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वस्तुओं के वर्गीकरण में जीएसटी उलझा

इंदिवजल धस्माना / नई दिल्ली August 16, 2018

वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के तहत वस्तुओं के वर्गीकरण को लेकर भ्रम कम से कम कुछ मामलों में सही साबित हो रहा है। हिमालय ड्रग कंपनी के खिलाफ हाल की कार्रवाई से इस समस्या का पता चलता है। कर अधिकारियों ने बेंगलूरु की कंपनी के कार्यालयों की तलाशी की थी। 

हिमालय कथित रूप से वेट बेबी वाइप्स पर 12 प्रतिशत कर भुगतान कर रही थी, जिसका दावा था कि यह वस्तु गैर कॉस्मेटिक नैपकिन की श्रेणी में है। वहीं दूसरी ओर सरकार ने 18 प्रतिशत की दर से कर की मांग की है। इसके पहले वेट बेवी पाइप्स पर कर 28 प्रतिशत था।  इस मसले पर संपर्क किए जाने पर कंपनी ने एक बयान में कहा है, ‘यह उत्पाद, बेबी वाइप्स 2007 से बाजार में है। कंपनी इस बात की पुष्टि करती है कि लागू कानूनों के मुताबिक उसका सही वर्गीकरण हुआ है और जीएसटी नियमों के मुताबिक कर का भुगतान किया गया है। अगर आगे कोई स्पष्टीकरण मांगा जाता है तो हम अधिकारियों के साथ भविष्य में सहयोग जारी रखेंगे।’ 

कंपनी ने कहा कि वह कर अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए कर विशेषज्ञों से उचित सलाह लेगी। कंपनी ने कहा, ‘हमारे पास उत्पादों की लंबी चौड़ी श्रेणी है। कंपनी का किसी एक भी उत्पाद के गलत वर्गीकरण या उस पर कर चोरी का कोई इरादा नहीं है।’ कंपनी रोजमर्रा के इस्तेमाल के सामान से लेकर दवाओं तक की बिक्री करती है। 

खेतान ऐंंड कंपनी में पार्टनर अभिषेक रस्तोगी ने कहा कि हिमालय के खिलाफ कार्यवाही वर्गीकरण से जुड़ा मसला है। उन्होंने कहा, ‘कर ढांचे में यह कोई नया विवाद नहीं है। यहां तक कि जीएसटी के पहले के दौर में भी यह विवाद चलता था कि आयुर्वेदिक उत्पादों को दवा की श्रेणी में रखा जाए या कॉस्मेटिक की श्रेणी में। हमने कंपनियों के खिलाफ इस तरह के आरोप वीको लैब और बैद्यनाथ के मामलों में भी देखे हैं।’ उन्होंने कहा कि दरों में अंतर की वजह से मतभेद उभरते हैं। 

इस समय कंपनियां खुद बिक्री का आकलन कर रिटर्न और इनपुट आउटपुट रिटर्न का सारांश दाखिल करती हैं। रस्तोगी ने कहा कि स्वत: आकलन ढांचे के तहत हर कंपनी उत्पादों के वर्गीकरण पर फैसला करने को स्वतंत्र है और वह इस तरह के वर्गीकरण के आधार पर कर का भुगतान करती है। 

विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे तमाम मामलों में उच्च न्यायालयों ने आरोपों को बहुत हल्का पाया और उसे कर चोरी की घटना कहना अनुचित बताया है। इसके पहले इस तरह के विवाद उच्चतम न्यायालय तक गए हैं। 

जीएसटी पर शुरुआती बहस में इस तरह के डर सामने आए थे। उदाहरण के लिए विक्स टैबलेट को दवा माना जाए या मीठी गोली। किटकैट को चॉकलेट माना जाए या बिस्कुट।
Keyword: खेतान ऐंंड कंपनी, GST, Tablet, Expert, Classification, Cosmetic, Himalya, Drug Company, Drug,
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