बिजनेस स्टैंडर्ड - वित्त वर्ष 2019 में 18 फीसदी से नीचे रहेगी आय
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वित्त वर्ष 2019 में 18 फीसदी से नीचे रहेगी आय

पुनीत वाधवा /  August 12, 2018

ओल्ड ब्रिज कैपिटल मैनेजमेंट के संस्थापक एवं मुख्य निवेश अधिकारी केनेथ एंड्रेड ने पुनीत वाधवा के साथ साक्षात्कार में बढ़ती ब्याज दरों और गहराते वैश्विक व्यापार युद्घ की पृष्ठïभूमि में इक्विटी बाजारों, आय और अपने पसंदीदा क्षेत्रों जैसे विभिन्न मुद्दों पर विस्तार से बताया। पेश हैं उनसे हुई बातचीत के मुख्य अंश:

सूचकांक अपने सर्वाधिक ऊंचे स्तर पर हैं। ऐसे में निवेश के लिहाज से अच्छे मौके तलाशना कितना मुश्किल हो गया है? 

हम लंबे समय से ऊंचे मल्टीपल वाले इस चक्र में बने हुए हैं। मूल्यांकन सस्ता नहीं है, राहत सिर्फ कुछ महीनों में गिरावट की वजह से दिखी है। मिड- और स्मॉल-कैप सेगमेंट में गिरावट आई है। इससे अवसर पैदा हुए। कुछ शेयर हाल में ऐसे मूल्यांकन पर पहुंचे हैं जो हमने कभी नहीं देखा। पोर्टफोलियो प्रबंधकों के लिए हमें सही मूल्यांकन वाले शेयर तलाशने के लिए ऐसे अवसरों (गिरावट) का इस्तेमाल करने की जरूरत है।

वर्ष 2018 में अब तक आपकी निवेश रणनीति क्या रही है?

हमारी रणनीति ऐसी बैलेंस शीट की तलाश करना है जिसमें मूल्यांकन सहज हो। इस रणनीति में हमने कोई बदलाव नहीं किया है। प्रतिफल देने वाले दो कारक अहम हैं- मूल्यांकन और कंपनियों की वृद्घि की रफ्तार। हमें ऐसी कंपनियों की तलाश करने की जरूरत है जो इन दोनों कारकों पर खरी साबित हों।  

लार्ज-कैप में ताजा तेजी कुछ शेयरों पर आधारित रही। क्या यह चिंताजनक है? 

पिछले साल छोटे शेयरों में भिन्नता देखने को मिली थी, इस साल इस रुझान में बदलाव आया है। निवेशकों को इन अल्पावधि बदलावों पर बहुत ज्यादा ध्यान देने की जरूरत नहीं है। 

क्या आप मान रहे हैं कि मिड- और स्मॉल-कैप अपने बड़े आकार के प्रतिस्पर्धियों के अनुरूप डटे रहेंगे?

हमें व्यवसायों के चयन के आधार पर ध्यान देने की जरूरत है। जहां छोटे व्यवसाय कम आधार की वजह से तेजी से बढ़ेंगे, वहीं अल्पावधि में वे कुछ समय महंगे दिख सकते हैं। 

वित्त वर्ष 2019 में कॉरपोरेट आय वृद्घि के लिए आपका क्या अनुमान है?

आय मिड-टींस यानी 18 प्रतिशत से नीचे रह सकती है। हम औद्योगिक और कुछ इन्फ्रा शेयरों को शामिल कर रहे हैं। हमारे पास ऐसे कुछ व्यवसाय हैं जो हमने 2017 से बरकरार रखे हैं और वे व्यापक ग्रामीण पहुंच वाले व्यवसाय हैं।

वर्ष 2018 में इन्फ्रा और हाउसिंग शेयर सरकार की निवेश योजनाओं के बावजूद पिछड़े हैं। इस बारे में आपका क्या 

कहना है?

इन्फ्रास्ट्रक्चर उचित मूल्यांकन पर उपलब्ध है। हम ऑर्डर बुकिंग और क्रियान्वयन दोनों में अच्छी तेजी देख रहे हैं। इससे यह एक अवसर है। हम सभी को अगले कुछ वर्षों के दौरान आय की निरंतरता पर ध्यान देने की जरूरत होगी। आवासीय क्षेत्र बेहद अव्यवस्थित बना हुआ है और मूल्य निर्धारण ताकत से वंचित है। 

अगले एक साल के दौरान आप आरबीआई से कितनी दर वृद्घि की उम्मीद कर रहे हैं? इस संदर्भ में निवेशकों के लिए आपका क्या सुझाव है?

हालांकि हम आरबीआई द्वारा दर वृद्घि की मात्रा नहीं बता सकते, लेकिन रुझान स्पष्ट हो गया है। इसका इक्विटी मूल्यांकन पर असर दिखा है। निवेशक के तौर पर हमें निचले पी/ई मल्टीपल को समायोजित करने की जरूरत होगी। 

क्या बाजार चुनाव के लिए तैयार है?

नहीं, इसके लिए बाजार अभी तैयार नहीं है। हमें चुनाव और चुनावी परिणाम के बाद बड़ी अस्थिरता का सामना करना होगा। सरकार लंबे समय तक ऊंचे राजकोषीय घाटे को बरकरार नहीं रख सकती। लेकिन जैसा कि इतिहास बताता है यह अहम चुनावी वर्ष होगा और सरकारी बैलेंस शीट मजबूत होगी। बाजार द्वारा तब तक कोई नकारात्मक प्रतिक्रिया दिए जाने की आशंका नहीं है जब तक इस खर्च को अगले वित्त वर्ष में नहीं ले जाया जाता। 

पीएसबी पर आपका क्या नजरिया है?

हालांकि हमने इस क्षेत्र में निवेश नहीं किया है, पर व्यापक नजरिये से पीसबी अपने चक्र के निचले स्तर पर हैं। कीमतों को लेकर ज्यादातर नकारात्मक खबरें कुछ समय से बनी हुई हैं। पीएसबी में हमेशा से कारोबार होता रहा है, लेकिन सवाल यह है कि क्या इसमें मुख्य मूल्यांकन फिर से मजबूत होगा? इस क्षेत्र की ज्यादातर कंपनियों ने दो दशकों से 10 प्रतिशत तक का पूंजी पर प्रतिफल (आरओई) दिया है। निजी क्षेत्र के बैंकों और एनबीएफसी पीएसबी की कमजोरी का लाभ उठाते हैं। 

क्या इन शेयरों के मूल्यांकन को देखते हुए कंजम्पशन थीम अपने वादे पर कायम है?

कंज्यूमर कंपनियों के शेयरों में मूल्यांकन कमजोर पड़ रहा है। लेकिन ये सेक्युलर ट्रेंड्स हैं और इनमें से कुछ शेयर कीमत गिरावट के बजाय समय-आधारित गिरावट का शिकार हुए हैं। 

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