बिजनेस स्टैंडर्ड - केरल में बाढ़ से ठहरा कारोबार
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केरल में बाढ़ से ठहरा कारोबार

टीई नरसिम्हन, गिरीश बाबू और शाइन जैकब / चेन्नई/नई दिल्ली 08 19, 2018

करीब 200 अरब रुपये के नुकसान का अनुमान

खुदरा, कृषि, बागान और पर्यटन क्षेत्र पर सर्वाधिक असर
बैंक और एनबीएफसी पर भी पड़ेगा प्रभाव

बिजनेस स्टैंडर्ड केरल में बाढ़ से ठहरा कारोबारकेरल में हाल में आई बाढ़ का भले ही राज्य में औद्योगिक गतिविधियों पर ज्यादा असर नहीं पड़ा है लेकिन इससे छोटे कारोबार खासकर खुदरा, कृषि, बागान और पर्यटन क्षेत्र को बुरी तरह प्रभावित किया है। सरकार के शुरुआती आकलन के मुताबिक बाढ़ से राज्य को करीब 200 अरब रुपये का नुकसान हुआ है लेकिन उद्योग का कहना है कि यह इससे कहीं ज्यादा होगा।  इसका प्रभाव कुछ बैंकों और गैर बैंकिंग वित्तीय संस्थानों (एनबीएफसी) पर भी पड़ेगा क्योंकि उनका केरल में बहुत निवेश है। कुछ हद तक टायर निर्माता कंपनियों पर भी बाढ़ का असर देखने को मिलेगा क्योंकि केरल देश में करीब 85 फीसदी रबर की आपूर्ति करता है। 

आरपी गोयनका समूह की कंपनी हैरीसंस मलयालम लिमिटेड के पूर्णकालिक निदेशक और मुख्य कार्याधिकारी तथा यूपीएएसआई के पूर्व अध्यक्ष एन धर्मराज ने कहा कि बाढ़ के कारण मिट्टी की ऊपरी परत बह गई है जिससे भूमि की उर्वरता प्रभावित होगी। इससे आने वाले समय में चाय और रबर की खेती पर प्रभाव पड़ेगा। कम आवक के कारण अगले कुछ समय तक कीमतें ऊंची रहेंगी लेकिन फसल को हुए भारी नुकसान को देखते हुए यह नाकाफी है।

एसोसिएशन ऑफ प्लांटर्स ऑफ केरल के सचिव अजित बालाकृष्णन का कहना है कि शुरुआती आकलन के मुताबिक बाढ़ के कारण 7-8 अरब रुपये का नुकसान हुआ है। अभी केवल फसल को हुए नुकसान का ही अनुमान लगाया गया है। चाय उत्पादन में प्रति हेक्टेयर 200 किग्रा नुकसान की आशंका है। इसी तरह इलायची की फसल 45-50 फीसदी और रबर की फसल 40 फीसदी प्रभावित होने का अंदेशा है। सितंबर और अक्टूबर में इन क्षेत्र में कोई उत्पादन होने की उम्मीद नहीं है क्योंकि बाढ़ से पौधे बुरी तरह प्रभावित हुए हैं जबकि अक्टूबर इन सभी फसलों के लिए सबसे अच्छा महीना होता है। 

ऑटोमोटिव टायर मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (एटमा) के महानिदेशक राजीव बुधराजा ने कहा कि उत्पादन और मांग के बीच अंतर और बढ़ जाएगा। घरेलू स्तर पर कमी के कारण पहली तिमाही में 40 फीसदी से अधिक मांग आयात से पूरी की गई। जुलाई और अगस्त में भी उत्पादन प्रभावित होने से आयात बढ़ेगा। 

एक टायर कंपनी के वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि कुछ कंपनियों को पहले ही इस स्थिति को भांप लिया था और कच्चे माल का संग्रह कर लिया था। हर मॉनसून में केरल में उत्पादन कम होता है, इसलिए कंपनियां आयात पर निर्भर रहती हैं।  

एम्की रिसर्च ने कहा कि बैंकों और एनबीएफसी का एनपीए बढ़ जाएगा और क्रेडिट प्रोफाइल भी प्रभावित होगी। इनमें फेडरल बैंक, साउथ इंडियन बैंक, कैथोलिक सीरियन बैंक और धनलक्ष्मी बैंक जैसे घरेलू बैंक तथा मणपुरम और मुथूट जैसी एनबीएफसी शामिल हैं। एसबीआई और एचडीएफसी बैंक का भी केरल में अच्छा खासा निवेश है। एक निजी बैंक के मुख्य कार्याधिकारी ने कहा कि एक तरफ जहां इससे पुनर्भुगतान पर दबाव पड़ेगा और एनपीए में बढ़ोतरी होगी वहीं दूसरी तरफ खुदरा और आवास क्षेत्र में ऋण की मांग बढ़ेगी। इसी तरह केरल में बाहर से आने वाले धन में भी बढ़ोतरी होगी।फेडरल बैंक के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्याधिकारी श्याम श्रीनिवासन ने कहा कि नुकसान का आकलन करीब 10 दिन बाद ही लगाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि केरल में औपचारिक बैंकिंग व्यवस्था में कृषि ऋण कोई बहुत बड़ी बात नहीं है। इससे सहकारी बैंकों पर असर पड़ेगा। 

खुदरा और छोटे कारोबार पर असर पड़ सकता है लेकिन यह स्थिति लंबे समय तक नहीं रहेगी।कार्बोरंडम युनिवर्सल और कोचीन शिपयार्ड जैसी विनिर्माण इंडस्ट्रीज ने कहा कि केरल में उनकी इकाइयां काम कर रही हैं और बाढ़ के कारण उनके बुनियादी ढांचे पर कोई खास असर नहीं पड़ा है। एफएमसीजी, ऑटोमोबाइल और टिकाऊ उपभोक्ता वस्तुएं बनाने वाली कंपनियों के लिए ओणम की भरपाई करना आसान नहीं है।

फेडरेशन ऑफ ऑटोमोबाइल डीलर्स एसोसिएशन (एफएडीए) के अध्यक्ष जॉन के पॉल कहते हैं कि अधिकांश मामलों में वाहन और यार्ड का बीमा है और इंजन तुरंत खराब नहीं हो सकता है। केरल में 30 फीसदी कारों की बिक्री ओणम के दौरान होती है। पिछले साल इस दौरान करीब 18,000 कारें बिकी थीं और इस बार 27,000 कारों की बिक्री की उम्मीद थी। लेकिन अब बाढ़ का असर दिखेगा।

केरल डिस्ट्रिब्यूटर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष वी अय्यपन्न नायर ने कहा कि एफएमसीजी क्षेत्र को भारी नुकसान हुआ है और इसमें भी सबसे ज्यादा प्रभाव वितरकों पर पड़ा है। राज्य में करीब 7,000 एफएमसीबी वितरक हैं। स्टॉक के क्षतिग्रस्त होने के कारण शायद खुदरा कारोबारी तुरंत क्रेडिट का भुगतान करने की स्थिति में नहीं होंगे जिससे कार्यशील पूंजी अवरुद्घ हो जाएगी। केरल घरेलू और विदेशी पर्यटकों के लिए पसंदीदा पर्यटक स्थलों में से एक है। राज्य की जीडीपी में इसका करीब 10 फीसदी योगदान है। 

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