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बैंकों के निजीकरण की वकालत

इंदिवजल धस्माना / नई दिल्ली August 08, 2018

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने भारत को व्यापक वित्तीय जोखिमों को लेकर सावधान किया है, जो सरकार के मालिकाना वाले बैंकों की ओर से आया है। आईएमएफ ने सुझाव दिया है कि भारत को इन बैंकों के तेजी से विनिवेश और निजीकरण पर विचार करना चाहिए। साथ ही वस्तु एवं सेवा कर की तारीफ करते हुए आईएमएफ ने दो कर ढांचे की सिफारिश की है। 

आईएमएफ ने भारत के लिए पेश की गई अपनी रिपोर्ट में कहा है कि व्यवस्थित व्यापक वित्तीय जोखिम मौजूद है क्योंकि कमजोर कर्ज चक्र वृद्धि को प्रभावित कर सकता है और ‘सॉवरिन बैंक नैक्सस’ ने अति संवेदनशील स्थिति पैदा की है। आईएमएफ ने प्रशासनिक सुधार की समग्र योजना, आंतरिक नियंत्रण और सरकारी बैंकों के परिचालन सहित सार्वजनिक मालिकाना तेजी से वापस लेने पर जोर दिया है। 

आईएमएफ ने कहा, ‘सरकारी बैंकों के और ज्यादा आक्रामक विनिवेश और निजीकरण से प्रशासन की कुछ ढांचागत समस्याएं दूर होंगी।’ इसमें कहा गया है कि पंजाब नैशनल बैंक में 14,300 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी की गई, सरकारी बैंकों में सुधार के लिए आगे और कदम उठाने होंगे।

इसमें कहा गया है, ‘हाल में सरकारी बैंक में बड़े पैमाने पर धोखाधड़ी से वित्तीय क्षेत्र की कमजोरियों का पता चलता है और यह सरकारी बैंकों व उनके परिचालन में और ज्यादा कदम उठाए जाने की जरूरत को रेखांकित करता है।’ राजकोषीय जोखिम पर जोर देते हुए आईएमएफ ने कहा है कि सरकारी बैंकों के पुनर्पूंजीकरण की अक्टूबर 2017 में घोषणा की गई, जिसकी वजह से सार्वजनिक ऋण से जीडीपी पर कम से कम 0.8 प्रतिशत असर होगा। इसमें कहा गया है, ‘मूल्यांकन पर दबाव से सरकार की इस उम्मीद को पूरा करना कठिन हो सकता है कि पीएसबी अगले दो साल में बाजार से जीडीपी का 0.3 प्रतिशत जुटा लेंगे।’

आईएमएफ ने  वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) लागू किए जाने की तारीफ की है, लेकिन कहा है कि इसको और सरल बनाकर 2 दरें तय की जानी चाहिए। सूत्रों ने कहा कि राजस्व पर विचार करते हुए इस साल यह होने की उम्मीद कम है। आईएमएफ के कार्यकारी निदेशकों द्वारा तैयार की गई रिपोर्ट में कहा गया है कि जीएसटी की अनिश्चितता को लेकर जांच किए जाने की जरूरत है। रिपोर्ट में कहा गया है, ‘राज्यों को अतिरिक्त हस्तांतरण से केंद्र सरकार का घाटा बढ़ सकता है और इसके लिए आगे और राजकोषीय कदम उठाना जरूरी हो सकता है। 

फंड के भारत के मिशन प्रमुख रनिल सलगाडो ने भारत की अर्थव्यवस्था को हाथी की तरह बताया है, जिसमे अभी दौडऩा शुरू किया है। 2018-19 में भारत की आर्थिक वृद्धि दर 7.3 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया गया है, जो बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में सबसे तेज विस्तार है। भारत को यह तमगा 2017-18 में गंवाना पड़ा था जब वृद्धि दर 4 साल के न्यूनतम स्तर 6.7 प्रतिशत पर थी। 

बहरहाल तिमाही आधार पर देखें तो भारत ने फिर वापसी की है। 2018-19 की पहली तिमाही के जीडीपी के आंकड़े इस महीने के  आखिर में आ  सकते हैं, जो पिछले साल के कम आधार की वजह से ज्यादा रह सकते हैं। इसके पहले जीएसटी लागू होने और नोटबंदी का अर्थव्यवस्था पर विपरीत असर पड़ा था। कुल मिलाकर तेल के ज्यादा दाम के बावजूद 2018-19 में भारत की वृद्धि दर सकारात्मक और आईएमएफ के 7.3 प्रतिशत के अनुमान के आसपास रहने की उम्मीद है। फंड के मुताबिक वैश्विक वृद्धि में भारत की हिस्सेदारी करीब 15 प्रतिशत है। 
Keyword: IMF, Bank, Banking, PSB, privatization, PNB, Fund, GST,
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