बिजनेस स्टैंडर्ड - खाद्य तेल आयात से घरेलू उद्योग को क्षति
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खाद्य तेल आयात से घरेलू उद्योग को क्षति

दिलीप कुमार झा / मुंबई August 12, 2018

पड़ोस के गैर-उत्पादक देशों की ओर से वनस्पति तेल आयात के बदलते रुख ने भारत के स्थानीय खाद्य तेल उत्पादकों को परेशान कर दिया है। इसकी वजह से उनके सामने अपनी परिचालन क्षमता और रोजगार में कमी करने का गंभीर संकट पैदा हो गया है।

पिछले दो महीनों से भारत को मृदु तेल (सोयाबीन, सूरजमुखी और सफेद सरसों / सरसों का तेल) समेत खाद्य तेल आयात के रुख में तीव्र बदलाव नजर आया है। यह आयात दक्षिण एशियाई मुक्त व्यापार क्षेत्र (साफ्टा) के तहत शून्य शुल्क पर बांग्लादेश, श्रीलंका, नेपाल और भूटान से भारी मात्रा में किया जा रहा है। इससे पहले बड़ी मात्रा में पाम ऑयल (कच्चा पाम ऑयल या सीपीओ और परिष्कृत तेल या आरबीडी) का आयात सीधे इंडोनेशिया और मलेशिया से किया जाता था।

भारत के पड़ोसी देशों से मृदु तेल के इस बढ़ते आयात से न केवल ‘मूल देश के नियम’ का उल्लंघन होता है जिसमें साफ्टा के तहत 30 प्रतिशत का मूल्य संवर्धन अनिवार्य है बल्कि बिलों को घटा-बढ़ाकर दिखाने संबंधी व्यापार की अनुचित कार्यप्रणाली की भी आशंका बनी रहती है। हालांकि इस खतरे को रोकने के लिए घरेलू खाद्य तेल उत्पादकों ने केंद्रीय वित्त मंत्रालय के अधिकारियों से मुलाकात की और खाद्य तेल तथा वनस्पति तेल को नकारात्मक सूची में शामिल करने का निवेदन किया।

सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन (सी) के अध्यक्ष अतुल चतुर्वेदी ने कहा कि साफ्टा सदस्य देशों से रिफाइंड और वनस्पति तेल के सस्ते आयात से घरेलू रिफाइंड तेल के दाम गिर गए हैं जिसके परिणामस्वरूप घरेलू फसलों के दामों पर दबाव बन रहा है और इससे किसानों की आमदनी को नुकसान पहुंच रहा है। सरकार के सामने भी राजस्व हानि का खतरा है। इसलिए हम सरकार से सभी खाद्य तेल और वनस्पति तेल उत्पादों को नकारात्मक सूची में डालकर उनका आयात रोकने के लिए तत्काल कदम उठाने का आग्रह करते हैं।

विभिन्न राज्यों या क्षेत्रों में खाद्य तेल के वितरण और उसके लिए कोटा निर्धारित करने की जरूरत है ताकि किसी खास राज्य या क्षेत्र में आयात के दबाव को कम किया जा सके। जैसा कि पूर्व में श्रीलंका से वनस्पति तेल आयात रोकने के लिए किया गया था।

उद्योग की शीर्ष संस्था सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन द्वारा एकत्रित किए गए आंकड़े बताते हैं कि पिछले दो महीने के दौरान कुल आयात में गिरावट के बावजूद भारत के कुल वनस्पति तेल आयात में मृदु तेल का हिस्सा तेजी से बढ़ा है। मई और जून 2018 में कुुल मासिक वनस्पति तेल आयात क्रमश: 12.5 लाख टन और 10.1 लाख टन रहा। इस दौरान इसमें क्रमश: 60 प्रतिशत और 52 प्रतिशत का इजाफा हुआ। हालांकि इससे पिछले महीनों के दौरान भारत के वनस्पति तेल आयात में मृदु तेल की औसत हिस्सेदारी 32-33 प्रतिशत के बीच रही। 

दिलचस्प बात यह है कि इनमें से कोई भी देश मूल रूप से वनस्पति तेल का उत्पादक नहीं है। इस प्रकार व्यापारिक सूत्र न्यूनतम 30 प्रतिशत के अनिवार्य मूल्य संवर्धन के साथ मूल देश के नियमों के उल्लंघन की ओर इशारा करते हैं।

1 मार्च को भारत सरकार ने कच्चे पाम ऑयल पर शुल्क को 33 प्रतिशत से बढ़ाकर 48.4 प्रतिशत किया था। इसके बाद 14 जून को मृदु तेल पर भी शुल्क को बढ़ाकर 38.5 प्रतिशत कर दिया गया था। आयात शुल्क बढ़ोतरी का यह कदम सरकार द्वारा किसानों की मदद केलिए उठाया गया था क्योंकि इससेघरेलू कीमतों को मदद मिलती। लेकिन इसके बावजूद कई तिलहन के दामों में गिरावट आई। उदाहरण के लिए अप्रैल के बाद से सोयाबीन के दाम 6.4 प्रतिशत तक घटकर फिलहाल 3,538 रुपये प्रति क्विंटल पर चल रहे हैं। इस साल अप्रैल के बाद से सूरजमुखी बीज के दाम भी 3.7 फीसदी तक घटकर 3,900 रुपये प्रति क्विंटल पर चल रहे हैं।

Keyword: SAFTA, सोयाबीन, सूरजमुखी, Palm oil, RBD, Soft Oil, Oil,
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