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कृषि क्षेत्र में तेजी से बढ़ी आमदनी : नाबार्ड

संजीव मुखर्जी / नई दिल्ली August 16, 2018

भारत में खेती बाड़ी से जुड़े करीब 53 प्रतिशत परिवार कुछ न कुछ कर्ज से दबे हैं। नाबार्ड के एक सर्वे के मुताबिक यह आंकड़े  2012-13 और 2015-16 के बीच कम नहीं हुए हैं। इस अवधि के दौरान प्रति परिवार औसत कर्ज की मात्रा बढ़ी है। नाबार्ड की ओर से आज जारी सर्वे के मुताबिक 2012-13 और 2015-16 के बीच भारत के किसानों की सालाना औसत आमदनी 12 प्रतिशत चक्रवृद्धि दर से बढ़ी है। 

अगर यह आंकड़े सही हैं तो किसानोंं की 2022 तक आमदनी दोगुनी करने पर बनी उच्चाधिकार प्राप्त सरकारी समिति की सालाना वृद्धि दर की उम्मीद से ज्यादा है। नैशनल रेनफेड एरिया अथॉरिटी (एनआरएए) के सीईओ अशोक दलवी की अध्यक्षता में बनी समिति ने कहा है कि किसानोंं की वास्तविक आमदनी में 10.4 प्रतिशत की सालाना चक्रवृद्धि वृद्धि दर होनी चाहिए जिसेस 2022 तक किसानोंं की आमदनी दोगुनी हो सके। 

नाबार्ड के सर्वे से पता चलता है कि 2015-15 के दौरान 29 राज्यों में से 19 राज्यों के किसानों की आमदनी देश के औसत की तुलना में ज्यादा थी और 15 राज्यों की सालाना चक्रवृद्धि वृद्धि दर 2012-13 से 2015-16 के बीच 10.5 प्रतिशत से ज्यादा रही है। सर्वे में कहा गया है, ‘कृषि परिवारों की आमदनी में खेती से आमदनी की हिस्सेदारी 34 प्रतिशत है, जबकि गैर कृषि वाले परिवारों की आमदनी में मजदूरी की हिस्सेदारी करीब 54 प्रतिशत है।’ 

नाबार्ड ने एकेडमी आफ मैनेजमेंट स्टडीज (एएमएस) के साथ मिलकर 1 जुलाई 2015 और 30 जून 2016 के बीच 29 राज्यों में सर्वे कराया, जिनमें 40,327 परिवार और 1,87,518 लोग शामिल हुए। 

नाबार्ड के सर्वे से पता चलता है कि 2015-16 में कर्ज लेने वालों की सबसे ज्यादा संख्या तेलंगाना (79 प्रतिशत) रही, उसके बाद आंध्र प्रदेश (77 प्रतिशत), कर्नाटक (74 प्रतिशत) का स्थान है। एनएसएसओ के 2012-13 के सर्वे में भी यह सामने आया था कि कर्ज के मामले में आंध्र प्रदेश पहले स्थान पर है और उसके बाद तेलंगाना, तमिलनाडु और असम आते हैं। 
Keyword: तेलंगाना, तमिलनाडु, Agriculture, NABARD, AMS, नाबार्ड, NRAA,
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