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नम आंखों से देश ने दी अंतिम विदाई...

अर्चिस मोहन / नई दिल्ली August 17, 2018

अटल बिहारी वाजपेयी धर्मपरायण हिंदू थे। मगर वह रूढि़वादी हिंदुत्व को चुनौती देते रहे, जीवित रहते हुए भी और निधन के बाद भी। हिंदू मान्यताओं के मुताबिक कोई पुरुष संबंधी ही किसी को मुखाग्नि दे सकता है। लेकिन आजीवन अविवाहित रहे वाजपेयी की चिता को आज शाम यमुना के तट पर किसी पुरुष ने नहीं बल्कि उनकी दत्तक पुत्री नमिता कौल भट्टाचार्य ने मुखाग्नि दी।

बालसुलभ मुस्कान वाले वाजपेयी के चितास्थल का दृश्य भावविह्वïल करने वाला था। हल्की बूंदाबांदी, सेना के बैंड की मातमी धुन, जवानों की बंदूकों की सलामी और ‘अटल बिहारी अमर रहें’ के नारों के बीच उनकी दत्तक पुत्री को मुखाग्नि देते देखकर अगर तमाम आंखें नम हुईं तो उससे पहले का क्षण भी कम द्रवित करने वाला नहीं था, जब पूर्व प्रधानमंत्री के शव पर लिपटे तिरंगे को सेना के जवानों ने नमिता की बेटी निहारिका को सौंपा।

इस दोपहर के कुछ और लम्हे भी हमेशा के लिए यादों में संजो लिए गए होंगे। एक यादगार लम्हा वह था, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सुरक्षा की परवाह किए बगैर वाजपेयी के शववाहन के पीछे चलते नजर आए। मोदी ने पार्टी मुख्यालय से राष्ट्रीय स्मृति स्थल तक करीब पांच किलोमीटर की दूरी पैदल ही तय की। इससे पहले सुबह वाजपेयी के पार्थिव शरीर को जनता के दर्शनों के लिए पार्टी मुख्यालय में रखा गया था। 

पार्टी मुख्यालय के आसपास की सडक़ें वाजपेयी के प्रशंसकों से पटी हुई थीं। मई 1991 में राजीव गांधी के अंतिम संस्कार के बाद पहली बार किसी पूर्व प्रधानमंत्री की शव यात्रा में दिल्ली के लोग इतनी बड़ी तादाद में उमड़े। हजारों की संख्या में लोग वाजपेयी के अंतिम दर्शनों के लिए भाजपा मुख्यालय पहुंचे थे। उनकी अंतिम विदाई के दौरान भी हजारों लोग सडक़ों के दोनों तरफ खड़े थे। वाजपेयी के पार्थिव शरीर को ले जा रहा वाहन जब शहर के मध्य और पुराने इलाके से गुजरा तो लोगों ने पुष्प वर्षा कर श्रद्घांजलि अर्पित की। 

वाजपेयी का कल शाम अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान में निधन हो गया था। वहां से उनके पार्थिव शरीर को उनके निवास स्थान 6ए, कृष्णा मेनन मार्ग ले जाया गया जहां रात भर उनके दर्शनों के लिए नेता और आम लोग उमड़ते रहे। वहां से उनके पार्थिव शरीर को भाजपा मुख्यालय लाया और फिर अंतिम विदाई के लिए राजघाट के करीब अंतिम संस्कार के लिए ले जाया गया। मोदी के अलावा भाजपा अध्यक्ष अमित शाह, भाजपा और विपक्षी दलों के कई नेताओं ने कृष्णा मेनन मार्ग और फिर भाजपा मुख्यालय पर वाजपेयी को भावभीनी श्रद्घांजलि अर्पित की। 

वरिष्ठ भाजपा नेता और लंबे समय तक वाजपेयी के साथी रहे लालकृष्ण आडवाणी, पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी, समाजवादी पार्टी के नेता मुलायम सिंह यादव और अन्य विपक्षी दलों के नेता अंत्येष्टि में शामिल हुए। 

स्मृति स्थल के पास ही महात्मा गांधी और पूर्व प्रधानमंत्री जवाहलाल नेहरू, लाल बहादुर शास्त्री, इंदिरा गांधी और राजीव गांधी की भी समाधि है। वाजपेयी को श्रद्घासुमन अर्पित करने के लिए कई विदेशी शिष्टमंडल उपस्थित रहे। 

उत्तर प्रदेश में अस्थियां होंगी प्रवाहित

दक्षिण एशिया की एकता को बढ़ावा देने वाले वाजपेयी के अंतिम संस्कार में भूटान के राजा जिग्मे केसर नामग्येल वांगचुक, पाकिस्तान के विधि मंत्री सैयद अली जाफर, बांग्लादेश के विदेश मंत्री अबुल हसन महमूद अली, नेपाल के विदेश मंत्री प्रदीप कुमार ग्यावली, श्रीलंका के कार्यकारी विदेशी मंत्री लक्ष्मण किरिएला और अफगानिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति हामिद करजई भी उपस्थित रहे। पाकिस्तान में जनवरी 2004 में आयोजित दक्षेस सम्मेलन में शिरकत करने वाले वाजपेयी भारत के अंतिम प्रधानमंत्री थे।इस बीच वाजपेयी को श्रद्घांजलि देने भाजपा मुख्यालय जा रहे सामाजिक कार्यकर्ता स्वामी अग्निवेश के साथ कुछ लोगों ने बदसलूकी कर डाली। अग्निवेश के साथ पिछले दिनों झारखंड में भी भाजपा कार्यकर्ताओं और दक्षिणपंथी समूह के कुछ लोगों ने हमला किया था। महिलाओं की शिकायत थी कि आदरणीय नेता को श्रद्घांजलि देने के लिए उनके लिए अलग से इंतजाम नहीं किया गया था।

उत्तर प्रदेश सरकार ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री की अस्थियों को राज्य के सभी जिलों की नदियों में प्रवाहित किया जाएगा। उत्तर प्रदेश सरकार ने 75 जिलों और छोटी-बड़ी नदियों की सूची तैयार की है जिनमें वाजपेयी की अस्थियों को प्रवाहित किया जाएगा। राज्य सरकार का मकसद इसके जरिये पूरे प्रदेश में भाजपा कार्यकर्ताओं को प्रेरित करना है। प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि उत्तर प्रदेश वाजपेयी की कर्मभूमि है। वाजपेयी ने लोकसभा में कई बार उत्तर प्रदेश का प्रतिनिधित्व किया है। वह 1957 में बलरामपुर से और फिर 1991 से 2004 तक लगातार लखनऊ से लोकसभा चुनाव जीता। भाजपा की लखनऊ इकाई 21 अगस्त को श्रद्घांजलि सभा आयोजित करेगी।
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