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ब्लॉकचेन की राह पर भारतीय बीमा कारोबार

अद्वैत राव पालेपू /  August 12, 2018

भारत में जीवन बीमा कंपनियों का एक 19 सदस्यीय संघ अपने उपभोक्ताओं की स्वास्थ्य रिपोर्ट के साथ ही दूसरी जानकारियां उपभोक्ताओं की सहमति से एक-दूसरे से साझा करने के लिए ब्लॉकचेन तकनीक को अपनाने पर विचार कर रही है। साथ ही, इस तकनीक की मदद से बीमा क्षेत्र में होने वाली धोखाधड़ी को रोकने का प्रयास किया जाएगा। इसके लिए बीमा कंपनियां आईटी फर्म आईबीएम और कॉग्निजेंट के साथ मिलकर काम कर रही हैं। ब्लॉकचेन तकनीक के क्षेत्र में एक नया प्लेटफॉर्म है और इसमें सभी जानकारियों को एनक्रिप्टेड स्वरूप में रखा जाता है। यहां रखी गई सभी जानकारियों को एक बड़े नेटवर्क के साथ सुरक्षित तरीके से साझा किया जा सकता है। 

इन कंपनियों में एसबीआई लाइफ इंश्योरेंस, मैक्स लाइफ इंश्योरेंस, बिरला सन लाइफ इंश्योरेंस, एचडीएफसी लाइफ, कोटक लाइफ, टाटा एआईए लाइफ आदि शामिल हैं। इसके पीछे विचार यह है कि किसी भी उपभोक्ता को अपनी पॉलिसी के नवीनीकरण या कोई नई पॉलिसी खरीदते समय किसी भी तरह की परेशानी का सामना ना करना पड़े। एसबीआई लाइफ इंश्योरेंस में परिचालन, आईटी और अंतरराष्ट्रीय कारोबार के अध्यक्ष आनंद पेजावर कहते हैं, ‘उपभोक्ताओं को सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि उन्हें बार बार अपनी जानकारियां नहीं देनी होंगी। साथ ही, यह हमें चुनौतियों को समझने तथा नीतियां बनाने मदद करेगा।’ इस परियोजना में सहयोगी तथा आईबीएम इंडिया और दक्षिण एशिया में ब्लॉकचेन परियोजना प्रमुख जीतन चंदनानी कहते हैं, ‘बीमा कंपनियां अभी यह निर्धारण कर रही हैं कि प्री-क्लेम और पोस्ट-क्लेम के लिए क्या क्या कागजात मांगे जाएं। हमें निजता और सुरक्षा का ध्यान रखते हुए यह प्लेटफॉर्म बनाने के लिए कहा गया है।’ एक बार भारतीय बीमा एवं विकास प्राधिकरण (आईआरडीए) से तकनीक के उपयोग की मंजूरी मिलने और इसके परिचालन में आने के बाद ग्राहक अगर किसी कंपनी से बीमा पॉलिसी खरीदते हैं तो उसके सारे दस्तावेज सर्वर पर जमा हो जाएंगे। अगर वही व्यक्ति किसी अन्य कंपनी से कोई दूसरी पॉलिसी खरीदता है तो उसके दस्तावेज को ब्लॉकचेन पर साझा किया जा सकता है। 

प्रत्येक कंपनी को ब्लॉकचेन पर एक सदस्य पहचान संख्या दी जाएगी। जब कोई कंपनी किसी व्यक्ति के रिकॉर्ड के लिए अनुरोध करेगी तो उसे एक ओटीपी भेजा जाएगा। इसके सत्यापन के बाद पहली कंपनी दूसरी कंपनी के साथ डेटा साझा करेगी। इस ब्लॉकचेन में 19 बीमा कंपनियों के साथ ही 2 अद्र्ध-नियामक संस्थाएं, जीवन बीमा परिषद और बीमा सूचना ब्यूरो (आईआईबी) भी शामिल रहेंगीं। 

हाल ही में आईआरडीए के समक्ष इस तकनीक का प्रदर्शन किया गया लेकिन अभी यह स्पष्ट नहीं है कि आईआरडीए भी ब्लॉकचेन का हिस्सा होगा या नहीं। पेजावर कहते हैं, ‘हमने जीवन बीमा परिषद और बीमा सूचना ब्यूरो को शामिल किया है, जिससे वे सूचनाओं का परीक्षण कर सकें। साथ ही, वे अद्र्ध-न्यायिक संस्था होने की भूमिका भी निभा पाएंगी।’ ब्लॉकचेन आईबीएम के पहले विचार का विस्तार है, जिसमें क्वेस्ट सॉफ्टवेयर के तहत एक्सल शीट पर आंकड़े साझा किए जाते थे। हालांकि इस व्यवस्था में सुरक्षा और उपभोक्ताओं की सहमति आदि को लेकर काफी समस्याएं थीं।

भारत में बीमा कारोबार काफी बड़ा है। मार्च 2018 तक भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) को छोडक़र 23 निजी संस्थाओं के 68.6 लाख सक्रिय ग्राहक थे। आईआरडीएआई की वेबसाइट के मुताबिक ये 68.6 लाख लोग 12.56 करोड़ भारतीयों की जिंदगी कवर करते हैं, जिनका प्रीमियम के तौर पर कुल राजस्व 593.14 अरब रुपये है। 

ब्लॉकचेन तकनीक की दूसरी खासियत है, प्रभावी रूप से धोखाधड़ी प्रबंधन। यहां उपभोक्ताओं का निजी डेटा साझा किया जाएगा और इसे बनाने में कॉग्निजेंट की सहायता ली जा रही है। इसके तहत, प्रत्येक कंपनी ग्राहकों का सारा डेटा साझा करेगी, जैसे, उनका पॉलिसी प्लान, बीमे की राशि, पॉलिसी खरीदते समय विफल होने की संख्या और दूसरी जानकारियां। मैक्स लाइफ इंश्योरेंस में वरिष्ठ निदेशक और सीओओ वी विश्वानंद कहते हैं, ‘अगर किसी भी कंपनी को धन-शोधन से जुड़ी गतिविधियों का पता चलता है यह उन्हें लगता है कि ग्राहक ने धोखाधड़ी करने के उद्देश्य से जानकारियां दी हैं तो यह जानकारी सीधे केंद्रीय सर्वर में जमा हो जाएगी और बाकी कंपनियों की पहुंच में होगी।’ केंद्रीय डेटाबेस ग्राहकों की धोखाधड़ी से जुड़ी जानकारियां रखेगा जो कॉग्निजेंट ब्लॉकचेन की खासियत होगी। 

ब्लॉकचेन में शामिल सभी को जानकारी होगी कि किसी दावे का निपटान हुआ या नहीं। साथ ही, किसी ग्राहक ने धोखाधड़ी का प्रयास तो नहीं किया। पेजावर कहते हैं कि पहले इस तरह की कोई जानकारी किसी एक सर्वर पर उपलब्ध नहीं थी और इसके बारे में अलग-अलग कंपनियों से पूछना होता था। ब्लॉकचेन ने दावा निपटान प्रक्रिया में इस दूरी को समाप्त कर दिया। उन्होंने कहा, ‘फर्जी दावे खुद ही समाप्त हो जाएंगें। इससे दावा निपटान लागत में भी कमी आएगी। साथ ही, ब्लॉकचेन पर डेटा को परिवर्तित नहीं किया जा सकता जिससे बीमा कंपनियों को नीति संबंधित काम में काफी आसानी होगी।’
Keyword: Block Chain, जीवन बीमा, Company, Investement, It Firm, IBM,
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