बिजनेस स्टैंडर्ड - सरकारी पूंजी से पीएसबी को पूरी राहत नहीं
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सरकारी पूंजी से पीएसबी को पूरी राहत नहीं

अभिजित लेले / मुंबई 08 21, 2018

ये सुधार सिर्फ अस्थायी तौर पर मददगार साबित होंगे

बिजनेस स्टैंडर्ड सरकारी पूंजी से पीएसबी को पूरी राहत नहींरेटिंग एजेंसी मूडीज ने मंगलवार को कहा कि भारत सरकार द्वारा वित्त वर्ष 2018-19 में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (पीएसबी) में अतिरिक्त पूंजी डालने की योजना सिर्फ पूंजी पर्याप्तता और नुकसान में चल रहे बैंकों में फंसे कर्ज के लिए प्रावधान में सुधार लाने में मददगार होगी। इससे दबाव को पूरी तरह दूर करने में मदद नहीं मिलेगी।

हालांकि सरकारी समर्थन से सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को ऋणों के खिलाफ अपना पूंजी और प्रावधान बफर तैयार करने में मदद मिलेगी। ये सुधार बैंकों की कमजोर अंडरराइटिंग (फंसे कर्ज को बट्टे खाते में डालने की प्रक्रिया) प्रणालियों में किसी व्यापक बदलाव के बगैर सिर्फ अस्थायी तौर पर मददगार साबित होंगे। 

मूडीज ने कहा है कि व्यापक सुधार के बगैर, सरकार को ऐसे समय में बैंकों में पूंजी नियोजन की प्रक्रिया बरकरार रखनी होगी जब उन्हें दबाव का सामना करना पड़ रहा है, जिससे स्वयं सरकार की वित्तीय स्थिति पर दबाव पड़ेगा और राजकोषीय समेकन की दिशा में उसके प्रयास प्रभावित होंगे।  

मूडीज की अध्यक्ष एवं वरिष्ठ क्रेडिट ऑफीसर अल्का अनबरासू ने एक बयान में कहा कि बड़े आकार की पुनर्पूंजीकरण योजना पूंजी बफर और लोन-लॉस रिजर्व के लिए मददगार साबित हुई है और इससे मजबूत ऋण वृद्घि में भी मदद मिली। लेकिन अब यह पूंजी अनुपात को नियामकीय जरूरतों से ऊपर पहुंचाने के लिए पर्याप्त होगी, क्योंकि बैंकों की पूंजी किल्लत सरकार के शुरुआती अनुमान की तुलना में ज्यादा है।

वित्त वर्ष 2017-18 में 900 अरब रुपये की मदद मुहैया कराने के बाद सरकार ने वित्त वर्ष 2019 में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के लिए 650 अरब रुपये की नई पूंजी देने की योजना बनाई है। 650 अरब रुपये में से सरकार जुलाई में पांच बैंकों को 113 अरब रुपये आवंटित कर चुकी है। 

मूडीज का मानना है कि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की बाहरी पूंजी जरूरत वित्त वर्ष 2019 के बाद बहुत ज्यादा नहीं बढ़ेगी, क्योंकि उनका मुनाफे में भी धीरे धीरे सुधार आएगा और उधारी लागत में नरमी आएगी। यह बैलेंस शीट को संतुलित बनाने की मौजूदा प्रक्रिया के अनुरूप है। सरकार द्वारा पूंजी सहायता से बैंकों को अपने प्रावधान कवरेज को मजबूत बनाने में मदद मिलेगी। लेकिन यदि वे फंसे कर्ज के संदर्भ में ज्यादा मात्रा में रकम बट्टे खाते में डालते हैं तो यह पर्याप्त नहीं होगा। 
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