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जिंस सूचकांक डेरिवेटिव पर सेबी का विचार

राजेश भयानी / मुंबई August 10, 2018

भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) के चेयरमैन अजय त्यागी ने दो दिन पहले जारी एक सालाना रिपोर्ट में कहा, ‘सूचकांक उत्पादों के दिशानिर्देशों पर काम करने के अलावा कुछ और जिंस विकल्प अनुबंध शुरू करने की योजनाओं पर विचार किया जा रहा है।’

सेबी को सबसे पहले दिशानिर्देश बनाने होंगे। इन दिशानिर्देशों के आधार पर सूचकांक के सामान्य मानक बनाए जाएंगे। इसके बाद कारोबार से संबंंधित नियम बनेंगे। इस तरह सूचकांक आधारित डेरिवेटिव में वास्तविक कारोबार शुरू करने में लंबा समय लगेगा। विशेषज्ञों का कहना है कि जिंसों के लिए सूचकांक बनाना शेयरों की तुलना में सबसे ज्यादा जटिल है। शेयरों के कारोबार में ज्यादातर योगदान सूचकांक डेरिवेटिव और सूचकांक विकल्पों का है।

सूत्रों ने कहा कि दिशानिर्देशों में यह भी शामिल होगा कि कैसे सूचकांक के घटकों का भारांश और सूचकांक तैयार करने के तकनीकी मानक बनाए जाएंगे। उनमें से एक यह होगा कि एक घटक के रूप में सूचकांक में जिंस वे वास्तविक जिंस अनुबंध होंगे, जिनका कारोबार होता है। दूसरा यह एक वायदा कीमत सूचकांक होगा, न कि हाजिर कीमत सूचकांक। बेंचमार्क सूचकांक हाजिर कीमतों का होता है और उस पर वायदा का कारोबार होता है। 

इस सूचकांक का हिस्सा अनुबंध होंगे क्योंकि कच्चे तेल, अन्य ऊर्जा उत्पादों और यहां तक कि मूल और कीमती धातुओं की कीमतों में हलचल अंतरराष्ट्रीय कीमतों पर निर्भर करती है और भारत में घरेलू हाजिर कीमत निर्धारित करने का कोई अच्छा तरीका नहीं है। जब जिंस अनुबंध किसी सूचकांक का घटक है तो अनुबंध की एक्सपायरी पर रोल ओवर या नजदीकी महीने के अनुबंध की जगह एक्सपायर होने वाला अनुबंध लेता है और इसलिए एक्सपायरी के अंत में सूचकांक के मूल्य नजदीकी महीने के अनुबंध की कीमत के अंतर के आधार पर बदल जाते हैं।

दो दिग्गज एक्सचेंज एमसीएक्स और एनसीडीईएक्स के धातु, कृषि सूचकांकों और कंपोजिट जैसे विभिन्न खंडों के लिए अलग-अलग सूचकांक हैं। हालांकि भविष्य में उन्हें सेबी के सूचकांक नियमों एवं मानक पूरे करने होंगे। आम तौर पर इंटरनैशनल ऑर्गेनाइजेशन ऑफ सिक्योरिटीज कमीशन के सूचकांक मानकों का पालन करना होता है। शेयरों के मामले में सूचकांक में विभिन्न कंपनियों का भारांश तय करने का महत्त्वपूर्ण मानदंड कंपनी का बाजार पूंजीकरण और उनका फ्लोटिंग मार्केट कैप है। हालांकि जिंसों के लिए ऐसा ब्योरा नहीं होता है। उदाहरण के लिए गेहूं का बाजार पूंजीकरण या बाजार का आकार केवल अनुमानित है। गेहूं की विभिन्न कीमतें होती हैं और सभी किस्मों की गुणवत्ता के आधार पर अलग-अलग कीमतें होती हैं और फसल के उत्पादन के आधार पर कीमतों में बदलाव होता रहता है। फसल के अंतिम अनुमान देर से आते हैं। 

अगर बाजार पूंजीकरण का अनुमान फसल उत्पादन को एमएसपी से गुणा कर लगाया भी जाता है तो यह सही संकेतक नहीं होगा क्योंकि सभी जिंसों के दाम एमएसपी से कम या अधिक होते हैं। अगर किसी तरह डेटा का कोई मानक भी तैयार किया जाए तो उस जिंस में जिंस एक्सचेंज पर कारोबार अन्य जिंसों से कमजोर रह सकता है। सेबी वायदा बाजार की कीमतों को इस्तेमाल करने की संभावना के बारे में विचार कर रहा है।

एमसीएक्स ने थॉमसन रॉयटर्स द्वारा तैयार कंपोजिट सूचकांक सहित नए सूचकांक शुरू किए हैं। ये सूचकांक  मूल धातुुओं, सराफा, सोने के लिए एकल जिंस सूचकांक, तांबा, एवं कच्चा तेल और कंपोजिट सूचकांक हैं। कंपोजिट सूचकांक सभी सक्रिय रूप से कारोबार वाली जिंसों के लिए है। इसका तरीके के दो मापदंड हैं, जो भौतिक बाजार आकार और एक्सचेंज पर उस अनुबंध के लेनदेन की मात्रा है। एक कंपोजिट सूचकांक में फिजिकल बाजार के आकार और लिक्विडिटी के लिए अधिकतम सीमा तय करनी होती है। 

उदाहरण के लिए अगर एक्सचेंज पर अत्यधिक लिक्विड जिंस आकार में छोटी है तो उसके लिक्विडिटी घटक की एक सीमा तय की जाएगी और कच्चे तेल जैसी जिंस पर फिजिकल बाजार के आकार जैसी सीमा लगाई जाती है। एमसीएक्स का थॉमसन रॉयटर्स सूचकांक आईओएससीओ के नियमों का पालन करता है। हालांकि एमसीएक्स के कंपोजिट सूचकांक में केवल दो कृषि जिंस हैं, जिनका कुल भारांश 5 फीसदी से भी कम है। इसमें कच्चे तेल का भारांश सबसे अधिक 35 फीसदी है। इसलिए यह सूचकांक भले ही कारोबारी दुनिया में एमसीएक्स का प्रतिनिधित्व करे, लेकिन भारत के जिंस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व नहीं करता है। 
Keyword: एमसीएक्स, एनसीडीईएक्स, MCX, NCDEX, SEBI, Ajay tyagi, index, share market,
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