बिजनेस स्टैंडर्ड - पीएसयू को सार्वजनिक शेयरधारिता पर फिर मोहलत
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पीएसयू को सार्वजनिक शेयरधारिता पर फिर मोहलत

समी मोडक और श्रीमी चौधरी / मुंबई 08 16, 2018

भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (पीएसयू) को सार्वजनिक शेयरधारिता कम से कम 25 फीसदी करने की समयसीमा में एक बार फिर राहत दी है। सूत्रों के अनुसार पूंजी बाजार नियामक ने पीएसयू के लिए 25 फीसदी सार्वजनिक शेयरधारिता की समयसीमा दो साल और बढ़ा दी है। इसकी समयसीमा 31 अगस्त को खत्म हो रही थी। सेबी के इस कदम से करीब तीन दर्जन पीएसयू को बड़ी राहत मिली है, जिसमें सरकार की 75 फीसदी से ज्यादा हिस्सेदारी है। 25 फीसदी न्यूनतम सार्वजनिक शेयरधारिता के लिए मौजूदा बाजार भाव के हिसाब से इन कंपनियों को 250 अरब रुपये से ज्यादा मूल्य का विनिवेश करने की जरूरत होगी।

यह तीसरा मौका है जब सेबी ने पीएसयू के लिए समयसीमा बढ़ाई है। शुरुआती समयसीमा अगस्त 2014 में तय की गई थी जिसे बाद में बढ़ाकर अगस्त 2017 किया गया था। पिछले साल सेबी ने एक बार और एक साल की मोहलत दी थी। नियामकीय सूत्रों ने कहा कि न्यूनतम सार्वजनिक शेयरधारिता जरूरतों के क्रियान्वयन की जिम्मेदारी सेबी की है, लेकिन समयसीमा तय करने का अधिकार सरकार के पास है। सेबी के एक अधिकारी ने कहा कि केंद्र सरकार के पास प्रतिभूति अनुबंध विनियमन नियमों के तहत पीएसयू को छूट देने का अधिकार है। उन्होंने कहा कि इस बारे में नई अधिसूचना जल्द जारी की जाएगी।

न्यूनतम सार्वजनिक शेयरधारिता की समयसीमा को उस समय बढ़ाया गया है जब निवेशकों की धारणा सार्वजनिक उपक्रमों के शेयरों को लेकर कमजोर बनी हुई है। हालांकि बेंचमार्क सूचकांक सर्वकालिक उच्च स्तर पर कारोबार कर रहे हैं। बीएसई पीएसयू में इस साल 17 फीसदी की गिरावट आई है। इसके मुकाबले सेंसेक्स करीब 11 फीसदी चढ़ा है। 

नियामकीय सूत्रों ने कहा, ‘सरकार का मानना है कि विनिवेश के लिए अभी समय अनुकूल नहीं है। सार्वजनिक शेयरधारिता के नियमों के अनुसार अभी पीएसयू के शेयरों की बिक्री करने से नुकसान उठाना होगा।’ बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि निजी कंपनियों और सार्वजनिक उपक्रमों के बीच भेदभाव से बचा जाना चाहिए। प्राइम डेटाबेस के प्रबंध निदेशक पृथ्वी हल्दिया ने कहा, ‘यह केवल न्यूनतम सार्वजनिक शेयरधारिता के दिशानिर्देशों तक ही सीमित नहीं है बल्कि स्वतंत्र एवं महिला निदेशकों की नियुक्ति जैसे अन्य क्षेत्रों के मामले में भी यह सच है।’

कुछ प्रमुख सार्वजनिक उपक्रम जिनमें सरकार की हिस्सेदारी 75 फीसदी से अधिक है, उनमें कोल इंडिया (78.3 फीसदी) और एमएमटीसी (89.9 फीसदी) है। इसके अलावा करीब दर्जन भर बैंकों में सरकार की हिस्सेदारी 80 फीसदी से अधिक है। इसके साथ ही हाल में सूचीबद्घ जनरल इंश्योरेंस कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (जीआईसी आरई), हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स और हाउसिंग ऐंड अबर्न डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (हुडको) में सरकार की हिस्सेदारी इस सीमा से अधिक है लेकिन इसके लिए कंपनियों के पास सूचीबद्घता की तिथि से लेकर तीन साल का समय है। 
Keyword: PSU, Coal India, PSU, Bank, HUDCO, Insurance, GIC RE, Listed Company, Share, Share market, Stock Exchange,
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