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बाजार में तेजी लेकिन सुधार का रुझान कम

देवांग्शु दत्ता /  08 07, 2018

अच्छी आय की रिपोर्ट, उदार फेडरल रिजर्व और कच्चे तेल की कीमतों में स्थिरता, ये तमाम खबरें बाजार के लिए सकारात्मक खबर लेकर आई हैं। मोतीलाल ओसवाल के एक अध्ययन के अनुसार पहली तिमाही के नतीजे बताते हैं कि अध्ययन में शामिल 105 कंपनियों में से 62 ने आय के अनुमान हासिल किए या उसे पीछे छोडऩे में कामयाब रहीं। प्रमुख केंद्रीय बैंक मसलन बैंक ऑफ जापान, यूरोपियन सेंट्रल बैंक और अमेरिकी फेडरल रिजर्व आदि ने अपनी नवीनतम नीतिगत समीक्षा में नीतिगत दरों को स्थिर रखा। इसका परिणाम कमजोर अमेरिकी डॉलर के रूप में सामने आया। फेडरल रिजर्व ने संकेत दिया कि वह शायद सितंबर में दरों में इजाफा करेगा और यूरोपियन केंद्रीय बैंक दिसंबर तक दरें नहीं बढ़ाएगा। फेडरल रिजर्व चरणबद्घ ढंग से सख्ती भी करेगा। यूरोपियन केंद्रीय बैंक भी यह प्रक्रिया जारी रखेगा। दिसंबर तक काफी मात्रा में नकदी तंत्र से बाहर हो जाएगी। 

रिजर्व बैंक ने दरों में 0.25 फीसदी का इजाफा किया। पिछले पखवाड़े केंद्रीय बैंक ने जो नीतिगत मशविरे पेश किए वे रुपये को कुछ हद तक अस्थायी राहत देंगे। कच्चे तेल की कीमतें कुछ कम स्तर पर स्थिर हुई हैं। वह भी राहत की बात है। व्यापारिक युद्घ और जोर पकड़ेगा। अमेरिका का कहना है कि वह 500 अरब डॉलर से अधिक के चीनी आयात पर शुल्क दर में 25 फीसदी का इजाफा करेगा। चीन भी इसका जवाब देगा। भारत और अमेरिका पहले ही एक दूसरे की वस्तुओं पर शुल्क वृद्घि में उलझे हुए हैं। सस्ता चीनी स्टील भारत में वैकल्पिक बाजार तलाश कर रहा है। 

वाणिज्यिक बैंकों से यह अपेक्षा की जा रही है कि वे आवास ऋण तथा वाहन ऋण बढ़ाएंगे और बॉन्ड बाजार के प्रतिफल में इजाफा होगा। बॉन्ड बाजार महीनों से मंदी के दौर का शिकार है। म्युचुअल फंड की आवक बता रही है कि मध्यम और दीर्घावधि के डेट अब अल्पावधि के मुद्रा बाजार फंड में अधिक निवेश कर रहे हैं। मॉनसून को लेकर अब तक स्थिति स्पष्ट नहीं है। मौसम का अनुमान लगाने वाली निजी कंपनी स्काईमेट का कहना है कि अगस्त में बारिश कम होगी। भारतीय मौसम विभाग का कहना है कि सामान्य बारिश होगी। खरीफ की बुआई की सफलता इस पर काफी हद तक निर्भर है। 

जुलाई में वृद्घि के शुरुआती संकेतक मिलाजुला रुझान दे रहे हैं। निक्केई-पीएमआई का सेवा क्षेत्र का सूचकांक अत्यंत मजबूत वृद्घि दर्शाता है। इसकी वृद्घि अक्टूबर 2016 के बाद के उचतम स्तर पर है। जुलाई 2018 में यह दर 54.2 रही जबकि माह दर माह आधार पर 50 के ऊपर की पीएमआई वृद्घि विस्तार का संकेत देती है। विनिर्माण क्षेत्र की पीएमआई में गिरावट आई है। यह जून के 53.1 से कम होकर 52.3 रह गई। इसके बावजूद यह लगातार 12वें महीने विस्तारवादी रुख पर नजर आई। जुलाई में वाहनों की बिक्री जरूर गिरावट का संकेत दे रही है। हालांकि वाहन निर्माताओं द्वारा डिस्पैच में कमी और जीएसटी का शुरुआती असर भी इस पर नजर आ रहा है। यही वजह है कि हमें कई महीनों की वाहन बिक्री को मिलाकर इस क्षेत्र का वास्तविक रुझान प्राप्त हो सकेगा। 

