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शीर्ष-500 सूची में अमेरिका का दबदबा

पवन बुरुगुला / मुंबई August 16, 2018

वैश्विक मानचित्र पर भारत जैसे उभरते बाजारों (ईएम) की मजबूत होती हैसियत के बावजूद वैश्विक बाजारों के ताकतवर क्लब में लगातार अमेरिकी कंपनियों का दबदबा कायम है। आंकड़ों के अनुसार दुनिया में मौजूदा 500 सबसे बड़ी (बाजार पूंजीकरण के संदर्भ में) कंपनियों में से 203 कंपनियां अमेरिका से हैं। एक दशक पहले इस सूची में सिर्फ 164 अमेरिकी कंपनियां शामिल थीं।

दूसरी तरफ, भारत और दक्षिण कोरिया समेत उभरते बाजारों से कंपनियों की संख्या घटी है। उदाहरण के लिए, 2008 और 2018 के बीच शीर्ष-500 में भारतीय कंपनियों की संख्या 13 से घटकर 11 रह गई, हालांकि भारत ने इस अवधि के दौरान बाजार मूल्य के संदर्भ में आठवें सबसे बड़े देश के तौर पर उभरने के लिए तीन अन्य बाजारों को पीछे छोड़ा। 

इसी तरह से सूची में दक्षिण कोरियाई कंपनियों की संख्या 6 से घटकर 3 रह गई। आंकड़ों के अनुसार चीन ने शीर्ष-500 की सूची में बड़ी सफलता हासिल की है। इस सूची में चीन की कंपनियों की संख्या जहां वर्ष 2008 में महज 25 थी, वहीं अब यह बढक़र 40 हो गई है।

सूची में अमेरिकी कंपनियों का दबदबा मुख्य रूप से तीन कारकों पर आधारित है जिनमें शानदार बाजार प्रतिफल, प्रौद्योगिकी कंपनियों की संख्या में तेजी और यूरोपीय बाजारों की कमजोर होती पकड़ शामिल है।

अमेरिकी कंपनियों की बढ़ती भागीदारी के पीछे नई सिलीकन वैली कंपनियों का तेज विकास मुख्य रूप से जिम्मेदार है। सूची में आईटी कंपनियों की कुल संख्या 2008 के 25 से बढक़र अब 55 हो गई है। आईटी के संदर्भ में यह बढ़त ऊर्जा, मुख्य मैटेरियल और संचार क्षेत्रों में कमजोरी की वजह से दिखी।  

इसका सर्वश्रेष्ठ उदाहरण पांच प्रमुख कंपनियां - फेसबुक, एमेजॉन, ऐपल, नेटफ्लिक्स और गूगल हैं। ये वैश्विक रूप से प्रमुख सूचीबद्घ स्टार्ट-अप हैं जो एक दशक पहले दौड़ में शामिल नहीं थे। मौजूदा समय में इन कंपनियों का बाजार पूंजीकरण कई देशों की जीडीपी की तुलना में काफी बड़ा है। इन नई दिग्गज कंपनियों ने एक्सन और जनरल मोटर्स जैसे कई पारंपरिक और प्रतिष्ठिïत घरानों को मात दी है।

सूची में अमेरिकी दबदबे का अन्य कारण यह है कि देश बड़े स्टार्ट-अर्प (खासकर टेक्नोलॉजी सेक्टर से) की सूचीबद्घता के लिए पसंदीदा स्थान के तौर पर उभरा है। उदाहरण के लिए, चीन की ई-कॉमर्स दिग्गज अलीबाबा ने वर्ष 2014 में अमेरिकी शेयर बाजारों पर सूचीबद्घ होना पसंद किया था। कंपनी 460 अरब डॉलर के बाजार पूंजीकरण के साथ शीर्ष-500 सूची में जगह पहले ही बना चुकी है।

साथ ही अमेरिकी बाजारों ने 2008 के वैश्विक वित्तीय संकट के बाद अच्छी तेजी भी दर्ज की है। एसऐंडपी 500 सूचकांक वर्ष 2008 से 93 प्रतिशत चढ़ा है और यह कई विकसित तथा भारत समेत उभरते बाजारों को मात दे चुका है। निफ्टी सूचकांक एक दशक के दौरान 88 फीसदी चढ़ा है। 

दूसरी तरफ, कई यूरोपीय इक्विटी बाजार 2008 की मंदी के बाद से वैश्विक बाजारों की तुलना में कमजोर बने हुए हैं। आर्थिक मंदी, मांग के अभाव आदि की वजह से शीर्ष-500 सूची में यूरोपीय कंपनियों का परिदृश्य प्रभावित हुआ है। 
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