बिजनेस स्टैंडर्ड - केरल में बाढ़ से गरम हुए मसाले
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केरल में बाढ़ से गरम हुए मसाले

संजीव मुखर्जी, इंदिवजल धस्माना और टी ई नरसिम्हन / नई दिल्ली/चेन्नई 08 22, 2018

केरल से आने वाले मसालों के दाम 100% तक बढ़े

देश के थोक बाजारों में छोटी इलायची और कालीमिर्च की कीमतें दोगुनी
आवश्यक खाद्य वस्तु न होने से खपत पर नहीं पड़ा असर
कीमत बढ़ोतरी आपूर्ति की किल्लत से नहीं बल्कि रुझानों से हुई

बिजनेस स्टैंडर्ड केरल में बाढ़ से गरम हुए मसालेकेरल में पिछले एक पखवाड़े के दौरान भारी बारिश और बाढ़ से फसलों को नुकसान पहुंचा है, जिससे इलायची और कालीमिर्च जैसे मसालों की कीमतों में भारी बढ़ोतरी हुई है।  दिल्ली के खारी बावली बाजार में गुप्ता स्टोर के मालिक नीरज गुप्ता ने कहा, 'पिछले कुछ दिनों के दौरान केरल से आने वाले सभी मसालों के दाम 100 फीसदी तक बढ़ गए हैं। इससे मुझ जैसे खुदरा विक्रेताओं की खरीद लागत बढ़ गई है। हालांकि इनकी खपत कम नहीं हुई है क्योंकि छोटी इलायची, कालीमिर्च जैसे मसाले आवश्यक खाद्य पदार्थ नहीं माने जाते हैं।'

पुरानी दिल्ली के खारी बावली में अपनी एक छोटी दुकान में बैठे गुप्ता ने कहा कि केरल में एक पखवाड़े तक बारिश एवं बाढ़ से मसालों के बाजार पर सीधा असर पड़ा है। छोटी हरी इलायची की कीमतें करीब 200 रुपये बढ़कर 1,800 रुपये प्रति किलोग्राम हो गई हैं, जबकि कालीमिर्च के दाम 100 रुपये बढ़कर 550 रुपये प्रति किलोग्राम हो गए हैं।  दिल्ली के जाने-माने चांदनी चौक के पास स्थित खारी बावली देश के सबसे बड़े मसाला और किराना बाजारों में से एक है। इस जगह पर हमेशा मसालों की सुगंध आती रहती है। खारी बावली से ही पूरे उत्तर, मध्य और पूर्वी भारत में मसाले पहुंचते हैं। यहां मसालों का एक बड़ा हिस्सा दक्षिणी राज्य केरल से आता है। केरल में बाढ़ से खाली बावली में आपूर्ति बंद नहीं हुई है क्योंकि ज्यादातर कारोबारियों के पास पिछले वर्षों का खरीदा हुआ माल है। हालांकि यह स्टॉक खत्म होने से किल्लत पैदा हो सकती है।

खारी बावली किराना ट्रेडर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष विजय गुप्ता ने कहा, 'आम तौर पर छोटी इलायची, काली मिर्च, सौंठ, जावित्री और जायफल की आवक सितंबर से दिसंबर के बीच केरल से होती है। लेकिन केरल में खड़ी फसलों को नुकसान की खबरों से कीमतें बढ़ गई हैं।'

गुप्ता ने कहा कि कीमतों में यह बढ़ोतरी मुख्य रूप से रुझानों के कारण हुई है क्योंकि इस समय आपूर्ति की किल्लत नहीं है। गुप्ता ने कहा, 'खारी बावली में ज्यादा कारोबारी दिल्ली और उसके आसपास के गोदामों में भरे स्टॉक पर निर्भर हैं, इसलिए फिलहाल आपूर्ति की कमी नहीं है।' उन्होंने कहा कि लगभग पूरी छोटी इलायची की खरीद केरल से होती है। कालीमिर्च की खरीद भी बड़ी मात्रा में केरल से ही होती है, जबकि जावित्री और जायफल का आयात श्रीलंका जैसे पड़ोसी देशों से भी होता है। केरल और कर्नाटक के कुछ हिस्सों में भारी बारिश से कालीमिर्च, इलायची, कॉफी और चाय समेत कई प्रमुख फसलों को नुकसान पहुंचा है। 

