बिजनेस स्टैंडर्ड - स्वर्ण आयात में गिरावट के आसार
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स्वर्ण आयात में गिरावट के आसार

राजेश भयानी / मुंबई August 22, 2018

रुपये की विनिमय दरों में गिरावट ने सोने के अंतरराष्ट्रीय दामों में तीव्र सुधार के असर को रोकने में मदद की है। चालू कैलेंडर वर्ष में ये दाम नौ प्रतिशत कम है जबकि घरेलू स्टैंडर्ड सोने के दाम कमोबेश स्थिर रहे हैं। हालांकि भारत में भी दाम अपने शीर्ष स्तर से औसतन 6.8 प्रतिशत कम हैं। इसके परिणामस्वरूप देश में दामों के प्रति संवेदनशील रहने वाले ग्राहकों की बाजार में वापसी हो रही और पहली छमाही की सुस्त खरीद के बाद अब मांग स्थिर रहने की उम्मीद है। इस बात के संकेत मिल रहे हैं कि जौहरियों ने त्योहारी सीजन से पहले सोने का फिर से स्टॉक करना शुरू कर दिया है। 
 
हालांकि अधिकांश उपभोक्ता मांग आभूषणों के लिए है और वह भी हल्के वजन वाले गहनों के लिए और निवेश मांग अन्य कारणों के साथ-साथ बढ़ती ब्याज दरों तथा ऋण के कड़े नियमों की वजह से सुस्त बनी हुए है। बाजार के विशेषज्ञों का कहना है कि इसके परिणामस्वरूप कुल आयात में कम से कम 15 फीसदी कमी होने की संभावना है। भारतीय उपभोक्ताओं के दृष्टिïकोण से 30,000 रुपये प्रति 10 ग्राम से कम मूल्य का स्तर आकर्षक माना जाता है। इससे अलावा अगर रुपये में आगे भी गिरावट जारी रहती है तो सोने में तेजी आएगी क्योंकि वैश्विक रूप में कीमतें लगभग निम्रतम स्तर पहुंच चुकी हैं।
 
कोटक महिंद्रा बैंक के व्यापार प्रमुख (कीमती धातु एवं कोष) शेखर भंडारी कहते हैं कि डॉलर के हिसाब से सोने के दाम सबसे निचले स्तरों में से एक पर हैं और लगभग निम्रतम बिंदु पर हैं। अमेरिकी अर्थव्यवस्था का बेहतर प्रदर्शन जारी है जिससे डॉलर में मजबूती आ रही है। डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये में बड़ी गिरावट मुख्य रूप से वैश्विक हलचल की वजह से है। इससे भारत में सोने के दामों में इजाफा होगा। जहां एक ओर इस साल सोने के अंतरराष्ट्रीय दाम 8.3 प्रतिशत कम हैं वहीं दूसरी ओर भारत में दाम केवल 1.1 प्रतिशत ही कम हैं। हालांकि भारत में दाम अपने शीर्ष स्तर से छह प्रतिशत से भी अधिक तक गिर चुके हैं जो उपभोक्ताओं को इस कीमती धातु की खरीद के लिए आकर्षित कर रहे हैं।
 
हाल ही में मुंबई में संपन्न हुए इंडिया इंटरनैशनल शो में ग्राहकों की संख्या में तेजी दिखाई दी है। इसमें देश के विभिन्न भागों के जौहरियों और आयात करने वाले कुछ देशों ने हिस्सा लिया था। इस संबंध में जानकारी रखने वाले एक व्यक्ति ने कहा कि पूछताछ और मांग अच्छी रही है जो इस बात की ओर इशारा करती हैं कि आभूषण खरीद में त्योहारी माहौल बन रहा है। हालांकि मांग का एक बड़ा हिस्सा हल्के वजन वाले गहनों का रहा है। रत्न एवं आभूषण निर्यात संवर्धन परिषद (जीजेईपीसी) के उपाध्यक्ष कोलिन शाह कहते हैं कि इस साल इस कार्यक्रम में कारोबार की कुल मात्रा (80 अरब रुपये) पिछले साल की तुलना में 20 प्रतिशत से भी अधिक रही है। यह उद्योग के लिए एक प्रोत्साहन के रूप में सामने आया है जो पिछले 12 महीनों से प्रतिकूल परिस्थितियों से जूझ रहा है। आभूषणों की त्योहारी और ग्रामीण दोनों ही मांग वर्ष के शेष भाग में भीजारी रहने की उम्मीद है। मेटल फोकस के वरिष्ठ सलाहकार (भारत और दक्षिण एशिया ) चिराग सेठ कहते हैं कि त्योहारी मांग से भारत के स्वर्ण आयात में वृद्धि होने की संभावना है। हालांकि आभूषणों के खुदरा विके्रताओं के मद्देनजर पर्याप्त स्टॉक और सतर्कता के कारण आयात में कमी रहेगी। पिछले साल की तुलना में हमें आयात में 15-20 फीसदी गिरावट की संभावना लग रही है।
 
पिछले साल भारत ने 860 टन आयात किया किया था और इस साल करीब 700-750 टन खेप आने के आसार हैं। भारत में बढ़ती ब्याज दरों के कारण निवेश मांग कम हो रही है और पैसा आधिकारिक माध्यमों की ओर जा रहा है। सोना भी विभिन्न एजेंसियां की निगरानी में हैं। पिछले 3-4 महीने से आयात कम रहा है। हालांकि त्योहारी सीजन से पहले जौहरियों द्वार फिर से स्टॉक करने से जुलाई के दौरान आयात में कुछ तेजी दिखी है। ऋण के संबंध में बैंकों के कड़े नियमों से भी इस वर्ष मांग को नुकसान पहुंच रहा है।
Keyword: gold, price, सराफा बाजार, आभूषण,
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