बिजनेस स्टैंडर्ड - एक्स फैक्टरी बिक्री पर साफ होगी स्थिति
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एक्स फैक्टरी बिक्री पर साफ होगी स्थिति

इंदिवजल धस्माना / नई दिल्ली August 22, 2018

सरकार जल्द ही दूसरे राज्य का खरीदार होने की स्थिति में एक्स फैक्टरी बिक्री पर वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) लगााए जाने को लेकर स्थिति साफ कर सकती है। साथ ही सितंबर में प्रस्तावित जीएसटी परिषद की अगली बैठक में लागत, बीमा और मालभाड़ा (सीआईएफ) पर आधारित आयातित सामान पर दोहरे कराधान के मसले पर विचार हो सकता है।  यह मसले उद्योग और कारोबार जगत की ओर से वित्त मंत्री पीयूष गोयल के समक्ष हाल ही में उठाए गए थे। जीएसटी स्थान आधारित है, ऐसे में कर उस राज्य में लगाया जाता है, जहां वह लाया जाता है। लेकिन मान लीजिए कि अगर खरीदार राज्य गुजरात फैसला करता है कि वह महाराष्ट्र की फैक्टरी से सामान खरीदे तो यह मसला जटिल हो जाता है, कि कर महाराष्ट्र में लगाया जाए या गुजरात में।
 
एक सूत्र ने बताया कि सरकार कह सकती है कि ऐसी स्थिति में आईजीएसटी लगाया जाएगा। उन्होंने कहा कि जीएसटी अधिनियम के तहत आपूर्ति नियम को लेकर स्पष्टीकरण भी आ सकता है। ईवाई में पार्टनर अभिषेक जैन ने कहा कि इस मसले पर कुछ समय पहले कानून और उद्योग विशेषज्ञों के बीच चर्चा की गई थी। उन्होंने कहा, 'इसे लेकर स्पष्टता जरूरी है, जिससे कि कर पूरे कारोबार से कर का तालमेल हो सके।' अथॉरिटी आफ एडवांस रूलिंग (एएआर) उत्तराखंड के एक आदेश के बाद दोहरे कराधान के मसले पर चर्चा तेज हुई। एएएआर ने कहा कि आयातक को एकीकृत जीएसटी (आईजीएसटी) देना होगा।  यह मसला एएआर के सामने था कि क्या आयातक को माल के मूल्य के आधार पर आईजीएसटी का भुगतान करना है या रिवर्स चार्ज मैकेनिज्म (आरसीएम) के तहत, जब सेवा प्रदाता और सेवा पाने वाले दोनों ही भारत के बाहर के हों। सामान्यतया सेवा प्रदाता सरकार को जीएसटी का ब्योरा देते  हैं, लेकिन आरसीएम के तहत खरीदार को ऐसा करना होता है। यह मसला उठने से आयात करने वाली कंपनियोंं का नकदी प्रवाह प्रभावित होगा, लेकिन सबसे ज्यादा बुरा असर वस्तुओं के उन आयातकोंं पर पड़ेगा जो कच्चे माल का आयात करते हैं और उन्हें इनपुट टैक्स क्रेडिट नहीं मिलता है। उदाहरण के लिए जो बिजली उपकरणों का आयात कर रहे हैं, उन्हें क्रेडिट नहीं मिलेगा क्योंकि बिजली को जीएसटी से मुक्त रखा गया है। 
 
सीआईएफ के तहत विक्रेता तब तक वस्तुओं के सामान की जिम्मेदारी लेता है, जब तक वस्तुएं वास्तविक केंद्र या खरीदार को भेजी जाती हैं। सामान जब भेज दिया जाता है तब उनकी जिम्मेदारी नहीं होती है।   उद्योगपतियों ने इनवर्टेड शुल्क ढांचे के मामले में इनपुट सेवाओं पर जीएसटी का मसला भी उठाया है। जीएसटी परिषद की 27 जुलाई को हुई बैठक मेंं में उन वस्तुओं के लिए इनपुट टैक्स क्रेडिट की अनुमति दी गई थी, जहां अंतिम सामान पर उसके इनपुट से कम जीएसटी लगा हो। मोबाइल सेट के मामले में अंतिम उत्पाद पर जीएसटी 12 प्रतिशत है और उसके कुछ पाट्र्स पर 18 प्रतिशत जीएसटी लगता है। उद्योग जगत ने यह भी मांग की कि इन वस्तुओं के सर्विस इनपुट पर किए गए कर भुगतान पर भी क्रेडिट दिया जाना चाहिए। बहरहाल अधिकारियों ने यह मांग खारिज कर दी। 
Keyword: CIF, GST, वस्तु एवं सेवा कर, जीएसटी, एक्स फैक्टरी,,
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