इन जिंसों की आवक कम है, जिससे इनके दाम करीब 30 से 50 फीसदी बढ़ गए हैं। इनके दाम आगे और बढऩे के आसार हैं क्योंकि इन फसलों का नुकसान आगे और बढ़ सकता है। ये सभी जिंस आम आदमी के रोजमर्रा के जीवन का हिस्सा हैं। काला सोना कही जाने वाली कालीमिर्च की कीमतें बढ़कर 405 रुपये प्रति किलोग्राम हो गई हैं, जो केरल में 8 अगस्त को भारी बारिश शुरू होने के दिन 305 रुपये प्रति किलोग्राम थीं। स्थानीय उत्पादकों ने कालीमिर्च के आयात की संभावना से इनकार किया। इसकी वजह यह है कि घरेलू खपत के लिए कालीमिर्च के आयात पर रोक है। इसका केवल फिर से निर्यात करने के लिए आयात किया जा सकता है।

इसी तरह इलायची के दाम 1,000 रुपये से बढ़कर 1,260 से 1,280 रुपये प्रति किलोग्राम हो गए हैं। पिछले साल केरल में करीब 25,000 टन इलायची का उत्पादन होने का अनुमान लगाया गया था। इस फसल को चालू सीजन में करीब 40 से 60 फीसदी नुकसान का अनुमान है क्योंकि इडुक्की और वयनाड जैसे इलायची उत्पादक क्षेत्र बारिश एवं बाढ़ से बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। मसाला बोर्ड के मुताबिक देश में इलायची का उत्पादन 2017-18 में 26,070 टन रहने का अनुमान है। इसमें छोटी इलाचयी का हिस्सा 20,640 टन रहा, जबकि शेष हिस्सा बड़ी इलायची का था। छोटी इलायची का ज्यादातर उत्पादन दक्षिण भारत में होता है। केरल छोटी इलायची का सबसे बड़ा उत्पादक है। इसके बाद कर्नाटक और तमिलनाडु बड़े उत्पादक हैं।

कर्नाटक में भी कोडागु, हासन और चिकमगलूरु जिलों में अत्यधिक बारिश से इलायची का उत्पादन प्रभावित हुआ है, लेकिन अभी उत्पादक नुकसान का आकलन नहीं कर पाए हैं। दक्षिण भारत में बड़ी चाय बागान कंपनियों में से एक हरिसन मलयालम के पूर्णकालिक निदेशक और मुख्य कार्याधिकारी एन धर्मराज ने कहा कि पिछले एक सप्ताह में चाय की कीमतें नीलामी में 90 के औसत से 30 फीसदी बढ़ चुकी हैं। 

कर्नाटक ग्रोवर्स फेडरेशन के अनुमान के मुताबिक कोडागु, हासन और चिकमगलूरु जिलों में काफी के बागान 6,000 से अधिक एकड़ में हैं। कनार्टक का देश के कुल कॉफी उत्पादन में 70 फीसदी योगदान है और राज्य से 4 लाख टन कॉफी का निर्यात होता है। बारिश से फसल और आवक पर असर पड़ा है, जिससे कॉफी की कीमतें बढ़ी हैं। आवक पर असर पडऩे के कारण कोचीन चाय नीलामी केंद्र ने इस सप्ताह नीलामी रोक दी है, लेकिन कन्नूर और कोयंबटूर ने नीलामी जारी रखी है।

केंद्रीय सुपारी एवं कोकोआ विपणन एवं प्रसंस्करण सहकारी लिमिटेड (कैंपको) के प्रबंध निदेशक एम सुरेश भंडारी ने कहा कि पिछले 15 दिनों में सुपारी की कीमतें 20 रुपये बढ़कर 250 रुपये हो गई हैं। वर्तमान खपत एवं मांग पिछली फसलों के जरिये पहले ही पूरी हो चुकी है। कारोबारी आगे मांग पूरी करने के लिए खरीद और स्टॉक कर रहे हैं। इससे कीमतें बढ़ी हैं और दिसंबर तक करीब 15 से 20 फीसदी बढ़ सकती हैं। 

Keyword: keral, flood, spice, इलायची कालीमिर्च,
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