बिजनेस स्टैंडर्ड - साइबर जोखिम में होगी बढ़ोतरी
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साइबर जोखिम में होगी बढ़ोतरी

अद्वैत राव पालेपू / मुंबई 08 21, 2018

एफआईबीएसी बैंकिंग व वित्तीय सेवाओं का सालाना सम्मेलन है

बिजनेस स्टैंडर्ड साइबर जोखिम में होगी बढ़ोतरीअग्रणी वित्तीय संस्थानों ने पिछले कुछ सालों में अत्याधुनिक साइबर सुरक्षा समाधान अपनाया है, लेकिन कई बैंक इसके क्रियान्वयन और साइबर खतरे की समझ के मामले में काफी पीछे हैं। सालाना एफआईबीएबी कॉन्फ्रेंस में प्रोफेशनल की विशेषज्ञ समिति ने इस बात पर चर्चा की है कि जिस रफ्तार से कर्ज कारोबार डिजिटल प्लेटफॉर्म की ओर बढ़ रहा है उसे देखते हुए क्या देश के संस्थान साइबर जोखिम के खिलाफ तैयार हैं। एफआईबीएसी बैंकिंग व वित्तीय सेवाओं का सालाना सम्मेलन है जिसका आयोजन फिक्की, बॉस्टन कंसल्टिंग ग्रुप और इंडियन बैंक एसोसिएशन करता है। 

यहां मौजूदा जोखिमों, प्रशासन से जुड़े मसलों और नियामकीय मसलों पर चर्चा हुई, लेकिन विशेषज्ञ समिति एक दूसरे से सहमति जताते हुए कहा कि विभिन्न क्षेत्र की कंपनियों के बीच इस बाबत तैयारी काफी कमजोर है। बैंकिंग व वित्तीय सेवा उद्योग वैश्विक व देसी स्तर पर डेटा सुरक्षा में सुधार के मामले में अग्रणी रही है, पर साइबर जोखिम के मामले में गंभीरता कुछ संस्थानों तक ही सीमित है।

मास्टरकार्ड इंडिया के कार्यकारी निदेशक विकास वर्मा ने कहा, चूंकि हमारी वित्तीय व्यवस्था डिजिटल प्लेटफॉर्म की ओर बढ़ रही है, ऐसे में जोखिम काफी ज्यादा हो सकता है। पीडब्ल्यूसी के हालिया सर्वे के मुताबिक, साइबर सुरक्षा में 44 फीसदी सेंध आंतरिक लोगों की वजह से लगती है और उनमें से 90 फीसदी पहले से ही ऐसा करने की प्रवृत्ति नहीं प्रदर्शित करते। 

इसमें विभिन्न उद्योंगों के कंपनी प्रबंधन को साइबर सुरक्षा नीतियां विकसित करने और प्रशासन की व्यवस्था करने की बात कही गई है ताकि डेटा सुरक्षा में सेंध लगने के मामले से निपटा जा सके। उन्होंंने कहा, संगठनों को सख्त रणनीति विकसित करने की दरकार है। आरबीआई ने सभी वाणिज्यिक व ग्रामीण बैंकों के अलावा एनबीएफसी को अपने स्तर पर साइबर सुरक्षा नीतियां बनाने को कहा है और साइबर सुरक्षा टीम भी बनाने का निर्देश भी दिया गया है। लेकिन सहकारी बैंकों के मामले में ऐसा नहीं है। पिछले हफ्ते पुणे में कॉस्मोस बैंक को साइबर हमले का झटका लगा जहां बैंक के मुख्य सर्वर के जरिए ग्राहकों के खाते से करीब 94 करोड़ रुपये चुरा लिए गए।

समिति ने कृत्रिम बौद्धिकता के इस्तेमाल पर भी बात की और कहा कि खतरे का पता लगाने के लिए बैंंकिंग व्यवस्था में आखिर किस तरह से इसका इस्तेमाल किया जा सकता है। साइबर सुरक्षा से जुड़े मामलों की देश की नोडल एजेंसी कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पांस टीम के महानिदेशक संजय बहल ने कहा, आज हम ऐसी दुनिया में रहते हैं जहां उतारचढ़ाव, अनिश्चिता, जटिलता व अस्पष्टता (यानी यूवीसीए) है और हमला करने वाला हमसे ज्यादा जानता है क्योंकि उसे वास्तविक कमियों के बारे में पता है।

हमारी साइबर सुरक्षा मानवीय है और जोखिम का प्रबंधन स्वतंत्र रूप से किया जाता है, जो ठीक नहीं है। आईबीएम ने जोखिम की पहचान के लिए तकनीक विकसित की है ताकि कंपनियां न सिर्फ साइबर जोखिम की पहचान कर सके बल्कि उससे खुद को बचा भी सके। 

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