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भारत का भारांक बढ़ा, निवेश नहीं

पवन बुरुगुला और सचिन मामबटा / मुंबई August 22, 2018

एमएससीआई इमर्जिंग मार्केट्स (ईएम) इंडेक्स में हाल के समय में भारत का बढ़ता भारांक अतिरिक्त विदेशी प्रवाह आकर्षित करने में सफल नहीं रहा है। विदेशी फंड में इस साल सिर्फ 10 करोड़ डॉलर के शुद्घ खरीदार दिखे हैं, हालांकि भारत कई अन्य उभरते बाजारों की तुलना में अब भी बेहतर स्थिति है। मौजूदा समय में रिडम्पशन और मौद्रिक चिंताओं की वजह से सभी विकसित बाजारों में वैश्विक एक्सचेंज ट्रेडेड फंड (ईटीएफ) में बिकवाली का रुझान बना हुआ है। उभरते बाजारों की मुद्राओं में गिरावट विदेशी निवेशकों के लिए एक प्रमुख समस्या है। सक्रिय प्रबंधित फंड भी भारत को लेकर सुस्त बने हुए हैं।
 
विदेशी ब्रोकरेज फर्म मॉर्गन स्टैनली इंडिया कंपनी की 20 अगस्त को जारी इंडिया इक्विटी स्ट्रेटेजी अल्फा अलमानक रिपोर्ट के अनुसार भारत में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों की ओवरवेट पोजीशन वर्ष 2011 के बाद से सबसे नीचे है। इस रिपोर्ट को इक्विटी रणनीतिकारों रिधम देसाई और शीला राठी द्वारा तैयार किया गया है। भारत में विदेशी पोर्टफोलियो प्रवाह में सक्रिय रूप से प्रबंधित फंडों का बड़ा योगदान है। जहां ईटीएफ इंडेक्टस प्रदाताओं द्वारा निर्धारित भारांक पर अमल करते हैं, वहीं सक्रिय रूप से प्रबंधित फंड प्रत्येक देश के लिए अपने नजरिये के आधार पर निर्णय लेते हैं। इन दो कारकों के परिणामस्वरूप एमएससीआई ईएम इंडेक्स में तेजी के बावजूद निवेश प्रवाह सीमित हुआ है।
 
डाल्टन कैपिटल एडवाइजर्स के प्रबंध निदेशक यू आर भट ने कहा, 'एमएससीआई इंडेक्स में भारत की बढ़त बाजार के अच्छे प्रदर्शन और बढ़ते बाजार पूंजीकरण की वजह से है, क्योंकि कई कंपनियों में प्रवर्तक हिस्सेदारी में कमी आई है। हालांकि मौजूदा वैश्विक परिदृश्य में, बढ़ता भारांक निवेश प्रवाह में किसी तरह की तेजी नहीं ला सका है क्योंकि वैश्विक ईटीएफ कारोबारी समस्याओं, मौद्रिक चिंताओं जैसे कारकों की वजह से उभरते बाजारों से निकल रहे हैं। भारांक बढऩे से भारत को दीर्घावधि में वैश्विक हालात में सुधार आने के बाद अधिक पूंजी आकर्षित करने में मदद मिलेगी।'
 
एमएससीआई वैश्विक रूप से सबसे बड़ी इंडेक्स प्रदाता है, क्योंकि बड़ी तादाद में ईटीएफ इसके सूचकांकों पर ध्यान देते हैं। एमएससीआई के आंकड़े के अनुसार 2 लाख करोड़ डॉलर मूल्य के ईटीएफ ईएम इंडेक्स पर अमल करते हैं। भारत का भारांक जुलाई 2018 में 22 आधार अंक तक बढ़कर 8.99 प्रतिशत पर पहुंच गया जो नवंबर 2017 में 8.77 फीसदी था। एफपीआई भारत में मामूली तौर पर खरीदार बने हुए हैं, लेकिन 2018 में उभरते बाजारों से उन्होंने 20 अरब डॉलर से अधिक रकम निकाली।  प्रभुदास लीलाधर में संयुक्त प्रबंध निदेशक दिलीप भट का कहना है कि गैर-सक्रिय रूप से प्रबंधित रकम (जैसे ईटीएफ के जरिये आने वाली पूंजी) के प्रवाह को आगामी रुझानों के लिए प्रमुख आर्थिक संकेतक के तौर पर देखा जाता है। उन्होंने कहा कि ईटीएफ निवेश विभिन्न वृहद कारकों पर आधारित रहा है। आने वाले दिनों में कॉरपोरेट प्रदर्शन में सुधार से कुल प्रवाह में मदद मिल सकती है। 
Keyword: india, fund, dollar, एमएससीआई इमर्जिंग मार्केट्स ईएम इंडेक्स,
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