बिजनेस स्टैंडर्ड - सही है आरबीआई
 Search  BS Hindi  Web   BS E-Paper|      Follow us on 
Business Standard
Friday, November 16, 2018 10:00 PM     English | हिंदी

होम

|

बाजार

|

कंपनियां

|

अर्थव्यवस्था

|

मुद्रा

|

विश्लेषण

|

निवेश

|

जिंस

|

क्षेत्रीय

|

विशेष

|

विविध

|

अर्थनामा

 
होम विशेष खबर

सही है आरबीआई

संपादकीय /  August 16, 2018

इलाहाबाद उच्च न्यायालय सोमवार को भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के उस जवाब पर सुनवाई करेगा जो केंद्रीय बैंक ने बिजली कंपनियों द्वारा उसके 12 फरवरी के परिपत्र के खिलाफ दायर मामले में दिया है। परिपत्र में यह अनिवार्य कर दिया गया था कि बैंक बड़े फंसे हुए कर्ज के ऋणशोधन निस्तारण की प्रक्रिया को उसके बकाया होने के तत्काल बाद आरंभ कर दें। आरबीआई ने इस प्रक्रिया के लिए 180 दिन का वक्त दिया जिसके बाद तमाम अनसुलझे मामलों को ऋणशोधन की प्रक्रिया से अनिवार्य तौर पर गुजरना होगा।

इसके लिए 1 मार्च की तारीख तय की गई थी। यानी अगस्त के अंत तक सभी मामलों को ऋणशोधन अक्षमता एवं दिवालिया संहिता (आईबीसी) की प्रक्रिया से गुजरना होगा। बहरहाल, बिजली उत्पादकों ने अदालत से इस सिलसिले में राहत मांगी। केंद्र सरकार द्वारा इस मामले में नियामकीय राहत मांगने और बिजली क्षेत्र के लिए 180 दिन की समय सीमा बढ़ाने की मांग करने के बाद यह मामला केंद्र सरकार और आरबीआई के बीच गतिरोध में परिवर्तित हो गया। गौरतलब है कि बिजली क्षेत्र देश के सबसे संकटग्रस्त क्षेत्रों में से एक है और इसके फंसे हुए कर्ज का मूल्य करीब 26 खरब रुपये है। 

दूसरी दलील यह है कि अगर इस क्षेत्र को लेकर आईबीसी में सख्ती बरती गई तो बैंकों को काफी नुकसान उठाना पड़ेगा। ऐसा इसलिए क्योंकि ढांचागत सुधारों के अभाव में काफी संभव है कि बिजली क्षेत्र की परिसंपत्तियों की उचित बोली ही न लगे। सच तो यह है कि बिजली की कम मांग या कोयले की अविश्वसनीय आपूर्ति आदि मामले जल्दी समाप्त होने वाले नहीं हैं। आईबीसी में वसूली की दर 25 फीसदी के आसपास है और नकदीकरण न तो प्रवर्तकों को रास आएगा और न ही सरकार को क्योंकि मौजूदा बिजली उत्पादन क्षमता नष्ट हो जाएगी। 

इसके बजाय सरकार और अन्य संबंधित एजेंसियों ने सुझाव दिया है कि बिजली क्षेत्र के फंसे हुए कर्ज से कैसे निपटा जाए। सरकार ने सशक्त योजना पेश की है जो बैंकों को राहत दिला सकती है क्योंकि उनके बहीखातों से फंसा हुआ कर्ज निपट जाएगा और भविष्य में बेहतर दर पर वसूली हो सकेगी। बिजली क्षेत्र को ऋण देने वाले दो सबसे बड़े संस्थान हैं भारतीय स्टेट बैंक और पावर फाइनैंस कॉर्पोरेशन। इन्होंने समाधान योजना का सुझाव दिया है जबकि ग्रामीण विद्युतीकरण निगम ने परिवर्तन योजना का सुझाव दिया है। 

बहरहाल, आरबीआई को अपने रुख पर अडिग रहना चाहिए क्योंकि इनमें से अधिकांश विकल्प बस कामचलाऊ ही हैं। केंद्रीय बैंक का यह कहना भी सही है कि कानून को सब पर समान रूप से लागू किया जाना चाहिए। सरकार की मांग है कि बिजली क्षेत्र को अपवाद मानकर राहत दी जाए। परंतु सच तो यह भी है कि फिर भारी भरकम फंसे हुए कर्ज वाले कई क्षेत्रों से ऐसी मांग उठने लगेगी। इस दलील का विरोध करना भी आसान नहीं होगा। मौजूदा सरकार ने जो प्रमुख आर्थिक सुधार पारित किए हैं, आईबीसी भी उनमें से एक है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी स्वतंत्रता दिवस को राष्ट के नाम अपने संबोधन में इसे अपनी एक प्रमुख उपलब्धि के रूप में उल्लिखित किया।

फंसे हुए कर्ज के निस्तारण की बात करें तो आईबीसी दो प्रमुख वादे करता है। पहला, यह ऐसा ढांचा मुहैया कराता है जो परिसंपत्तियों का बेहतर से बेहतर मूल्य दिलाने में सहायक हो सके। दूसरा, इसे लागू करने के बाद परिसंपत्तियों का तेज गति से निस्तारण करना संभव हो पाता है। इसके बिना ये मामले लंबे समय तक बल्कि दशकों तक कानूनी दांवपेच में फंसे रह सकते हैं। इस प्रक्रिया को बेपटरी नहीं करने दिया जाना चाहिए।

Keyword: Bank, RBI, Central Bank, Allahabad, High Court, Circular, IBC, Regulatory, Regulation,
Advertisements
  Cover from Earthquake & Floods. Buy Home Insurance
   Get seamless access to Business Standard & WSJ.com starting at just Rs. 49/- per month*
Display Name  Email-Id  
Post your comment

CAPTCHA Image Reload Image Enter Code*:
  आपका मत
 क्या पीसीए नियमों में ढील देने पर सहमत होगा आरबीआई?
हां नहीं  
पढ़िये
ईमेल
About us Authors Partner with us Jobs@BS Advertise with us Terms & Conditions Contact us RSS Site Map  
Business Standard Private Ltd. Copyright & Disclaimer feedback@business-standard.com
This site is best viewed with Internet Explorer 6.0 or higher; Firefox 2.0 or higher at a minimum screen resolution of 1024x768
* Stock quotes delayed by 10 minutes or more. All information provided is on "as is" basis and for information purposes only. Kindly consult your financial advisor or stock broker to verify the accuracy and recency of all the information prior to taking any investment decision. While due diligence is done and care taken prior to uploading the stock price data, neither Business Standard Private Limited, www.business-standard.com nor any independent service provider is/are liable for any information errors, incompleteness, or delays, or for any actions taken in reliance on information contained herein.