बिजनेस स्टैंडर्ड - रुपये ने कतरे सैलानियों के पर
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रुपये ने कतरे सैलानियों के पर

विनय उमरजी और संजय कुमार सिंह /  August 22, 2018

सुधा पई की बेटी ओक्लाहोमा यूनिवर्सिटी में कंप्यूटर इंजीनियरिंग की दूसरे वर्ष की छात्रा है और पिछले एक वर्ष में रुपये की कीमत में आई तेज गिरावट से थोड़ी परेशान हैं। पई कहती हैं, 'रुपये की कीमत में लगातार गिरावट से माता-पिता पर भार बढ़ गया है क्योंकि इससे बच्चों को पढ़ाने की लागत एक साल में 10 प्रतिशत बढ़ गई है। शिक्षा पर कर्ज लेने वाले माता-पिता के लिए विदेशी लेनदेन काफी महंगे हो गए हैं।' रुपया फिसलकर 70 रुपये प्रति डॉलर के आसपास आ गया है जिससे अमेरिका में रह रहे कई बच्चों और उनके माता-पिता को एक और झटका लगेगा। जनवरी 2018 में अमेरिकी विश्वविद्यालयों में प्रवेश शुरू हो गए थे और उस समय से अब तक रुपये में 7.29 प्रतिशत की गिरावट आ चुकी है, जिससे कॉलेज की ट्यूशन फीस 7-9 प्रतिशत तक बढ़ गई है। 

 
डेलॉइट इंडिया में एडवाइजरी पार्टनर अनिंद्य मलिक ने बिज़नेस स्टैंडर्ड को बताया, 'शिक्षा और रहने का खर्च, दोनों तेजी से बढ़ गए हैं। मार्च-अप्रैल में कॉलेज में प्रवेश के समय जिन्होंने रुपये के 70 रुपये तक पहुंचने की नहीं सोची थी, उन्हें अपने वित्तीय स्रोत और खर्चों पर दोबारा विचार करना पड़ रहा है। अधिकतर लोग अमेरिका में अपने खर्च के बारे में 65 रुपये प्रति डॉलर की दर से ही हिसाब लगाते हैं।' अब इन परिवारों को 2 से 4 लाख रुपये अतिरिक्त खर्चने होंगे, जो ट्यूशन शुल्क और जगह पर निर्भर करेगा। फिलहाल हर साल 1.70 लाख से अधिक भारतीय छात्र शिक्षा के लिए अमेरिका जाते हैं। अभी माता-पिता विद्यालयों के लिए सालाना फीस जमा कर रहे हैं और ऐसे में रुपये में गिरावट उनकी स्थिति और खराब कर सकती है। अधिकांश विद्यार्थी अगले माह से शुरू हो रहे शैक्षणिक सत्र के लिए अमेरिका जा रहे हैं। 
 
अमेरिकी विश्वविद्यालों के लिए साल में दो बार आवेदन किए जाते हैं। पहला, सितंबर माह में और दूसरा जनवरी में। मार्च-मई तक अमेरिकी विश्वविद्यालय प्रवेश की स्वीकृति दे देते हैं। जुलाई-अगस्त के बीच फीस जमा की जाती है। स्नातक या परास्नातक कोर्स के लिए एक विद्यार्थी औसतन 30,000 डॉलर से 50,000 डॉलर के बीच सालाना ट्यूशन फीस जमा करता है। इसके अलावा, किताबें, लैपटॉप खरीदना, यात्रा टिकट, सामान और दूसरे खर्चों पर जगह और कैंपस के हिसाब से 4,000 डॉलर से 8,000 डॉलर तक खर्च आ जाता है। 
 
शिक्षा एक जरूरत है और अधिकांश माता-पिता इस खर्चे को वहन करेंगें, लेकिन घूमने के हिसाब से भी यात्रा खर्चीली हो गई है। हाल-फिलहाल में विदेश यात्रा की तैयारी कर रहे यात्री रुपये के उतार-चढ़ाव पर नजर बनाए हुए हैं। यात्रा कंपनी के सीओओ शरत ढल कहते हैं, 'रुपये में गिरावट से अमेरिका, यूरोप, ब्रिटेन, हॉन्गकॉन्ग, चीन और सिंगापुर की यात्रा अधिक खर्चीली हो जाएगी। हालांकि, रुपया न्यूजीलैंड, ऑस्ट्रेलिया और इंडोनेशिया की मुद्राओं के मुकाबले स्थिर है जबकि श्रीलंका, तुर्की और रूस के मुकाबले मजबूत हुआ है।' अगर आप अभी योजना ही बना रहे हैं तो जिन देशों की मुद्राओं के मुकाबले रुपया मजबूत हुआ है वहां घूमकर आप फायदा उठा सकते हैं। दूसरा रास्ता यह है कि यूरोप जैसी महंगी जगह के स्थान पर दक्षिण-पूर्वी एशिया जैसी सस्ती जगह का चयन किया जाए। 
 
जिन्होंने पहले से ही अपनी बुकिंग करा ली है, उन्हें अपना यात्रा बजट 5-10 प्रतिशत बढ़ा लेना चाहिए। हालांकि आप खर्चे में कमी भी सर सकते हैं। एक्सपीडिया भारत में मार्केटिंग प्रमुख मनमीत अहलुवालिया कहते हैं, 'अपनी यात्रा की अवधि को एक या दो दिन कम कर लीजिये। आप अपना होटल बदलकर 5 स्टार की जगह 3 स्टार को चुन सकते हैं या फिर शहर के बीच वाले होटल की जगह थोड़ा दूर का होटल बुक कर सकते हैं।' आजकल ऑनलाइन रिव्यू और रेटिंग देखकर सस्ते और अच्छे होटल का चयन किया जा सकता है। अंत में, खरीदारी करते समय थोड़ा हाथ खींचकर रखें। 
Keyword: dollar, rupees, रुपये, गिरावट,
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