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एथनॉल बचाएगा विदेशी मुद्रा

शाइन जैकब / नई दिल्ली August 10, 2018

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज कहा कि अगले 4 साल में एथनॉल मिश्रण कार्यक्रम से कम से कम 12,000 करोड़ रुपये की बचत होगी। दिल्ली में विश्व जैव ईंधन दिवस पर आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि भारत ने 2022 तक ईंधन में 10 प्रतिशत एथेनॉल मिलाने और 2020 तक इसे बढ़ाकर 20 प्रतिशत किए जाने का लक्ष्य रखा है। इससे देश के तेल आयात बिल में बचत होगी, जो कच्चे तेल बॉस्केट का मूल्य 65 डॉलर प्रति बैरल रहने पर 2017-18 में 24 प्रतिशत बढक़र 88 अरब डॉलर और 2018-19 में बढक़र 109 अरब डॉलर होने की उम्मीद है। 

यह ऐसे समय में हो रहा है, जब भारत 100 अरब रुपये के निवेश से 12 जैव ईंधन रिफाइनरी स्थापित करने की योजना बना रहा है,  सरकार ने एथेनॉल और बायोडीजल पर वस्तु एवं सेवा कर 18 प्रतिशत से घटाकर क्रमश: 15 प्रतिशत और 12 प्रतिशत कर दिया है। मोदी ने कहा कि 2022 तक भारत में एथेनॉल उत्पादन तीन गुना बढक़र 4.5 अरब लीटर हो जाएगा, जो अभी 1.41 अरब लीटर है। इस समय भरत अपनी ऊर्जा जरूरतें पूरी करने के लिए 80 प्रतिशत आयात पर निर्भर है। 

मोदी ने कहा कि इस समय एथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम से देश 40 अरब रुपये विदेशी मुद्रा बचा रहा है, जिससे हमारे पर्यावरण की भी रक्षा हो रही है। आगामी 12 रिफाइनरी सरकारी कंपनियों- एचपीसीएल (4), आईओसीएल (3), बीपीसीएल (3), एमआरपीएल (1) और नूमालीगिरि रिफाइनरी (1) की होंगी।   दूसरी तरफ निजी क्षेत्र की कंपनियां जैसे सीएमसी बायोरिफाइनरीज और जैब इनोगी 10-10 इकाइयां स्थापित कर रही हैं, जबकि केम पोलिस एक इकाई स्थापित करेगी। निजी क्षेत्र की कुछ अन्य कंपनियां भी 2022 तक इकाइयां स्थापित करने की प्रक्रिया में हैं। कुल 28 परियोजनाएं प्रस्तावित हैं, जिनमें से 16 निजी क्षेत्र की और 12 सरकारी हैं। 

मोदी ने मनमोहन सिंह के कार्यकाल पर निशाना साधते हुए कहा, ‘एथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम वाजपेयी सरकार के कार्यकाल में शुरू हुआ था। लेकिन पहले की सरकारों ने इसे गंभीरता से नहीं लिया।’ 

पेट्रोलियम मंत्रालय के अनुमान के मुताबिक भारत में जैव ईंधन कारोबार 2022 तक 500 अरब रुपये तक पहुंचने की संभावना है, जो अभी 60 अरब रुपये है। इस क्षेत्र में आगे और निवेश बढ़ाने के लिए सरकार व्यवहार्यता अंतर वित्तपोषण पर भी विचार कर रही है, जिससे आपूर्ति शृंखला में निवेश कर इस क्षेत्र को समर्थन दिया जा सके। साथ ही जैव ईंधन संयंत्र स्थापित करने वाली कंपनियों को 15-20 साल तक के लिए खरीद की गारंटी देने पर भी विचार किया जा रहा है। 
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