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शाब्दिक मुखरता से मिली लोकप्रियता

एजेंसियां /  August 12, 2018

उपनिवेशवाद, आदर्शवाद, धर्म और राजनीति जैसे विषयों पर मुखर रूप से अपनी बात रखने वाले नोबेल पुरस्कार  से सम्मानित लेखक विद्याधर सूरज प्रसाद नायपॉल (वी एस नायपॉल) का 85 वर्ष की आयु में निधन हो गया। नायपॉल की पत्नी नादिरा नायपॉल ने एक बयान में कहा, ‘उन्होंने जो हासिल किया वह महान था और उन्होंने अंतिम सांस अपने प्रियजनों के बीच ली। उनका जीवन अद्भुत रचनात्मकताओं एवं प्रयासों से भरा था।’ 

नायपॉल ने अपने जीवन में 30 से अधिक किताबें लिखीं। ‘द मिस्टिक मैसूर’ उनकी पहली किताब थी। वर्ष 1961 में प्रकाशित ‘अ हाउस फॉर मिस्टर बिस्वास’ उनकी सबसे मशहूर एवं लोकप्रिय किताब है। ‘द मिमिक मेन’ (1967) , ‘इन ए फ्री स्टेट’ (1971), ‘गुरिल्लाज’ (1975), ‘ए बेंड इन द रिवर’ (1979) , ‘ए वे इन वल्र्ड’ (1994), ‘द इनिग्मा ऑफ अराइवल’ (1987), ‘बियॉन्ड बिलिफ : इस्लामिक एक्सकर्जन अमंग द कन्वर्टेड पीपुल्स’ (1998), ‘हाफ ए लाइफ’ (2001), ‘द राइटर ऐंड द वल्र्ड’ (2002), ‘लिटरेरी ऑकेजन्स’ (2003) और ‘द नॉवेल मैजिक सीड्स’ (2004) आदि उनकी मशहूर रचनाओं में से हैं। नायपॉल को कई प्रतिष्ठित पुरस्कारों से सम्मानित किया गया जिनमें वर्ष 1971 में मिला ‘मैन बुकर प्राइज’ और वर्ष 1990 में मिला ‘नाइटहुड’ पुरस्कार भी शामिल है। नायपॉल को वर्ष 2001 में साहित्य के लिए ‘नोबेल पुरस्कार’ से भी सम्मानित किया गया।

नायपॉल का जन्म 17 अगस्त 1932 में त्रिनिदाद में एक भारतीय हिंदू परिवार में हुआ था। 18 साल का होने पर वह छात्रवृत्ति हासिल कर ऑक्सफोर्ड में पढऩे के लिए चले गए। इसके बाद वह इंगलैंड में बस गए। नायपॉल ने पहली शादी पैट्रिशिया एन हेल नायपॉल से वर्ष 1955 में की थी लेकिन वर्ष 1996 में पैट्रिशिया का निधन हो गया और उसी साल नायपॉल पाकिस्तानी पत्रकार नादिरा अल्वी से शादी के बंधन में बंध गए।

राजनीतिज्ञों ने जताया शोक 

नायपॉल के निधन पर विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं ने शोक जताया। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने उनके निधन को अक्षरों की दुनिया की अपूर्णीय क्षति बताया वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लेखन की दुनिया के लिए इसे बड़ा नुकसान बताया। कोविंद ने ट्वीट में कहा, ‘वी एस नायपॉल के निधन के बारे में जानकर दुख हुआ। उनकी किताबें कैरिबियाई द्वीप में उनके घर और उससे परे विश्वास, उपनिवेशवाद और मानवीय अवस्था की गहरी खोज करती हैं।’ उन्होंने लिखा कि यह अक्षरों की दुनिया और भारतीय-अंग्रेजी साहित्य का नुकसान है।

