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कागज कंपनियों के शेयरों में आई उछाल

दिलीप कुमार झा / मुंबई August 21, 2018

कागज कंपनियों के शेयरों के दाम पिछले एक महीने के दौरान 89 फीसदी तक चढ़े हैं। इसकी वजह यह है कि प्राथमिक कागज उत्पादक कंपनियों की आमदनी जून, 2018 में समाप्त तिमाही के दौरान उम्मीद से भी बेहतर रही है। फोटो कॉपी के लिए इस्तेमाल होने वाले कागज का उत्पादन करने वाली कंपनी जेके पेपर के शेयर की कीमत बीएसई पर 89 फीसदी बढ़कर इस समय 188 रुपये पर पहुंच गई है। इसी तरह इंटरनैशनल पेपर एपीपीएम का शेयर 49 फीसदी चढ़कर इस समय 465 रुपये पर पहुंच गया है। बल्लारपुर इंडस्ट्रीज, शेषशायी पेपर, वेस्ट कोस्ट पेपर, तमिलनाडु न्यूजप्रिंट जैसी अन्य कागज विनिर्माताओं के शेयरों की कीमतों में भी पिछले एक महीने के दौरान महत्त्वपूर्ण बढ़ोतरी हुई है। 
 
इस उद्योग में लागत घटाने के लिए पिछले कुछ वर्षों के दौरान किए गए उपायों के सकारात्मक नतीजे आने लगे हैं। कमजोर होते रुपये के कारण आसियान देशों से कागज का आयात करना महंगा हो गया है। इसके चलते घरेलू उत्पादकों ने भी आयाातित माल की कीमत के बराबर अपनी कीमतें करने के लिए दाम बढ़ाए हैं। कागज कंपनियों के शेयर मध्यम अवधि में मजबूत बने रहने के आसार हैं। जब तक रुपया डॉलर के मुकाबले करीब 70 के वर्तमान स्तर पर बना रहेगा या और कमजोर होगा, तब तक कागज कंपनियों के शेयरों में तेजी रहने की संभावना है। 
 
जेके पेपर के मुख्य वित्त अधिकारी वी कुमारस्वामी ने कहा, 'अप्रैल से जून तिमाही में कागज कंपनियों के मुनाफे में महत्त्वपूर्ण सुधार हुआ है, जिसे बाजार ने देर से भांपा है। पिछले कुछ वर्षों के दौरान कागज उत्पादन की क्षमता में इजाफा नहीं हुआ है, जबकि कागज की मांग लगातार सामान्य दर से बढ़ रही है। इस तरह बाजार में मांग आपूर्ति स अधिक हो गई है। इसके साथ ही डॉलर के मुकाबले रुपये की कमजोरी से आसियान देशों से कागज का आयात महंगा हो गया है, जिससे यह मांग स्थानीय कंपनियों के पास आने लगी है। इन सभी सकारात्मक कारकों से कागज कंपनियों के शेयरों में तेजी को सहारा मिला है।' 
 
घरेलू कागज विनिर्माताओं ने आयातित उत्पादों की लागत के बराबर अपने उत्पादों के दाम करने के लिए अपने उत्पादों की कीमतें बढ़ाई हैं। रुपये की कमजोरी अगस्त में अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई है। ऐसे में कागज कंपनियों का मुनाफा सितंबर तिमाही में और बढऩे के आसार हैं।  वेस्ट कोस्ट पेपर मिल्स के वाइस चेयरमैन सौरभ बांगड़ ने कहा कि इस साल अब तक लिखाई एवं छपाई, अखबारी कागज, पैकेजिंग एवं विशेष कागज समेत कागज की सभी किस्मों के दाम 5 से 7 फीसदी बढ़ चुके हैं। इससे पता चलता है कि मांग में तेजी है। चीन से बढ़ती मांग के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजारों में कागज की सभी किस्मों के दाम 100 से 150 डॉलर प्रति टन बढ़े हैं और इस समय 750 से 800 डॉलर प्रति टन पर पहुंच गए हैं। वर्ष 2018 में पल्प की कीमतों में अहम बढ़ोतरी हुई है। 
 
फोटो कॉपी का कागज बनाने वाली जेके पेपर का शुद्ध लाभ अप्रैल-जून तिमाही में 50 फीसदी से अधिक बढ़कर 9.51 करोड़ रुपये रहा है, जो पिछले साल की इसी तिमाही में 6.01 करोड़ रुपये रहा था। इसी तरह इमामी पेपर का शुद्ध लाभ आलोच्य तिमाही में 7 गुना बढ़कर 2.06 करोड़ रुपये रहा है, जो पिछले साल की इसी तिमाही में 25.8 लाख रुपये था।  कागज कंपनियों के शेयरों को महाराष्ट्र में प्लास्टिक पर प्रतिबंध के कारण पैकेजिंग किस्म के कागज की बढ़ती मांग से भी मदद मिली है। इंडियन पेपर मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (आईपीएमए) के महासचिव रोहित पंडित ने कहा, 'बढ़ती मांग और स्थिर घरेलू उत्पादन क्षमता से भारत की कागज के आयात पर निर्भरता बढ़ी है।'  आईपीएमए के आंकड़े दर्शाते हैं कि वित्त वर्ष 2017-18 में भारत का कागज एवं कागज बोर्ड का आयात बढ़कर रिकॉर्ड 18.6 लाख टन पर पहुंच गया, जो पिछले साल 14.2 लाख टन था। हालांकि भारत का अखबारी कागज का आयात वित्त वर्ष 2017-18 में मामूली गिरावट के साथ 14.5 लाख टन रहा, जो पिछले साल 15.9 लाख टन था। सोमवार को इंटरनैशनल पेपर और तमिलनाडु न्यूजप्रिंट जैसे कागज कंपनियों के शेयरों में 5 फीसदी तक गिरावट आई। इसकी वजह यह है कि बीएसई ने इन शेयरों की कीमतों में तेजी के कारण इन्हें निगरानी के दायरे में रखने का फैसला किया है। 
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