बिजनेस स?टैंडर?ड - एम करुणानिधि की पांच प्रमुख सामाजिक आर्थिक नीतियां
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एम करुणानिधि की पांच प्रमुख सामाजिक आर्थिक नीतियां

शिवांश जौहरी /  08 07, 2018

स्‍मृति शेष : मुतुवेल करुणानिधि

बिजनेस स?टैंडर?ड एम करुणानिधि की पांच प्रमुख सामाजिक आर्थिक नीतियांवरिष्ठ राजनेता और द्रविड़ मुन्नेत्र कषगम (द्रमुक) के शीर्षस्थ नेता एम करुणानिधि ने हाल ही में द्रमुक अध्यक्ष के रूप में अपने कार्यकाल के 50वें वर्ष में प्रवेश किया था। इसके साथ ही किसी भी राजनीतिक दल के अध्यक्ष पद पर सबसे लंबे समय तक बने रहने का रिकॉर्ड उनके नाम दर्ज हो गया था। पांच बार तमिलनाडु के मुख्यमंत्री रह चुके करुणानिधि अपने दौर के दिग्गज पटकथा लेखक थे और अपना अधिकांश समय राज्य की राजनीति में देने के बावजूद वह सन 2011 तक कला के क्षेत्र में सक्रिय रहे। 

कहने की आवश्यकता नहीं है कि अपने पांच दशक लंबे राजनीतिक जीवन में करुणानिधि ने अच्छे से अच्छा और बुरे से बुरा वक्त देखा। सन 1969 में अन्नादुरई के निधन के बाद राज्य का मुख्यमंत्री बनने से लेकर एमजी रामचंद्रन के एडीएमके (अब अन्नाद्रमुक) बनाकर उनसे अलग हो जाने तक और चिर प्रतिद्वंद्वी जयललिता के हाथों पराजय के बाद विपक्ष में बैठने तक करुणानिधि के बारे में काफी कुछ कहा-सुना जा सकता है। उनकी सामाजिक-आर्थिक नीतियों ने उन्हें तमिलनाडु की राजनीति में एक बहुत बड़ी ताकत के रूप में स्थापित किया। वह अपनी कल्याणकारी योजनाओं के साथ आम लोगों के करीब हुए और साथ ही साथ उन्होंने तमिलनाडु को देश के सबसे औद्योगीकृत राज्यों में से एक बनाने की राह आसान की। आइए देखते हैं उनके पांच कार्यकालों की अपनाई गई कुछ प्रमुख पहल के बारे में:

सन 1969-71 और 1971-1976 

पारिवारिक लाभ फंड योजना

तमिलनाडु सरकार की सर्वेंट्स फैमिली बेनिफिट फंड स्कीम, को बाद में तमिलनाडु गवर्मेंट सर्वेंट्स फैमिली सिक्युरिटी फंड स्कीम का नाम दिया गया। सन 1975 में इसका विस्तार स्थानीय निकायों के कर्मचारियों और सरकारी सहायता प्राप्त सरकारी शिक्षण संस्थानों के शिक्षण-गैर शिक्षण कर्मचारियों तक किया गया। इस योजना का लक्ष्य यह था कि अगर स्थायी अपंगता और चिकित्सकीय वजह से अनफिट होने पर किसी कर्मचारी का रोजगार चला जाए तो उसके परिजन को वित्तीय लाभ प्रदान किया जा सके। यह योजना 1984 में समूह बीमा योजना के आगमन के बाद बंद कर दी गई। 

औद्योगिक वृद्धि

सन 1965 में तमिलनाडु लघु उद्योग निगम लिमिटेड की स्थापना की गई। इसके गठन का उद्देश्य था उद्योग एवं वाणिज्य मंत्रालय द्वारा स्थापित लघु उद्योग इकाइयों का अधिग्रहण करना। सन 1969 तमिलनाडु इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (टीआईडीसीओ) और एम एक चिदंबरम समूह के संयुक्त उपक्रम के रूप में सदर्न पेट्रोकेमिकल इंडस्ट्रीज कॉर्पोरेशन लिमिटेड (एसपीआईसी) की स्थापना की गई। कंपनी का काम काफी विविधता लिए हुए है और वह उर्वरक, औषधि और पेट्रोकेमिकल समेत कई क्षेत्रों में सक्रिय है। सन 1973 में सेलम में एक विशेष इस्पात संयंत्र की स्थापना की गई। यह भारतीय इस्पात प्राधिकरण लिमिटेड (सेल) का एक अंग है। 

सन 1996-2001

किसान बाजार (उझावर सांधाई)

उझावर सांधाई एक ऐसी योजना है जिसका लक्ष्य बिचौलियों को खत्म करना और किसानों और उपभोक्ताओं के बीच संपर्क मजबूत करना है। इससे किसानों को अपनी फसल के बेहतर दाम हासिल करने में मदद मिली। इस योजना का नियमन तमिलनाडु राज्य कृषि विपणन बोर्ड करता है। एआईएडीएमके सरकार ने 2001 में इस योजना को बंद कर दिया था लेकिन द्रमुक सरकार ने 2006 में एक बार फिर इसे शुरू कर दिया। 2011 में पुन: सत्ता में आने पर एआईएडीएमके ने इस योजना को जारी रखा। दिसंबर 2009 में करीब 265,671 किसानों ने बाजार का रुख किया और 60,501 टन फल और सब्जियां बेचीं। किसानों के लाभ के लिए एक ऐप भी शुरू किया गया है। 

जीवन रक्षक उपचार के लिए कलईगनार बीमा योजना 

जीवन रक्षक उपचार के लिए कलइगनार बीमा योजना की शुरुआत की गई। यह योजना उन परिवारों के लिए है जिनकी सालान आय 72,000 रुपये से कम हो। आज इसके दायरे में एक करोड़ लोग आते हैं। 

अन्ना मारुमलारची योजना

अनैतु ग्राम अन्ना मरुमलारची तित्तम केंद्र सरकार द्वारा प्रायोजित और राज्य की फंडिंग वाली ग्रामीण विकास योजना है। इसके तहत करुणानिधि की सरकार ने 2500 ग्राम पंचायतें विकसित करने का लक्ष्य रखा। इसके अलावा विश्वविद्यालय स्थापित किए गए और राजमार्ग तथा फ्लाईओवर निर्मित किए गए। इस दौरान नौ जिलों में कलेक्टरेट के नए भवन बनाए गए। चेन्नई के कोयंबेडु में बस टर्मिनल का निर्माण किया गया जो एशिया का सबसे बड़ा बस अड्डा है। 

सन 2006-2011

सन 2001 में जे जयललिता द्वारा सत्ता से हटाए जाने के बाद करुणानिधि 2006 में सत्ता में लौटे। बतौर मुख्यमंत्री अपने पांचवे कार्यकाल में उन्होंने एक अत्यंत साहसी और लोकप्रिय योजना प्रस्तुत की। योजना के तहत गरीबों को एक रुपये प्रति किलो की दर पर चावल दिया गया। उन्होंने विशेष सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत सब्सिडी पर पाम ऑयल, लाल चना, काला चना, सूजी, मैदा और आटा देने की योजना भी शुरू की। 

उनकी स्वास्थ्य योजनाओं में गर्भवती स्त्रियों को वित्तीय सहायता देने की योजना भी शामिल थी। इस योजना को जयललिता का भी समर्थन मिला। वरुमुन कप्पोम तित्तम योजना के तहत राज्य में कई स्वास्थ्य शिविर आयोजित किए गए। इनसे राज्य की आबादी का बड़ा हिस्सा लाभान्वित हुआ।

 
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