पिछले 13 महीनों से जीएसटी संग्रह में 0.5 फीसदी मासिक की दर से इजाफा हुआ है। 7 फीसदी से अधिक की जीडीपी वृद्घि दर और 3.5 से 4.5 फीसदी की मुद्रास्फीति के अनुमान के साथ तो यह आंकड़ा काफी कमजोर नजर आ रहा है। बीते एक पखवाड़े में रिलायंस इंडस्ट्रीज के लिए दो अहम बातें घटित हुईं। इनका कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से कोई सीधा संबंध नहीं है, हालांकि वह रिफाइनिंग के मार्जिन में सुधार लाने में मददगार होगा। पहले तो सर्वोच्च न्यायालय ने आरकॉम और एरिक्सन इंडिया के बीच विवाद निस्तारण को मंजूरी दे दी। इसके तहत आरकॉम ने इस उपकरण निर्माता कंपनी को 5.5 अरब रुपये की राशि चुकाने की प्रतिबद्घता जताई। इसके बाद आरकॉम अपनी संपत्ति रिलायंस जियो को बेच सकती है। यह बात अंबानी बंधुओं के लिए लाभदायक रहेगी। इससे आरकॉम को अपने 420 अरब रुपये की राशि का बकाया निपटाने में मदद मिलेगी। 

आरआईएल के लिए दूसरी महत्त्वपूर्ण घटना थी एक अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता पंचाट द्वारा यह निर्णय सुनाना कि रिलायंस को केजीडी-6 क्षेत्र में गैस खनन के लिए ओएनजीसी को कोई राशि नहीं चुकानी है। अंतरराष्ट्रीय पैनल ने उलटा यह निर्णय दिया कि 83 लाख डॉलर की राशि आरआईएल और उसके साझेदारों बीपी एलएलसी तथा निको रिसोर्सेज लिमिटेड को चुकाई जाए। सरकार ने 1.55 अरब डॉलर के जुर्माने की मांग की थी और शायद वह इस निर्णय के खिलाफ अपील भी करेगी।

एक अन्य विवाद में देश की आईटी दिग्गज कंपनी विप्रो ने अमेरिका की ऊर्जा कंपनी नैशनल ग्रिड को 7.5 करोड़ डॉलर की राशि चुका कर एक विवाद का निपटारा किया। इस समझौते के बाद विप्रो पर कोई जवाबदेही बकाया नहीं रही और उसे कोई गलती करने वाला भी नहीं माना जाएगा। हालांकि मौजूदा तिमाही में कंपनी के मुनाफे पर इसका असर हो सकता है। 

इन तमाम बातों के बीच बाजार में तेजी का रुख बरकरार है। इसके लिए आंशिक तौर पर विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों का रुख बदलना भी जिम्मेदार है। वे विशुद्घ विक्रेता से खरीदार में तब्दीली कर रहे हैं। स्मॉल कैप और मिड कैप शेयर पिछड़े हुए हैं। इस समय मूल्यांकन भी ऐतिहासिक ऊंचाई पर हैं। तकनीकी ढंग से देखें तो एक नए क्षेत्र के बाजार के लिए लक्ष्य तय करना आसान काम नहीं है। परंतु हम ऐतिहासिक आंकड़ों से यह जानते हैं कि सीमित बाजार लंबे समय तक टिकता भी नहीं है। 

Keyword: NSE, BSE, Share market, crude oil, Federal reserve, बैंक ऑफ जापान, यूरोपियन सेंट्रल बैंक,
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