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भारतीय बाजार में 10 फीसदी की और उछाल मुमकिन

पुनीत वाधवा /  August 06, 2018

भारतीय बाजार में रिकॉर्ड तेजी आई है और यह कैलेंडर वर्ष 2018 में अब तक वैश्विक स्तर पर शानदार प्रदर्शन करने वाले बाजारों में शामिल हो गया। मोबियस कैपिटल पार्टनर्स के सह-संस्थापक मार्क मोबियस ने पुनीत वाधवा को दिए साक्षात्कार में कहा कि निवेशकों को तेजी के बजाय वैल्यू पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए और लार्ज-कैप के बजाय मजबूत छोटी और मझोली कंपनियों पर दांव लगाना चाहिए। पेश हैं बातचीत के मुख्य अंश:

भारतीय रिजर्व बैंक ने पिछले सप्ताह ब्याज दरें बढ़ाई हैं। इस पर आपका अलग नजरिया है। आप अगले 6-12 महीनों के दौरान भारतीय और अमेरिकी केंद्रीय बैंकों से नीतिगत बदलावों की उम्मीद क्यों कर रहे हैं?

अमेरिकी फेडरल रिजर्व (यूएस फेड) निश्चित तौर पर ब्याज दरें बढ़ाएगा। उनका मानना है कि बढ़ती महंगाई को नियंत्रित करने के लिए यही तरीका है। रोजगार दर भी मजबूत है। मुद्रास्फीति का सच्चा वाहक पारिश्रमिक है। इसलिए, अगर वह सिद्घांत सही है तो अमेरिकी फेडरल दरें बढ़ाना चाहेगा। मेरा मानना है कि दर वृद्घि भविष्य में लगातार होगी। अल्पावधि में दरें 4 से 5 फीसदी तक बढ़ सकती हैं। लेकिन भारत में हालात मेरे हिसाब से चिंताजनक हैं। इसलिए मेरा मानना है कि आरबीआई को दरें नहीं बढ़ानी चाहिए, क्योंकि इससे आर्थिक विकास पर दबाव पड़ता है। मेरा मानना है कि केंद्रीय बैंक को रुपये में उतार-चढ़ाव को लेकर बहुत ज्यादा चिंतित नहीं होना चाहिए और उसके बजाय मुद्रास्फीति के प्रभाव पर ध्यान दिया जाना चाहिए। 

अगले एक साल के दौरान विकसित और उभरते बाजारों को लेकर आपका क्या नजरिया है?

जैसा कि मैं देख रहा हूं, उभरते बाजार सुधार की ओर बढ़ेंगे और हम कुछ मामलों में इस तरह का रुझान पहले ही देख चुके हैं। कई उभरते बाजार आकर्षक दिख रहे हैं। भारत इसका अच्छा उदाहरण है, जहां हम भविष्य में शेयर-आधारित अवसर तलाश सकते हैं। हम ऐसे मोड़ पर हैं जहां उभरते बाजारों में सुधार दिखना शुरू हो गया है। भारतीय बाजारों ने काफी अच्छा प्रदर्शन किया है और इनमें अभी और तेजी की संभावना बरकरार है।

अब आप भारतीय सूचकांकों में कितनी तेजी की उम्मीद कर रहे हैं? 

भारतीय बाजारों ने 2009 में निचले स्तर के निकलने के बाद से अच्छा प्रदर्शन किया है। मेरा मानना है कि हम मौजूदा स्तर से बाजार में और 10 फीसदी की तेजी दर्ज करेंगे। हालांकि मुख्य रूप से पूरे सूचकांक पर विचार करने के बजाय कुछ खास शेयरों पर ध्यान रहेगा। अगर आप पूरे सूचकांक पर विचार करते हैं तो यह सर्वाधिक ऊंचाई पर है, लेकिन खास शेयर आकर्षक दिख सकते हैं। ब्याज दरों में तेजी के प्रभाव को छोडक़र, भारतीय बाजार भविष्य में मजबूत बने रहें।
हालिया तेजी कुछ शेयरों की वजह से आई है। क्या आप इसे लेकर चिंतित हैं?

हां, यह सही है। न सिर्फ भारत, बल्कि दुनिया के अन्य हिस्सों में भी यह इस संदर्भ में चिंता का विषय है कि एक्सचेंज-टे्रडेड फंड (ईटीएफ) काफी लोकप्रिय हुए हैं। मूल चिंता यह है कि ये लार्ज-कैप शेयर प्रभावित हो सकते हैं और पूरे सूचकांक पर इसका असर दिख सकता है, जिससे बाजार में भय की स्थिति बन सकती है। इसी वजह से मेरा यह मानना है कि तेजी के बजाय वैल्यू पर ज्यादा ध्यान रहना चाहिए और लार्ज-कैप के बजाय छोटे और मझोले आकार की अच्छी कंपनियों को अपने पोर्टफोलियो में शामिल करना चाहिए।

विदेशी निवेशकों ने पिछले कुछ महीनों से भारत में निवेश घटाया है। इसकी मुख्य वजह क्या है?

विदेशी निवेशकों की मुख्य चिंता यह तथ्य है कि सुधार कार्यक्रम की रफ्तार थम सकती है। राजनीतिक परिवेश के परिणाम के तौर पर यह एक बड़ी चिंता है। इसके अलावा अन्य चिंता ब्याज दर को लेकर भी है। निवेशक इसे लेकर आशंकित हैं कि आरबीआई द्वारा ऊंची दरों से नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
आपका पोर्टफोलियो कैसा है? क्या आप भारतीय बाजार में निवेश बढ़ा रहे हैं?

भारत हमारी रेटिंग में काफी ऊपर है। दरअसल, यह चीन की तुलना में काफी ऊपर है, जो सकारात्मक है। हमारा मानना है कि प्रमुख सूचकांक में तेजी के बावजूद भारत में अच्छे अवसर अभी भी मौजूद हैं। सितंबर 2018 में जब हम अपना फंड शुरू करेंगे तो हमारे पोर्टफोलियो में बदलाव किया जाएगा। 

आप भारतीय संदर्भ में कौन से क्षेत्र पर ध्यान दे रहे हैं?

उपभोक्ता क्षेत्र हमारे लिए दिलचस्प है। हमारा मानना है कि इस क्षेत्र में न सिर्फ भारत में बल्कि अन्य उभरते बाजारों में भी अच्छे अवसर मौजूद हैं, जहां से हम इस सेगमेंट से अच्छा प्रदर्शन देख सकते हैं। 

भारत में कंपनियों की आय में बढ़ोतरी पर आपका क्या नजरिया है?

आर्थिक वृद्घि के आंकड़े मजबूत दिख रहे हैं, जिसे देखते हुए कंपनियों की आय अच्छी रहनी चाहिए। यही वजह है कि हम बाजार में तेजी की धारणा देख रहे हैं। हालांकि अगर ब्याज दरों का प्रभाव दिखना शुरू होता है तो आप बाजार में अलग कहानी देख सकते हैं। 
Keyword: NSE, BSE, share market, company, मोबियस कैपिटल पार्टनर्स, अमेरिकी फेडरल रिजर्व,
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