बिजनेस स्टैंडर्ड - आशा की किरण
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आशा की किरण

संपादकीय /  August 21, 2018

अप्रैल-जून 2018 तिमाही के नतीजे कारोबारी जगत के लिए उत्साहजनक रहे क्योंकि इससे पिछली चार तिमाहियों में से तीन में गिरावट के बाद आय में वृद्घि देखने को मिली। आलोच्य तिमाही के दौरान सभी कंपनियों का समेकित शुद्घ लाभ सालाना आधार पर 7.9 फीसदी अधिक रहा। पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में यह 7 फीसदी गिरा था। वर्ष 2018 की चौथी तिमाही में यह 21.6 फीसदी गिरा था। ऐसा प्रतीत होता है कि देश के कारोबारी जगत ने नोटबंदी और वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) की शुरुआत के बाद हुई उथल पुथल से निजात पा ली है। 2,200 से अधिक कंपनियों का एक विश्लेषण बताता है कि देश के कारोबारी जगत को 10.8 खरब डॉलर का समेकित शुद्घ लाभ हुआ जो पिछली 12 तिमाहियों में सबसे अधिक है। यद्यपि यह जून 2015 तिमाही के अपने उच्चतम स्तर से कम रहा। 18.7 फीसदी की राजस्व वृद्घि पिछले तीन वर्षों की उच्चतम दर है। इसमें उच्च जिंस कीमतों और जून 2017 के कम आधार प्रभाव की भी भूमिका रही।

 
आय में अधिकांश चरणबद्घ वृद्घि के लिए जिंस उत्पादक (ऊर्जा और धातु एवं खनन कंपनियां) जिम्मेदार हैं। इनको अंतरराष्टï्रीय बाजारों में उच्च कीमतों का लाभ मिला। इतना ही नहीं आयात शुल्क में बढ़ोतरी ने भी धातु उत्पादकों की मदद की। विवेकाधीन व्यय में सुधार की गति निजी उत्पादों, खाद्य और तंबाकू आदि पर होने वाले उपभोक्ता व्यय से बेहतर रही। यह बात इस तथ्य से स्पष्टï है कि एफएमसीजी कंपनियो की कुल समेकित बिक्री आलोच्य तिमाही में सालाना आधार पर 10.7 फीसदी अधिक रही। वाहन निर्माता कंपनियों (टाटा मोटर्स को छोड़कर) की बिक्री 24.5 फीसदी ज्यादा रही। विश्लेषक उपभोक्ता व्यय में इस हालिया वृद्घि के लिए खुदरा ऋण में सुधार को जवाबदेह मानते हैं। प्राय: बड़ी उपभोक्ता वस्तुओं की खरीद के लिए इस ऋण का प्रयोग किया जाता है। गैर बैंकिंग ऋणदाताओं की समेकित शुद्घ ब्याज आय सालाना आधार पर 27 फीसदी ज्यादा रही। पिछली 10 तिमाहियों में से 8 में सालाना आधार पर आय वृद्घि 20 फीसदी से अधिक रही। दो अन्य बेहतरीन प्रदर्शन् करने वाले क्षेत्र थे औषधि और सूचना प्रौद्योगिकी। औषधि क्षेत्र को घरेलू बाजार में मजबूत प्रदर्शन का साथ मिला जबकि सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र को अपनी डिजिटल पेशकश की वजह से अच्छी वृद्घि हासिल करने में मदद मिली। 
 
हालांकि अर्थव्यवस्था में निवेश की मांग की क्या स्थिति है, इस बारे में आंकड़े स्पष्टï नहीं हैं। पूंजीगत वस्तुओं, निर्माण और इंजीनियरिंग कंपनियों का समेकित राजस्व पिछली तिमाही में 12 फीसदी अधिक रहा जो बीते तीन वर्ष का सबसे बेहतर प्रदर्शन है। परंतु इस वृद्घि का एक बहुत बड़ा हिस्सा जिंस कीमतों में इजाफे की वजह से आया। खासतौर पर ग्रेफाइट इलेक्ट्रोड निर्माताओं के चलते जिनके उत्पाद की मांग वर्ष 2017 में पांच गुना तक बढ़ गई। अन्य उद्योगों के पूंजीगत वस्तु निर्माता भी इस स्थिति में थे कि वे अपनी बढ़ी लागत उपभोक्ताओं पर डाल सकें और मुनाफा बढ़ा सकें। पूंजीगत वस्तु निर्माताओं के वेतन और भत्ते 4.4 फीसदी अधिक रहे। यह वृद्घि पिछले दो वर्षों के अनुरूप ही रही। वृद्घि को लेकर अधिकांश चिंताएं बाहरी हैं। वैश्विक व्यापार युद्घ, अमेरिका-ईरान की स्थिति या उभरते बाजारों की समस्याएं आदि। ग्रामीण अर्थव्यवस्था और उपभोक्ता वस्तु कंपनियों के लिए भी मॉनसून बहुत अहम है। परंतु कुलमिलाकर आंकड़े अर्थव्यवस्था में सुधार के ही संकेत देते हैं। आगे भारतीय कंपनियों की आय में सुधार देखने को मिलेगा। ऋण की उपलब्धता और उपभोक्ता मांग इसमें मददगार होगी। मजबूत मांग के चलते क्षमता इस्तेमाल के स्तर में सुधार होगा और पूंजीगत व्यय चक्र में बदलाव आएगा।
Keyword: Quarter result, GST, dollar, economy,,
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