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म्युचुअल फंड उद्योग में फंड प्रबंधकों की स्थिति

श्यामल मजूमदार /  August 14, 2018

परिसंपत्ति प्रबंधन कंपनियों (एएमसी) का काम इन दिनों जोरों पर है। गत चार वर्ष में उनके प्रबंधन के अधीन परिसंपत्तियों का मूल्यांकन दोगुना बढक़र 23 लाख करोड़ रुपये तक जा पहुंचा है। जश्न के इस माहौल के बीच भी शीर्ष स्तर के लोग कुछ दिक्कत महसूस कर रहे हैं। कई मुख्य निवेश अधिकारी (सीआईओ) और फंड मैनेजरों ने इस तेजी का फायदा बाहर निकलने में किया है। ऐसा काफी समय से हो रहा है लेकिन हाल के दिनों में बाहर निकलने वालों की गति तेज हुई है। 

एक तरह से देखें तो हर उद्योग इस प्रक्रिया से गुजरता है। परंतु एएमसी अभी भी इस प्रतिभा पलायन से निपटने का तरीका ही खोज रही हैं। एक प्रमुख एएमसी के मुख्य कार्याधिकारी (सीईओ) कहते हैं कि यह एक ऐसे उद्योग के लिए अपेक्षाकृत नई अवधारणा है जो केवल 25 वर्ष पहले ही निजी क्षेत्र के लिए खोला गया।

फिलहाल म्युचुअल फंड की संख्या 40 हो चुकी है लेकिन इससे पहले अवसर सीमित थे क्योंकि उद्योग जगत अपनी जगह बनाने का प्रयास कर रहा था। चार शीर्ष एएमसी में प्रतिभा को बरकरार रखने की प्रक्रिया पहले ही शुरू है। ये चारों मिलकर कुल प्रबंधित परिसंपत्ति के 56 प्रतिशत के लिए जवाबदेह हैं। शेष कंपनियां काफी पीछे हैं।

बीते एक वर्ष में करीब एक दर्ज सीआईओ छोडक़र जा चुके हैं। कुछ ने बड़े फंड हाउस का रुख किया जबकि अन्य ने वैकल्पिक निवेश फंड चुन लिए। कुछ प्रमुख सीआईओ ने अपने उद्यम शुरू कर दिए या उद्योगपतियों के पारिवारिक कारोबारी घरानों से जुड़ गए। ये वे उद्योगपति हैं जिनको अपने अरबों रुपयों का प्रबंधन करने के लिए सलाहकार चाहिए। 

पहले ये तमाम अवसर उपलब्ध ही नहीं होते थे। उदाहरण के लिए एक शीर्ष म्युचुअल फंड प्रबंधक केनेथ एंड्रेड, जो पहले आईडीएफसी ऐसेट मैनेजमेंट में निवेश विभाग के प्रमुख थे, उन्होंने इस फंड हाउस में 10 वर्ष काम करने के बाद अपना नाता तोड़ लिया। अब वह एक पोर्टफोलियो प्रबंधन सेवा (पीएमएस) ओल्ड ब्रिज कैपिटल मैनेजमेंट के साथ है जिसकी स्थापना भी उन्होंने ही की है। जिन अन्य लोगों ने अपना पीएमएस स्थापित करने की राह चुनी है उनको बेहतर मौद्रिक लाभ हो सकता है क्योंकि उनकी मदद के लिए मुनाफे में भागीदारी का प्रावधान है। यह एक संकेंद्रित पोर्टफोलियो के लिए काफी लचीली पेशकश सामने रखता है।

बहरहाल, अधिकांश फंड हाउस कहते हैं कि किसी सीआईओ या फंड प्रबंधक के बाहर जाने से कोई फर्क नहीं पड़ता क्योंकि वे एक प्रक्रिया से संचालित होते हैं और उनके जाने का बहुत सीमित प्रभाव हो सकता है। उनकी यह दलील सही है कि लोगों के बजाय प्रक्रिया अधिक महत्त्वपूर्ण होती है। ऐसी स्थिति में तेजी भरे बाजार में निवेशक अफरातफरी भरे माहौल से बच सकते हैं। उनकी बात एक हद तक सही है लेकिन तथ्य यह है कि एक अच्छे सीआईओ का छोडक़र जाना बुरी तरह नुकसान पहुंचा सकता है। ऐसा इसलिए क्योंकि अक्सर सीआईओ ही निवेश प्रक्रिया की निगरानी करता है और विभिन्न योजनाओं की निवेश नीतियों से जुड़े फैसले करता है।

अभी भी ढेर सारे ऐसे निवेशक हैं जो चुनिंदा एएमसी या योजनाओं में इसलिए निवेश करते हैं क्योंकि उनके साथ कोई बड़ा नाम जुड़ा होता है। जब ऐसे बड़े नाम वाले सीआईओ फंड से अलग हो जाते हैं तो उनके सामने दुविधा उत्पन्न हो जाती है। निवेशकों को लगता है कि क्या उनको उस फंड के साथ बने रहना चाहिए या किसी अन्य बड़े नाम का रुख कर लेना चाहिए? इस सप्ताह के आरंभ में आई एक रिपोर्ट में कहा गया कि कोई भी निर्णय लेने के पहले निवेशकों को कई कारकों पर ध्यान देना चाहिए। यह भी देखा जाना चाहिए कि क्या उनके प्रबंधक को अपने काम की नई जगह पर भी वैसे ही संसाधन मिलते हैं जैसे पिछले फंड में उपलब्ध थे। यह भी क्या मौजूदा फंड का अधिग्रहण मौजूदा निवेश टीम का सदस्य करेगा या कोई बाहरी व्यक्ति? यह भी देखा जाना चाहिए कि फंड का दर्शन बरकरार रहता है या बदल जाता है। 

कई मामलों में तो एएमसी को सीआईओ या फंड प्रबंधक के बाहर निकलने का दोष भी अपने सिर पर लेना पड़ सकता है। लंबी अवधि के निवेश को लेकर उनकी सार्वजनिक स्थिति के विपरीत इनमें से कई कंपनियां अपने सीआईओ और फंड प्रबंधक के अल्पावधि के प्रदर्शन को लेकर कुछ ज्यादा ही आसक्त रहते हैं। वे उनके काम का आकलन उनके तिमाही प्रदर्शन के आधार करते हैं। 

ऐसे में एएमसी को दो काम करने चाहिए: पहला, उन्हें अपने फंड प्रबंधकों की एक साल की रैंकिंग जुटाने की क्षमता के बजाय उनकी निरंतरता और कार्यावधि का सम्मान करना चाहिए। इसके अलावा उन्हें अपने फंड प्रबंधकों  को उचित समय प्रदान करना चाहिए ताकि उनकी नीति का सकारात्मक प्रभाव देखने को मिल सके। फंड प्रबंधकों की एक आम आलोचना यह होती है कि उनमें से अधिकांश हवा के साथ बहने में यकीन करते हैं और खुद को ऐसे कारोबारी माहौल के लिए तैयार नहीं करते हैं जो अगले कुछ वर्षों में काफी अलग होने वाला हो और नई तकनीक और निवेशकों की मांग के हिसाब से बदल जाए।

ब्लॉकचेन जैसी नई तकनीक तमाम नए अवसर पैदा कर रही हैं। यानी तलवार उन पर ही गिरेगी जो अभी भी अतीत में उलझे हुए हैं और खुद को नए तरीके से तैयार नहीं कर रहे हैं। केवल प्रतिभा आपको बहुत आगे तक नहीं ले जा सकती। 
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