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चुनिंदा ऐप ब्लॉक के लिए तकनीक

सुरजीत दास गुप्ता और मयंक जैन /  August 21, 2018

दूरसंचार विभाग विभिन्न सेवा प्रदाताओं, डिवाइस निर्माताओं और दूसरे हितधारकों के साथ बातचीत कर रहा है, जिससे वे अपने नेटवर्क और इंटरनेट प्रोटोकॉल को इंटरनेट प्रोटोकॉल वर्जन 6 (आईपीवी6) के तहत अद्यतन कर सकें। यह अपडेट हो जाने पर कानून व्यवस्था के मामलों में किसी विशेष इंटरनेट सेवा को ब्लॉक करना आसान हो जाएगा।  वर्तमान में किसी विशेष जिले या क्षेत्र में इंटरनेट को पूरी तरह से बंद कर दिया जाता है। इस कदम की कई बार आलोचना की जाती है और इससे ई-कॉमर्स कारोबार जैसी गतिविधियों को काफी नुकसान होता है। अंतरराष्ट्रीय आर्थिक मामलों पर भारतीय अनुसंधान परिषद द्वारा 2018 में जारी एक रिपोर्ट के अनुसार पिछले पांच वर्ष में देश में 16,000 घंटे इंटरनेट बंद रहा, जिससे लगभग 3 अरब डॉलर (वर्तमान दरों पर लगभग 209 अरब रुपये) का नुकसान हुआ। 

 
विभाग ने दूरसंचार कंपनियों से यह भी पूछा है कि कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए किस तरह से व्हाट्सऐप, फेसबुक, टेलीग्राम जैसे सोशल मीडिया ऐप को ब्लॉक किया जा सकता है। आईपीवी6 के लिए अद्यतन करने के आदेश की पुष्टि करते हुए दूरसंचार विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, 'हमने इसके बारे में बात की है। इससे सेवाओं को ब्लॉक करने में आसानी होगी। हम विभिन्न हितधारकों से अपना नेटवर्क, डिवाइस और ऐप को आईपीवी6 के हिसाब से अद्यतन करने के लिए कह रहे हैं।' 
 
बहुत से 4जी नेटवर्क और स्मार्टफोन पहले ही यह बदलाव कर चुके हैं, लेकिन बड़े नेटवर्क प्रदाताओं को यह बदलाव करने में समय लगेगा। साथ ही, इसके लिए एक बड़ी धनराशि भी खर्च होगी। विशेषज्ञों का कहना है कि आईपीवी6 प्रोटोकॉल में एक विशेष प्रकार का आईपी एड्रेस होता है। अर्थात, प्रत्येक डिवाइस की अपनी विशिष्ट पहचान संख्या होगी, जिससे किसी विशेष डिवाइस या सेवा को ब्लॉक करने में आसानी होगी।  आईपीवी4 प्रोटोकॉल में एक सीमित संख्या (लगभग 4.3 अरब) में यूआरएल होती हैं। कंप्यूटरों, स्मार्टफोन और खेल के विभिन्न डिवाइसों की तेजी से बढ़ती संख्या के बीच ये यूआरएल काफी नही हैं। इस कमी को पूरा करने के लिए डायनैमिक आईपी एड्रेस का उफयोग होता है। इससे कोई भी डिवाइस स्वयं में  विशिष्ट या अलग नहीं होता और उसे ब्लॉक नहीं किया जा सकता। विशेषज्ञों का मानना है कि आईपीवी6 इस समस्या का समाधान कर सकती है। सेंटर फॉर इंटरनेट एंड सोसायटी में पॉलिसी ऑफिसर गुरुशबद ग्रोवर ने कहा, 'आईपीवी6 हमें विशिष्ट नियंत्रण देती है। इससे किसी वेबसाइट को राउटर के स्तर पर ब्लॉक करना आसान हो जाएगा।' 
 
कुछ विशेषज्ञों का मत इससे अलग है। एक इंटरनेट सेवा प्रदाता कंपनी के वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, 'किसी विशेष वेबपेज को ब्लॉक करना तकनीकी रूप से संभव है लेकिन मोबाइल ब्राउजिंग पर एक निश्चित आईपी जनरेट करना मुश्किल भरा होगा। कानून मांग करता है कि किसी विशेष पेज को ब्लॉक किया जाए, ना कि पूरी वेबसाइट को। भारत में बहुत कम ऐसी ब्रांडबैंड लाइन हैं जो एक निर्धारित आईपी पर चलती हैं।'
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