब 5 लाख टन कम रहेगी। केरल में बारिश 1 अगस्त से शुरू हुई और 8 अगस्त से अत्यधिक तेज हो गई। केरल प्लांटर्स एसोसिएशन (केपीए) का अनुमान है कि रबर की 40 फीसदी फसल खराब हो गई है। इसका मतलब है कि 2018-19 में 6 लाख टन का लक्षित उत्पादन किसी तरह संभव नहीं है। अप्रैल से जून के दौरान उत्पादन 45,000 टन से कम रहा है, जबकि अगस्त में ना के बराबर उत्पादन हुआ है। 

 
ऑटोमोटिव टायर मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (एटमा) के महानिदेशक राजीव बुधराजा का कहना है कि बाजार में आवक मामूली है। उन्होंने कहा कि अप्रैल-जून अवधि की 40 फीसदी से अधिक मांग आयात से पूरी हुई। बुधराजा ने कहा, 'हमारा अनुमान है कि चालू वित्त वर्ष के दौरान आपूर्ति मांग से करीब 5 लाख टन कम रहेगी।' उन्होंने कहा कि आने वाले समय को लेकर भी चिंताएं हैं क्योंकि प्रत्येक रबर के पेड़ का जीवनकाल 25 से 30 वर्ष होता है। इंडिया रेटिंग्स ऐंड रिसर्च का अनुमान है कि जून, 2018 के अंत में प्राकृतिक रबर की क्लोजिंग इन्वेंट्री करीब 2,34,000 टन थी। इसमें से 60 फीसदी स्टॉक उत्पादकों और डीलरों के पास भंडारित हो सकता है। यह स्टॉक बाढ़ से प्रभावित होने की आशंका है। 
 
इंडिया रेटिंग्स ऐंड रिसर्च प्राइवेट लिमिटेड में वरिष्ठ विश्लेषक रिचा बुलानी ने कहा कि प्राकृतिक रबर के आयात पर 25 फीसदी शुल्क है। वहीं अब कमजोर होते रुपये से आयात महंगा होने के आसार हैं। इससे टायर कंपनियों के मार्जिन पर असर पड़ेगा। पूरे टायर उद्योग का एबिटा मार्जिन ऊंची उत्पादन लागत के कारण दूसरी और तीसरी तिमाही में 1.5 से 2 फीसदी घट सकता है। टायर उत्पादन में रबर प्रमुख कच्चा माल है। इसका कच्चे माल की कुल लागत में करीब 50 फीसदी हिस्सा है। 
Keyword: rubber, kerala, flood, price, रबर,
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