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एसआईपी निवेश अभी मजबूत मगर आगे नरमी के आसार

जश कृपलानी / मुंबई August 20, 2018

एक ओर जहां म्युचुअल फंड उद्योग निवेश में नरमी से दो-चार हो रहा है, वहीं दूसरी तरफ सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (एसआईपी) के जरिए निवेश में मजबूती बनी हुई है। एसोसिएशन ऑफ म्युचुअल फंड्स इन इंडिया (एम्फी) के आंकड़ों से पता चलता है कि जुलाई में एसआईपी के जरिए 75 अरब रुपये का निवेश हुआ, जो 12 महीने के औसत 64 अरब रुपये के मुकाबले 18 फीसदी ज्यादा है। दिलचस्प रूप से जुलाई में एसआईपी के जरिए योगदान पिछले महीने के बराबर रहा, जो अब तक का सर्वोच्च स्तर रहा है। विशेषज्ञों ने कहा कि एसआईपी के जरिए निवेश भी आगे नरम रह सकता है।
 
एम्फी के चेयरमैन और आदित्य बिड़ला सन लाइफ एएमसी के मुख्य कार्याधिकारी ए बालासुब्रमण्यन ने कहा, निवेशकों के बीच बढ़ती जागरूकता के चलते हाल के वर्षों में उद्योग ने एसआईपी में खासी बढ़ोतरी देखी है। हालांकि आने वाले समय में बढ़त की रफ्तार का टिके रहना मुश्किल होगा। जून तिमाही में एसआईपी के जरिए औसत निवेश 72 अरब रुपये रहा, जो पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले 58 फीसदी ज्यादा है। बालासुब्रमण्यन ने कहा कि आज एसआईपी खुद एक ब्रांड बन गया है क्योंकि विनिर्माता व वितरक  अनुशासन के साथ निवेश के फायदे बता रहे हैं और बाजार का अंदाजा लगाने की कोशिश करने वाले खुदरा निवेशकों को हतोत्साहित कर रहे हैं।
 
जुलाई में इक्विटी म्युचुअल फंड योजनाओं में शुद्ध निवेश (कर बचत व आर्बिट्रेज योजना समेत) 28 फीसदी बढ़कर 106 अरब रुपये रहा। यह निवेश हालांकि पिछले 12 महीने के औसत 145 अरब रुपये के मुकाबले 27 फीसदी कम है। बाजार के विशेषज्ञोंं ने कहा कि इक्विटी निवेश में हालिया गिरावट मोटे तौर पर इस वजह से आई है क्योंकि एकमुश्त रकम की निकासी हुई है। उन्होंने कहा कि एकमुश्त रकम का निवेश साइक्लिकल होता है और चुनाव के सीजन में उतारचढ़ाव की संभावना है।
 
अभी म्युचुअल फंड उद्योग के पास करीब 2.33 करोड़ एसआईपी खाते हैं। मौजूदा वित्त वर्ष में उद्योग ने हर महीने औसतन 9.92 लाख एसआईपी खाते जोड़े हैं और निवेश की औसत रकम 3,250 रुपये रही है। विश्लेषकों ने कहा कि एसआईपी के जरिए योगदान में बढ़ोतरी महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे उद्योग को साइक्लिकल जोखिम की भरपाई करने में मदद मिल सकती है। एम्फी के आंकड़ों के मुताबिक, उद्योग की 51 फीसदी इक्विटी परिसंपत्तियां एक साल से ज्यादा निवेशित नहीं रही। नोमूरा के विश्लेषकों ने हालिया नोट में कहा है, निवेश में साइक्लिकल प्रभाव से हम इनकार नहीं कर रहे (खास तौर से इक्विटी में) लेकिन हमारा मानना है कि एमएफ अब निवेश का मुख्य जरिया बन गया है। एसआईपी खाता अब इक्विटी एयूएम का 9-10 फीसदी हो गया है और साल दर साल के हिसाब से इसमें 60 फीसदी से ज्यादा की बढ़ोतरी हुई है। हमें उम्मीद है कि वित्त वर्ष 2018-25 में एसआईपी खाता 10 फीसदी सालाना चक्रवृद्धि की रफ्तार से बढ़ेगा। बालासुब्रमण्यन ने कहा कि एसआईपी के जरिए निवेश अगले तीन सालों में 20-23 फीसदी सालाना चक्रवृद्धि के हिसाब से बढ़ सकता है।
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