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वैश्विक बाजारों के लिए सतर्क होने का वक्त?

आकाश प्रकाश /  August 13, 2018

विश्व स्तर पर देखा जाए तो इन दिनों तमाम प्रतिष्ठित निवेशक भी बाजार को लेकर सतर्कता का रुख अपना रहे हैं। उनको लग रहा है कि बाजार में अवसर से अधिक जोखिम हैं। खासतौर पर वे निवेशक जो स्वयं की पूंजी का इस्तेमाल करते हैं, वे भारी भरकम नकदी लेकर बैठे हैं। यह बात वैश्विक पूंजी बाजार के मौजूदा रुझान के विपरीत है। अधिकांश वैश्विक सूचकांक ऊंचाई पर हैं। निवेशकों का रुझान आशावादी है और आय में उछाल आ रही है।

विश्लेषक भी कह रहे हैं कि कंपनियों का प्रदर्शन सुधरेगा। आम सहमति है कि कम से कम 2020 के अंत तक अमेरिका में मंदी जैसे हालात नहीं दिखने वाले। ऐसे में वैश्विक बाजारों में और उछाल आ सकती है और बाजार में ऐसी अप्रत्याशित तेजी आ सकती है जिसका लाभ कोई पारंपरिक निवेशक गंवाना नहीं चाहेगा। आश्वस्ति के इस दौर में सतर्क लोगों की बात सुनना और उनकी अवधारणा की समीक्षा करना उचित होगा।

तेजडिय़ों और मंदडिय़ों के बीच सबसे बड़ा मतभेद अमेरिकी अर्थव्यवस्था को लेकर है। जो सतर्क हैं उन्हें लग रहा है कि मंदी आसन्न है। फेडरल रिजर्व द्वारा दरों में इजाफा और मौद्रिक नीति में बरती जा रही कड़ाई इसे और करीब ला रही है। यह मंदी 2020 के पहले ही आ जाएगी और बाजार में कम से कम 20 फीसदी गिरावट आएगी। मंदी के आगमन के कम से कम छह महीने पहले बाजार में गिरावट का दौर शुरू हो जाएगा।

मंदडिय़ों की अवधारणा बढ़ती मुद्रास्फीति और बढ़ती दरों पर आधारित है। उनका कहना है कि अमेरिका पहले ही पूर्ण रोजगार की स्थिति में है। देश में बेरोजगारों से अधिक रोजगार उपलब्ध हैं। श्रम शक्ति से बाहर के लोगों में रोजगार की मांग बहुत कम है और हर कारोबारी सर्वेक्षण से पता चलता है कि काबिल कर्मचारी मिलना मुश्किल हो चुका है। कई अध्ययनों के मुताबिक बेरोजगारी और मेहनताने के दबाव में विसंगति है लेकिन पूर्ण रोजगार की स्थिति में वेतन भत्तों में इजाफा होना तय है। वर्ष 2018 की दूसरी तिमाही में पहले ही रोजगार लागत सूचकांक 2.8 फीसदी बढ़ चुका है। यह एक दशक में सबसे तेज है। 

फेडरल रिजर्व का  का आकलन बीती कुछ तिमाहियों से 2 फीसदी के आसपास है। यह उसके लक्ष्य के अनुरूप है। वेतन-भत्ते बढऩे पर मुद्रास्फीति का दबाव भी बढ़ेगा। तब फेडरल रिजर्व को दरों में इजाफा करना होगा। बाजार और वर्ष 2019 के अंत तक दरों में 125 आधार अंकों की बढ़ोतरी सही साबित हो सकती है। अमेरिका में ऐसा भी हो सकता है कि मौजूदा अनुमान की तुलना में दरें ऊंची हों और वृद्घि धीमी। यह स्थिति शेयरों के लिए अच्छी नहीं कही जाएगी। 

तेजडि़ए प्रसन्न हैं। उन्हें नहीं लग रहा है कि मुद्रास्फीति नियंत्रण से बाहर जाएगी। वे बेरोजगारी और वेतन के दबाव को लेकर भी कोई सवाल नहीं करना चाहते। लंबे समय से मंदडिय़े वेतन वृद्घि की मांग कर रहे हैं। मुद्रास्फीति सहज रही है। उनको लगता है कि फेडरल रिजर्व मुद्रास्फीति को लेकर कहीं अधिक व्यवस्थित दृष्टि अपनाएगा। उन्हें नहीं लगता कि 2019 या 2020 में अमेरिका में मंदी का कोई जोखिम है। उन्हें लगता है कि फिलहाल जोखिम उठाना करियर के लिहाज से घातक हो सकता है।

