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जीएसटी से निर्यात सुस्त, नोटबंदी से कर्ज घटा

अभिजित लेले और निकहत हेटावकर / मुंबई August 19, 2018

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की वेबसाइट पर दिए गए एक अध्ययन के मुताबिक सूक्ष्म, लघु और मझोले उद्यमों (एमएसएमई) क्षेत्र में नोटबंदी के बाद सुधार हो रहा है और वे नोटबंदी और वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के असर से उबर रहे हैं। हाल की तिमाहियों में एमएसएमई को दिया जाने वाला कर्ज बढ़ा है, 2017 मेंं घटकर 2015 के मध्य के स्तर पर पहुंच गया था।

रिजर्व बैंक के हाल के आंकड़ों से पता चलता है कि सूक्ष्म और लघु उद्योगों को दिया जाने वाला कर्ज मार्च 2018 की तुलना में जून में 2.4 प्रतिशत बढ़ा है। जून 2018 में पिछले साल जून 2017 की तुलना में एमएसएमई को दिया जाने वाला कर्ज 0.7 प्रतिशत बढ़ा है। 

इसमें कहा गया है, ‘नोटबंदी की वजह से पहले से ही एमएसएमई को घटते कर्ज में और कमी आ गई, जबकि जीएसटी लागू होने का बहुत ज्यादा असर एमएसएमई को दिए जाने वाले कर्ज पर नहीं पड़ा।’ सिबिल के चेयरमैन एमएन नायर ने कहा कि 10 करोड़ रुपये तक के कर्ज की मांग बढक़र दो अंकों में पहुंच गई है। जीएसटी व्यवस्था के स्थिर होने के साथ कर्ज की मांग बढऩे की उम्मीद है।

नवंबर 2016 से फरवरी 2017 के बीच कर्ज देने में खासी गिरावट आई और यह नकारात्मक हो गया। रिपोर्ट में कहा गया है कि नोटबंदी की वजह से कर्ज की वृद्धि दर, खासकर औद्योगिक क्षेत्र में कम हुई।  बहरहाल एमएसएमई क्षेत्र में कर्ज लेने वालों की संख्या फरवरी 2017 के बाद से बढ़ी है और यह जनवरी-मई 2018 के बीच औसतन 8.5 प्रतिशत बढ़ा है। 

वहीं नोटबंदी के बाद के दौर में एमएसएमई क्षेत्र से निर्यात में बहुत मामूली कमी आई, जबकि अप्रैल से अगस्त 2017 के बीच जीएसटी लागू होने की अवधि के दौरान निर्यात तेजी से गिरा। जीएसटी लागू होने के बाद अस्थायी रूप से कुछ समय के लिए निर्यात बहाल हुआ। रिजर्व बैंक के आंकड़ों के मुताबिक जून 2018 में सालाना आधार पर औद्योगिक ऋण 0.9 प्रतिशत बढ़ा है, जो जून 2017 में 1.1 प्रतिशत बढ़ा था।

सरकारी बैंक के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि बैंकों ने नकदी के प्रïवाह के आधार पर कर्ज का अनुमान लगाया। जीएसटी के दौर में यह फायदेमंद है कि कर्ज पर फैसला लेते समय इनवाइस देखी जाए। एमएसएमई क्षेत्र में करीब 90 प्रतिशत कर्ज बैंकों से आता है, वहीं गैर बैंकिंग वित्त कंपनी (एनबीएफसी) तेजी से अपनी हिस्सेदारी बढ़ा रही हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, ‘एमएसएमई को बैंक कर्ज सितंबर 2016 के बाद से घटा है, यह खासकर बैंकों के जोखिम न लेने को दिखाता है क्योंकि उनकी कर्ज की गुणवत्ता कम हुआ है। इसके विपरीत एनबीएफसी एमएसएमई को कर्ज बढ़ा रहे हैं ।

Keyword: NBFC, RBI, Government, Bank, GST, MSME, CIBIL,
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