बिजनेस स्टैंडर्ड - 100 सालों में सबसे भयावह बाढ़
 Search  BS Hindi  Web   BS E-Paper|      Follow us on 
Business Standard
Sunday, November 18, 2018 01:18 AM     English | हिंदी

होम

|

बाजार

|

कंपनियां

|

अर्थव्यवस्था

|

मुद्रा

|

विश्लेषण

|

निवेश

|

जिंस

|

क्षेत्रीय

|

विशेष

|

विविध

|

अर्थनामा

 
होम अर्थव्यवस्था खबर

100 सालों में सबसे भयावह बाढ़

अभिषेक वाघमारे /  08 19, 2018

कहर की बारिश

राज्य के 13 जिलों में से 11 जिलों में 16 अगस्त तक हुई बारिश जून-सितंबर की मौसमी बारिश के सामान्य आंकड़े को पहले ही पार कर चुकी थी

बिजनेस स्टैंडर्ड 100 सालों में सबसे भयावह बाढ़केरल में 99 (परंपरागत मलयालम कैलेंडर के हिसाब से कोलावर्षम 1099) की भयानक बाढ़ को याद किया जाता है। हालांकि वर्ष 1924 में केरल में आई बाढ़ की विभीषिका मौखिक इतिहास का हिस्सा है लेकिन इस क्षेत्र में इस बाढ़ को सबसे भयावह माना जाता है। उस वक्त केरल एक राज्य नहीं था। पिछले हफ्ते से केरल के कुछ जिले में जिस तरह बारिश का अप्रत्याशित कहर ढाया है उसकी वजह से राज्य सदी के सबसे भयानक बाढ़ की त्रासदी को झेलने के लिए मजबूर है। राज्य अधिकारियों का कहना है कि पेरियार क्षेत्र में जल प्रवाह 1800 क्यूबिक मीटर प्रति सेकंड था जो 1924 में रिकॉर्ड जलप्रवाह के लगभग बराबर था जिसे उपनिवेशवाद के दौर में रिकॉर्ड किया गया था। 

बाढ़ की प्रबलता के स्तर का पहले से अंदाजा लगाना असंभव ही रहा क्योंकि 20वीं सदी के अंतिम पांच दशकों में बारिश की रफ्तार में यह सबसे तेज बढ़ोतरी है। वहीं दूसरी तरफ जल विवाद को लेकर अंतरराज्यीय सहयोग का अभाव दूसरी आपदा में तब्दील होता दिखाई दे रहा है। उत्तराखंड में बादल फटने से 2013 में मची तबाही और 2016 में चेन्नई बाढ़ की यादें भी ताजा हैं। केरल के मुख्यमंत्री पिनारई विजयन ने ट्वीट किया, ‘केरल पिछले 100 सालों में सबसे भयानक बाढ़ के संकट का सामना कर रहा है। 80 बांधों को खोल दिया गया है, 324 लोगों की मौत हो गई है। 223,139 लोग करीब 1500 से अधिक राहत कैंपों में हैं।’ अगर तमिलनाडु ने केरल के आग्रह पर ध्यान दिया होता तो बारिश की तीव्रता को देखते हुए कम से कम एक-तिहाई संकट कम किया जा सकता था। 

मुल्लापेरियार बांध केरल में है लेकिन यह तमिलनाडु के अधीन है। उच्चतम न्यायालय के आदेश के मुताबिक इस बांध में 142 फुट तक अधिकतम जलस्तर बनाए रखने की इजाजत मिली है। लेकिन केरल ने अदालत से इसकी उच्चतम सीमा 139 फुट रखने के लिए गुजारिश की है। अधिकारियों का कहना है कि अगर तमिलनाडु सरकार ने जलस्तर के 139 फुट पर पहुंचने के बाद केरल में बांध का पानी छोड़ना शुरू कर दिया होता तो कुछ हद तक इस भयावह संकट को कम किया जा सकता था।

केरल के जल संसाधन विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बिज़नेस स्टैंडर्ड को बताया, ‘तीन फुट से काफी अंतर आ सकता है। इसमें 79.2 करोड़ क्यूबिक फुट पानी था जिसे जब छोड़ा गया तब इसका प्रवाह 9,000 क्यूबिक फुट प्रति सेकंड (क्यूसेक) हो गया। बारिश की वजह से प्रवाह की तीव्रता और बढ़ी।’ 

