बिजनेस स्टैंडर्ड - ‘ज्यादा नहीं चलेगा अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक गतिरोध’
 Search  BS Hindi  Web   BS E-Paper|      Follow us on 
Business Standard
Monday, December 09, 2019 05:45 AM     English | हिंदी

होम

|

बाजार

|

कंपनियां

|

अर्थव्यवस्था

|

मुद्रा

|

विश्लेषण

|

निवेश

|

जिंस

|

क्षेत्रीय

|

विशेष

|

विविध

|

अर्थनामा

 
होम बाजार खबर

‘ज्यादा नहीं चलेगा अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक गतिरोध’

अद्वैत राव पालेपू /  August 06, 2018

विश्व बैंक के पूर्व मुख्य अर्थशास्त्री कौशिक बसु का मानना है कि इस समय चल रहा आर्थिक गतिरोध जल्द दूर हो जाएगा। अगर इसे लेकर युद्ध की स्थिति आती है तो वैश्विक आर्थिक मंदी आ सकती है। अद्वैत राव पालेपू के साथ बातचीत के संपादित अंश: 

वैश्विक व्यापार युद्घ और मुद्रा युद्घ को लेकर आप क्या सोचते हैं? 

अंतरराष्ट्रीय परिदृश्य चिंताजनक बनी हुई है, लेकिन मैं मानता हूं कि यह गतिरोध लंबा नहीं चलेगा। यदि पूर्ण रूप से आयात शुल्क को लेकर युद्घ की स्थिति बनती है तो वैश्विक आर्थिक मंदी की स्थिति आ जाएगी और अमेरिका की वृद्घि दर चीन से कम रह जाएगी। इस मंदी का कुछ असर भारत पर भी होगा। अमेरिका ने जिस तरह से कनाडा, यूरोप और मैक्सिको के साथ व्यापार को लेकर शत्रुता मोल ली है, इससे चीन इन देशों के करीब आएगा और यह दीर्घावधि में चीन को बोनस देने जैसा होगा।

क्या हम रुपये पर पडऩे वाले वैश्विक मुद्रा युद्घ के प्रभाव से निपटने के लिए तैयार हैं? 

मुद्रा के मूल्य में थोड़ी गिरावट आने भारत बेहतर प्रदर्शन करेगा। आदर्श रूप में, आप उसे भारतीय नीति निर्माताओं के प्रबंधन के तहत पाना चाहेंगे न कि एक उप उत्पाद के तौर पर। लंबे समय से रुपया मजबूत बना हुआ था केवल पिछले कुछ महीनों के दौरान इसमें गिरावट देखी जा रही है। यदि भारतीय रुपये के मूल्य में मामूली गिरावट होती है तो यह देश के लिए अच्छा होगा। आदर्श तौर पर हम चाहेंगे कि भारतीय रिजर्व बैंक और वित्त मंत्रालय इस मूल्य गिरावट का प्रबंधन करे।

अगले लोकसभा चुनाव को देखते हुए केंद्र और राज्य सरकारें लोकलुभावन घोषणाएं कर सकती हैं। क्या इससे वित्तीय घाटा और बढ़ेगा? 

वित्तीय घाटा हर प्रकार से बजट में अनुमानित सीमा से अधिक होगा। चुनावी समय बहुत ही जोखिम भरा होता है। क्योंकि ऐसे समय में सरकार का ध्यान कुछ महीनों के लिए अच्छा दिखने पर होता है, लेकिन उसी दौरान आने वाले समय के लिए समस्याओं का अंबार लग रहा होता है। लेकिन मैं समझता हूं देश की जनता अब इस बात को समझने लगी है।

बढ़ते उपभोग और 2017-18 के लिए जीडीपी वृदि दर 6.7 प्रतिशत को देखते हुए अब नोटबंदी के प्रभाव को कैसे आंकते हैं? 

किसी भी पैमाने पर देखें तो नोटबंदी एक खराब आर्थिक निर्णय था और देश को इसके लिए भारी कीमत चुकानी पड़ी है। मैं समझता हूं कि यदि वह फैसल नहीं लिया जाता तो आज भारत की जीडीपी वृद्घि दर और भी अधिक होती। नोटबंदी के दो वर्ष बाद आज सभी सूचक बता रहे हैं कि वृद्घि दर एक बार फिर से लडख़ड़ाने लगी है। सबसे बुरी स्थिति अनौचारिक क्षेत्र की है और किसान की परेशानी जारी है।  

सरकारें बढ़ती आमदनी और आर्थिक गैर-बराबरी को गंभीरता से क्यों नहीं लेती है?

भारत में भी हम देखते हैं कि वृद्घि दर का लाभ 1 प्रतिशत में से शीर्ष 1 प्रतिशत लोगों के पास ही जा रहा है। 1990 से यह स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है जिसका अर्थ है देश की कुल आबादी में शीर्ष 1 प्रतिशत लोगों की संपत्ति में लगातार इजाफा हो रहा है। यदि यही स्थिति आगे जारी रही थी वह दिन दूर नहीं जब समाज अराजक हो जाएगा। 
Keyword: world bank, trade war, tariff war, US, China,
Advertisements
  Cover from Earthquake & Floods. Buy Home Insurance
   Get seamless access to Business Standard & WSJ.com starting at just Rs. 49/- per month*
Display Name  Email-Id  
Post your comment

CAPTCHA Image Reload Image Enter Code*:

स्मार्ट इंवेस्टर

लागत दबाव से वेदांत की समस्याएं बरकरार

Investmentsधातु कीमतों पर दबाव की वजह से पिछले एक साल के दौरान प्रमुख सूचकांकों से

आईसीआईसीआई बैंक की स्थिति में सुधार

निवेशकों को भा रहा इंडसइंड बैंक

मजबूत रियल्टी शेयरों में आएगी तेजी

एमएमसीजी शेयरों से न रखें अधिक आस

आगे पढ़े
पढ़िये
ईमेल
About us Authors Partner with us Jobs@BS Advertise with us Terms & Conditions Contact us RSS Site Map  
Business Standard Private Ltd. Copyright & Disclaimer feedback@business-standard.com
This site is best viewed with Internet Explorer 6.0 or higher; Firefox 2.0 or higher at a minimum screen resolution of 1024x768
* Stock quotes delayed by 10 minutes or more. All information provided is on "as is" basis and for information purposes only. Kindly consult your financial advisor or stock broker to verify the accuracy and recency of all the information prior to taking any investment decision. While due diligence is done and care taken prior to uploading the stock price data, neither Business Standard Private Limited, www.business-standard.com nor any independent service provider is/are liable for any information errors, incompleteness, or delays, or for any actions taken in reliance on information contained herein.