प्रधानमंत्री मोदी ने ट्विटर पर लिखा, ‘सर वी एस नायपॉल को उनके विस्तृत लेखन के लिए याद किया जाएगा जिसमें इतिहास, संस्कृति, उपनिवेशवाद, राजनीति और अन्य विभिन्न विषयों पर लेखन कार्य शामिल हैं।’ उन्होंने लिखा, ‘उनका जाना साहित्य जगत के लिए एक बड़ा नुकसान है। इस दुख की घड़ी में मेरी संवेदनाएं उनके परिवार एवं शुभचिंतकों के साथ हैं।’ कांग्रेस के प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने ट्विटर पर नायपॉल के निधन पर शोक जताया। उन्होंने लिखा, ‘अपने तीक्ष्ण अवलोकन, रचनात्मकता और अक्सर आलोचनात्मक चित्रण से विश्व को प्रभावित एवं आकर्षित करने वाले साहित्य के प्रतिभाशाली व्यक्ति और आधुनिक दर्शनशास्त्री और नोबेल पुरस्कार विजेता साहित्यकार वी एस नायपॉल के निधन पर मेरी संवेदनाएं।’ ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने ट्वीट किया, ‘उपनिवेशवाद, प्रवासन और ब्रिटिश साम्राज्य से जुड़े खुलासे करने वाला उनका साहित्यिक कार्य अनुकरणीय और सोचने पर मजबूर कर देता है।’

नहीं लिखी आत्मकथा

नायपॉल ने कभी अपनी आत्मकथा नहीं लिखी क्योंकि उनका मानना था कि इसमें तथ्यों को तोड़ा-मरोड़ा जा सकता है। नायपॉल के अनुसार उपन्यास कभी झूठ नहीं बोलते और लेखक को पूरी तरह से प्रकट कर देते हैं लेकिन उनका मानना था कि आत्मकथा, तोड़ी मरोड़ी जा सकती है: तथ्यों को गढ़ा जा सकता है। पैट्रिक फ्रेंच ने 2008 में ‘द वल्र्ड इज व्हाट इट इज : द ऑथराइज्ड बायोग्राफी ऑफ वीएस नायपॉल’ नामक पुस्तक लिखी थी, जिसमें अनेक बातों के साथ ही विस्थापित समूह के भीतर उनकी जिंदगी तथा स्कूल में उनकी अति महत्वाकांक्षा की पड़ताल की गई है। किताब में बताया गया है कि किस प्रकार छात्रवृत्ति पर ऑक्सफोर्ड जाने पर उन्हें घर में रहने की आदत हो गई थी और उनके अंदर अवसाद घर कर गया था। इसके अलावा यह किताब उनकी पहली पत्नी के सहयोग, उनके असफल वैवाहिक जीवन और इंगलैंड में उनके अनिश्चितिता भरे दिनों पर प्रकाश डालती है। उनका नाम विद्याधर एक चंदेल राजा के नाम पर रखा गया था।

इसी वंश के राजा ने खजुराहो के मंदिरों का निर्माण कराया था। 11 वीं सदी की शुरुआत में राजा विद्याधर ने मुस्लिम आक्रमणकारी महमूद गजनी के खिलाफ लड़ाई लड़ी थी। नायपॉल अनेक बार भारत आए और उनकी अंतिम यात्रा जनवरी 2015 में जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल के लिए थी। इस समारोह में उन्होंने बताया था, ‘मेरी मां भारत से जो इकलौता हिंदी शब्द ले गईं थी वह था ‘बेटा’ और वह कहती थीं बेटा कृपया भारत को भारतीयों के लिए रहने दो।’ भारत पर उनकी पुस्तकों में ‘एन एरिया ऑफ डार्कनेस’ और ‘ए वुंडेड सिविलाइजेशन’ जैसी पुस्तकें शामिल थीं।

बड़े भाई को खोया: रश्दी

मशहूर लेखक सलमान रश्दी ने कहा है कि उन्होंने अपने प्यारे बड़े भाई को खो दिया है। वहीं, समकालीन लेखकों ने कहा कि नायपॉल उन महान लेखकों में से एक थे जिनकी कलम खुल कर बोलती थी।  

Keyword: इतिहास, संस्कृति, उपनिवेशवाद, राजनीति, V S Naipaul, Writer, Nobel laureate, Book, द मिमिक मेन,
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