तेजडिय़ों और मंदडिय़ों के बीच एक अन्य मतभेद व्यापार युद्घ और शुल्क को लेकर है। तेजडिय़ों को लगता है कि यह बेवजह का शोरगुल है। उन्हें लगता है कि अंतत: समझदारी काम आएगी और कोई ऐसा समझौता हो जाएगा जो सबके हित में हो। 

वहीं मंदडिय़ों की बात करें तो वे कहते हैं कि नुकसान शुरू हो चुका है और चीन और अमेरिका का गतिरोध वैश्विक आपूर्ति शृंखला और कॉर्पोरेट निवेश को प्रभावित भी कर रहा है। किसी भी बहुराष्ट्रीय कंपनी को ऐसी अनिश्चितता नहीं पसंद आती। इसके अनचाहे परिणाम विभिन्न देशों में और अलग-अलग देशों में नजर आएंगे। यहां एक बड़ा जोखिम यह है कि चीजें हाथ से बाहर निकल सकती हैं। यह बात सभी क्षेत्रों पर लागू होती है। 

मतभेद का तीसरा बिंदु अमेरिका में कॉर्पोरेट आय के अनुमान के अंतर से जुड़ा है। तेजडिय़ों का कहना है कि बीते दो साल में आय में 20 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। मौजूदा सत्र में भी 25 फीसदी की आय वृद्घि की बात कही जा रही है और कंपनियां राजस्व और मुनाफे के मामले में अनुमान से बेहतर प्रदर्शन कर रही हैं। लंबी अवधि की आय के अनुमान 15 फीसदी से अधिक हैं। यह सन 2000 के बाद का शीर्ष स्तर है। तेजी के मौजूदा चक्र में आय हमेशा अनुमान से बेहतर रही है। रिकॉर्ड शेयरों की पुनर्खरीद के साथ यह दिखाता है कि तेजी के रुख में बदलाव नहीं आने वाला। 

मंदडिय़ों का कहना है कि अमेरिका में आय में श्रम की हिस्सेदारी 2014 में अपने सबसे निचले स्तर पर थी। यह बात कर पूर्व लाभ के राष्ट्रीय आय खातों में उच्च मार्जिन से भी साबित होती है। तब से राष्ट्रीय आय की शृंखला ने मुनाफे में गिरावट ही दिखाई है। कॉर्पोरेट मुनाफे में अहम अंतर उत्पन्न हुआ है। राष्ट्रीय आय खाते आमतौर पर अधिक स्थिर होते हैं और वे लेखा बदलाव या कर दरों के अंतर से भी प्रभावित नहीं होते। 

यह शृंखला यकीनन अधिक भरोसेमंद है। आने वाले वर्षों में हम जब पीछे मुडक़र देखें तो हमें यह आश्चर्य होगा कि क्या कॉर्पोरेट मुनाफे में तेजी वाकई उतनी दमदार थी जितनी कि वह आज की तारीख में नजर आ रही है? सन 2000 के दशक में टेक बबल में यही हुआ था। उस वक्त यानी सन 2000 के बाद कॉर्पोरेट मुनाफे में अचानक तेजी से कमी आई थी। 

उपरोक्त तीन बिंदुओं के अलावा भी कुछ छिटपुट बातें हैं। चीन की चिंता हमारे सामने हर समय मौजूद है। मजबूत डॉलर के खतरे और ईरान तथा उत्तर कोरिया से जुड़ी भूराजनैतिक चिंताओं से भी हमें मुक्ति नहीं मिल सकती। 

परंतु फिर भी मैं कहूंगा कि बहुत कम अवसरों पर मुझे चतुर और अनुभवी निवेशक इतने सतर्क नजर आए हैं। इस समय मानो उन्हें अपना लाभ बढ़ाने की चिंता ही नहीं है। वे वैश्विक शेयरों की तेजी को लेकर एक तरह से लापरवाह हैं। जैसा कि पिछले दिनों एक मित्र ने मुझसे कहा भी कि हम पूंजी संरक्षण और कम प्रतिफल के दौर में प्रवेश कर रहे हैं। यह वक्त चौकस और सतर्क रहने का है। उसने कहा कि इसका अंत बुरा होगा। हमेशा ऐसा ही होता है।

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