बिजनेस स्टैंडर्ड - आयुष्मान के लिए 6 राज्य तैयार
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आयुष्मान के लिए 6 राज्य तैयार

वीणा मणि और निवेदिता मुखर्जी / नई दिल्ली 08 13, 2018

बदलकर 'प्रजा' हो सकता है योजना का नाम

 प्रधानमंत्री कर सकते हैं इसका ऐलान

बिजनेस स्टैंडर्ड आयुष्मान के लिए 6 राज्य तैयारआयुष्मान भारत राष्ट्रीय स्वास्थ्य संरक्षण मिशन यानी मोदीकेयर के मुख्य कार्याधिकारी इंदु भूषण का केबिन आजकल वार रूम बना हुआ है। वजह यह है कि स्वतंत्रता दिवस करीब आ रहा है और उस दिन इस महत्त्वाकांक्षी मिशन को शुरू किए जाने की चर्चा है। भूषण का कमरा स्वास्थ्य मंत्रालय के मुख्यालय निर्माण भवन की तीसरी मंजिल पर स्थित है। इसमें एक व्हाइटबोर्ड लगा है जिसे राज्यों से मिल रहे आंकड़ों के आधार पर लगातार अपडेट किया जा रहा है। 

लेकिन क्या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वतंत्रता दिवस के दिन इस योजना की शुरुआत करेंगे? इसके लिए पूर्व अफसरशाह भूषण ने सीधे तौर पर कोई उत्तर देने से इनकार कर दिया। पिछले 10 दिन में 10 राज्यों का चक्कर काट चुके भूषण ने केवल इतना कहा, ‘मिशन की तैयारी के लिए हमारी टीम सुबह नौ बजे से रात नौ बजे तक काम कर रही है।’ अलबत्ता सूत्रों ने संकेत दिया कि प्रधानमंत्री स्वतंत्रता दिवस के संबोधन में विस्तार से आयुष्मान के बारे में बताएंगे। वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के बाद इसे मोदी सरकार का सबसे बड़ा कदम माना जा रहा है। हालांकि सरकार इसे लेकर बेहद सतर्क भी है क्योंकि वह इसे लागू करने में जीएसटी जैसी दिक्कतें नहीं चाहती है। 

छह राज्य छत्तीसगढ़, मणिपुर, हरियाणा, गुजरात, पश्चिम बंगाल और आंध्र प्रदेश 15 अगस्त को प्रयोग के तौर पर आयुष्मान योजना की शुरुआत के लिए सहमत हैं। सूत्रों का कहना है कि प्रधानमंत्री बुधवार को लाल किले के प्राचीर से इस मिशन को राष्ट्र को समर्पित करेंगे। लेकिन पूरे देश में इसे बाद में लागू किया जाएगा। इसे 2 अक्टूबर को पूरे देश में लागू करने पर विचार किया जा रहा है लेकिन इसे पहले भी शुरू किया जा सकता है। 

आम बजट में आयुष्मान योजना के लिए 105 अरब रुपये की घोषणा की गई थी और इसका नाम बदलकर प्रधानमंत्री जन आरोग्य अभियान (प्रजा) किया जा सकता है। इस बात की पुष्टि नहीं हो पाई कि नए नाम पर फैसला किया जा चुका है या नहीं। 

इस योजना का नाम ही नहीं बदलेगा बल्कि इसके बुनियादी मॉडल में भी बदलाव होगा। सूत्रों का कहना है कि अगले कुछ महीने में कई राज्यों और फिर अगले साल आम चुनाव होने हैं। इसलिए चुनावी राजनीति ने इस योजना की रूपरेखा में अहम भूमिका निभाई है। शुरुआत में इसे बीमा आधारित मॉडल पर बनाया गया था लेकिन अब अधिकांश राज्यों का झुकाव ट्रस्ट मॉडल की ओर है। इसमें बीमा कंपनियों की कोई भूमिका नहीं होगी।

बीमा मॉडल में जहां किस्त आधारित प्रारूप था वहीं ट्रस्ट मॉडल में केंद्र और राज्य सरकारें पूरा खर्च वहन करेंगी। साथ ही एक मिश्रित या हाइब्रिड मॉडल होगा जो बीमा और ट्रस्ट मॉडलों का मिश्रण होगा। जानकारों का कहना है कि हाइब्रिड मॉडल सबसे सफल रहने की संभावना है। योजना की सुचारु शुरुआत के लिए यूआईडीएआई के अध्यक्ष और आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू के पूर्व साथी जे सत्यनारायण को इसका सलाहकार बनाया गया है। टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज प्रौद्योगिकी से जुड़े पहलुओं को देख रही है जिसमें उसे एनआईसी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय का भी सहयोग मिल रहा है। 

प्रधानमंत्री ने आयुष्मान में धोखाधड़ी और दुरुपयोग से बचने के लिए उपाय करने को कहा है। इसके लिए एक अलग नियामक बनाया जा सकता है। अब तक 28 राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों ने आयुष्मान से जुडऩे पर सहमति जता दी है और कुछ ने तो राज्य स्तर पर स्वास्थ्य योजनाओं की शुरुआत भी कर दी है। 

हालांकि राज्यों द्वारा दिए जा रहे लाभ की राशि बहुत कम है लेकिन केंद्र की पहल के साथ जुडऩे पर प्रति परिवार स्वास्थ्य कवर की राशि 5 लाख रुपये तक जा सकती है। इस राशि को केंद्र और राज्यों के बीच बांटा जाएगा। 5 अगस्त तक 28 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 8,000 अस्पतालों को इस योजना से जोडऩे का लक्ष्य है।

अभी यह संख्या 7,700 से कुछ अधिक है। भूषण ने कहा कि पूरे देश में लागू होने के समय इन अस्पतालों की संख्या 20,000 को पार कर सकती है। ओडिशा ने अभी तक इस योजना से दूरी बना रखी है लेकिन विधानसभा चुनावों के बाद वह इससे जुड़ सकता है। तमिलनाडु, महाराष्ट्र, कर्नाटक, केरल और पंजाब भी इससे जुड़ने की प्रक्रिया में हैं। 

सूत्रों का कहना है कि दिल्ली के हाल फिलहाल इसका हिस्सा बनने की संभावना नहीं है। अलबत्ता निर्माण भवन के वार रूम में रोजाना सुबह 10 बजे होने वाली समीक्षा बैठकों में अक्सर कई चौंकाने वाली बातें सामने आती हैं।
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