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महंगा बना हुआ है एफएमसीजी का मूल्यांकन

श्रीपद एस ऑटे /  August 19, 2018

नोटबंदी और वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) की वजह से पिछली कई तिमाहियों में अस्थिरता के बाद एफएमसीजी क्षेत्र की कई कंपनियों ने जून 2018 की तिमाही में अच्छी बिक्री वृद्घि दर्ज करने में कामयाबी हासिल की है। इसके अलावा आगे की राह भी भी मजबूत बने रहने की संभावना है। यही वजह है कि इस क्षेत्र की कंपनियों के प्रति निवेशकों की दिलचस्पी बरकरार रह सकती है। शेयर मूल्यांकन या कीमत-आय अनुपात (पी/ई) ऊंचा बना हुआ है। 

ब्रिटानिया, एशियन पेंट्स, हिंदुस्तान यूनिलीवर, गोदरेज कंज्यूमर प्रोडक्ट्स और नेस्ले जैसी कुछ बड़ी कंपनियां अपनी वित्त वर्ष 2020 की अनुमानित आय के 41-56 गुना पर कारोबार कर रही हैं। सिर्फ आईटीसी का मूल्यांकन अपेक्षाकृत नीचे है क्योंकि कंपनी के प्रमुख व्यवसाय (सिगरेट) को नियामकीय चुनौतियों का सामना करना पड़ा है। इस वजह से निवेशक इस शेयर से दूर बने हुए थे, हालांकि जून 2018 की तिमाही में कंपनी द्वारा उम्मीद से बेहतर बिक्री वृद्घि दर्ज करने के बाद शेयर में लगभग 7 प्रतिशत की मजबूती दर्ज की गई है। 

निर्मल बांग सिक्योरिटीज में शोध प्रमुख सुनील जैन का कहना है, ‘एफएमसीजी क्षेत्र में फिर से अच्छी वृद्घि दर्ज की जा रही है। इसे निवेशकों द्वारा ऊंचे मूल्यांकन के बावजूद सुरक्षित निवेश दांव समझा जा रहा है। इसलिए, एफएमसीजी मूल्यांकन लगातार मजबूत बना रहेगा।’

प्रमुख तथ्य यह है कि कुल उपभोक्ता मांग में सुधार आ रहा है और खासकर सुदूरवर्ती इलाकों से मांग बढ़ी है जिस पर पहले काफी दबाव देखा गया था। जून तिमाही के परिणामों में भी इसका असर स्पष्ट दिखा है और कई एफएमसीजी कंपनियों ने दो अंक की बिक्री वृद्घि दर्ज की, भले ही उन्हें एक साल पहले की समान तिमाही के अनुकूल आधार से मदद मिली।

ग्रामीण वृद्घि में भी शहरी बिक्री की तुलना में तेजी दर्ज की गई और यह रुझान आगे बना रह सकता है। मैरिको के प्रबंधन ने कहा है कि खरीफ फसलों के लिए एमएसपी में ताजा वृद्घि, कृषि ऋण माफी और सामान्य मॉनसून की संभावना से ग्रामीण वृद्घि मजबूत बने रहने की उम्मीद मजबूत हुई है। इससे एफएमसीजी कंपनियों के राजस्व में मदद मिलने की संभावना है। 

साथ ही आगामी चुनाव से भी ग्रामीण मांग को मजबूती मिलेगी। एसबीआईकैप सिक्योरिटीज में विश्लेषक नितिन गुप्ता कहते हैं, ‘एफएमसीजी क्षेत्र के लिए, ग्रामीण वृद्घि विभिन्न सकारात्मक बदलावों की वजह से शहरी वृद्घि की तुलना में मजबूत बने रहने की संभावना है। चुनाव-पूर्व प्रोत्साहनों से भी इस क्षेत्र में ग्रामीण वृद्घि को मदद मिल सकती है।’

एफएमसीजी कंपनियों को पेंट समेत कई सेगमेंट के लिए जीएसटी दरों में ताजा कटौती से भी काफी हद तक मदद मिलेगी। हालांकि ऊंची मुद्रास्फीति चिंताजनक है। जून तिमाही के आंकड़ों के अनुसार जहां कुछ कंपनियों के मार्जिन में सुधार दिखा है, वहीं कच्चे तेल, टाइटेनियम डाईऑक्साइड और कोपरा जैसे कई प्रमुख कच्चे माल की कीमतें चढ़ी हैं और इसका मुनाफे पर दबाव पड़ा है। 

हालांकि उद्योग के विश्लेषकों का मानना है कि कुछ उत्पाद कीमतों में नरमी आएगी और मूल्य निर्धारण ताकत (लागत नियंत्रण उपाय समेत) से संपन्न कंपनियां अपना मार्जिन सुरक्षित बनाने में सक्षम रही हैं। गुप्ता का कहना है, ‘एफएमसीजी कंपनियों द्वारा अपने मार्जिन को सुरक्षित बनाने के लिए निकट भविष्य में कीमत वृद्घि पर ध्यान दिए जाने की संभावना है।’

लेकिन क्या कड़ी प्रतिस्पर्धा उनकी मूल्य निर्धारण ताकत को सीमित करेगी या फिर एफएमसीजी कंपनियों को अपनी बाजार भागीदारी बनाए रखने के प्रयास में मुनाफे से समझौता करना होगा, इन सब पर नजर रखे जाने की जरूरत होगी। इन सब बातों को देखते हुए विश्लेषकों का मानना है कि कोई भी गिरावट दीर्घावधि निवेशकों के लिए अवसर प्रदान करेगी।
Keyword: ब्रिटानिया, एशियन पेंट्स, हिंदुस्तान यूनिलीवर, गोदरेज कंज्यूमर प्रोडक्ट्स, Company, FMCG, GST, Securites,
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