मुल्लापेरियार बांध अपना पानी वैगाई नदी में धीरे-धीरे छोड़ता है और इसका ज्यादातर हिस्सा तेज रफ्तार में इडुक्कि बांध में जाता है जहां काफी तेज बारिश हुई। इससे पूरी तरह भरे इडुक्कि बांध में बाढ़ की स्थिति बन गई जिसकी वजह से पेरियार बेसिन में पानी छोड़ा गया जहां जानमाल का भारी नुकसान हुआ। 15 अगस्त को पेरियार के कुछ हिस्सों में 36000 क्यूसेक प्रवाह रिकॉर्ड किया गया जो अब तक का सबसे उच्च स्तर था।

एक अधिकारी ने बताया, ‘16 अगस्त को हुआ प्रवाह निश्चित तौर पर उससे ज्यादा था लेकिन हम आधिकारिक आंकड़े आने का इंतजार कर रहे हैं।’ शीर्ष अदालत ने एक केरलवासी की याचिका पर सुनवाई करते हुए शुक्रवार को पानी छोडऩे का आदेश दिया। लेकिन यह रोकथाम वाले कदम के तौर पर नजर आई न कि यह समस्या को खत्म करने का कोई उपाय साबित हुआ।

केरल के उत्तरी क्षेत्र के जिले इडुक्कि में 15 अगस्त वाले सप्ताह के दौरान 68 सेंटीमीटर की बारिश रिकॉर्ड की गई जो देश में सालाना राष्ट्रीय औसत बारिश के दो-तिहाई हिस्से के बराबर है। उस हफ्ते के दौरान राज्य में सामान्य से 30 फीसदी अधिक बारिश हुई और 16 अगस्त की रात तक मूसलाधार बारिश बंद नहीं हुई। राज्य के 13 जिले में से 11 जिले में 16 अगस्त तक हुई बारिश जून-सितंबर की मौसमी बारिश के सामान्य आंकड़े को पहले ही पार कर चुकी थी। 

भारतीय उष्णदेशीय मौसम विज्ञान संस्थान (आईआईटीएम) पुणे के वैज्ञानिकों ने 2005 में मुंबई में आई बाढ़ के बाद अपने शोध में बताया था कि जलवायु परिवर्तन की वजह से देश में बारिश की तीव्रता में बढ़ोतरी के संकेत हैं। केंद्रीय जल आयोग के आंकड़े के मुताबिक शुक्रवार तक केरल में पश्चिम की ओर बहने वाली नदियों पर (अरब सागर में मिलने वाली नदियां) बने बांध में 10 सालों के औसत से 50 फीसदी अधिक पानी था। 
Keyword: Flood, Kerla, मुल्लापेरियार बांध, Dam, High court, Pinrai Vijyan, आईआईटीएम,
Advertisements
  Cover from Earthquake & Floods. Buy Home Insurance
   Get seamless access to Business Standard & WSJ.com starting at just Rs. 49/- per month*
Display Name  Email-Id  
Post your comment

CAPTCHA Image Reload Image Enter Code*:
  आपका मत
 क्या पीसीए नियमों में ढील देने पर सहमत होगा आरबीआई?
हां नहीं  
पढ़िये
ईमेल
About us Authors Partner with us Jobs@BS Advertise with us Terms & Conditions Contact us RSS Site Map  
Business Standard Private Ltd. Copyright & Disclaimer feedback@business-standard.com
This site is best viewed with Internet Explorer 6.0 or higher; Firefox 2.0 or higher at a minimum screen resolution of 1024x768
* Stock quotes delayed by 10 minutes or more. All information provided is on "as is" basis and for information purposes only. Kindly consult your financial advisor or stock broker to verify the accuracy and recency of all the information prior to taking any investment decision. While due diligence is done and care taken prior to uploading the stock price data, neither Business Standard Private Limited, www.business-standard.com nor any independent service provider is/are liable for any information errors, incompleteness, or delays, or for any actions taken in reliance on information contained herein.