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ई-भुगतान में बढ़ोतरी को भुना रही पाइन लैब्स

समरीन अहमद /  August 05, 2018

पाइन लैब्स वर्ष 1998 से वजूद में है, जब इंटरनेट से जुडऩे का सबसे लोकप्रिय तरीका डायल-इन था और नकदी संभवतया वित्तीय लेनदेन का एकमात्र तरीका था। लेकिन आज हम जो डिजिटल कंपनी देख पा रहे हैं, वह असल में 2004 में बनी। बीते वर्षों में कारोबारी मॉडल में कई बार बदलाव के बाद यह वर्तमान स्वरूप में 2009 में आई। कंपनी में वैश्विक वेंचर कैपिटल कंपनी सिकोया कैपिटल के 10 लाख डॉलर का निवेश करने के बाद वर्ष 2009 में इसके कारोबारी मॉडल में बड़ा बदलाव आया। उसके बाद कंपनी ने पीछे मुडक़र नहीं देखा है। इस साल मई में कंपनी ने अब तक का सबसे अधिक धन 12.5 करोड़ डॉलर जुटाया था। यह धन सिंगापुर की सरकारी निवेश कंपनी टेमासेक होल्डिंग्स और पेपाल से जुटाया गया। उस समय कंपनी का मूल्यांकन 90 करोड़ डॉलर यानी यूनिकॉर्न बनने से महज 10 करोड़ डॉलर कम था। इस समय देश में क्रेडिट और डेबिट कार्ड से होने वाले 15 फीसदी से अधिक लेनदेन पाइन लैब्स पर प्रोसेस होते हैं, जिससे यह इस क्षेत्र की सबसे बड़ी कंपनी बन गई है। देश में उत्पादों की समान मासिक किस्त (ईएमआई) के प्रचार पाइन लैब्स के प्लेटफॉर्म पर होते हैं। 
कंपनी का दावा है कि वह देश में लगभग हर खुदरा विक्रेता के साथ काम कर रही है और हर साल 15 अरब डॉलर के करीब 45 करोड़ लेनदेन प्रोसेस करती है। कंपनी ने अगले चरण में आगामी तीन वर्षों में अपना राजस्व दोगुना करने की योजना बनाई है। इसके लिए कंपनी कारोबारी आउटलेटों के साथ अपने संबंधों को नए मुकाम पर ले जाएगी और अपने प्वाइंट ऑफ सेल (पीओएस) टर्मिनलों में वृद्धि जारी रखेगी। शुरुआती समय में यात्रा इतनी आसान नहीं थी, जितना आज दिखती है। कंपनी को अपने भुगतान समाधान स्वीकार करने के लिए कारोबारियों को राजी करने में तगड़ी मेहनत करनी पड़ी। पाइन लैब्स के संस्थापक और कार्यकारी चेयरमैन लोकवीर कपूर ने कहा, ‘जब भुगतान की बात आती है तो कारोबारी तीसरे पक्ष की तुलना में बैंकों पर ज्यादा भरोसा करते हैं। एक बार बाजार में हमारे समाधान काम करने लगे और लोगों को उनके फायदे मिलने लगे तो हमारे पास काफी कारोबार आया।’ c के पास जमा कराए गए दस्तावेजों के मुताबिक पाइन लैब्स का राजस्व वित्त वर्ष 2017 में 1.95 अरब रुपये रहा, जो इससे पिछले वर्ष 1.22 अरब रुपये रहा था। यह पिछले दो वर्षों से 60 फीसदी की दर से बढ़ रही है। कपूर ने कहा, ‘पीओएस के जरिये होने वाला हर लेनदेन असल में ग्राहक के साथ जुडऩे का मौका होता है। यह केवल ग्राहक के खाते से कारोबारी के खाते में पैसे हस्तांतरित करने के लेनदेन तक सीमित नहीं है। लेकिन एक मौका होता है, जिसे मार्केटिंग के मौके, प्रचार या कारोबारी के साथ संबंध बनाने में तब्दील किया जा सकता है।’
ऐसा लगता है कि यह खुदरा विक्रेताओं के बीच अपनी पकड़ और मजबूत बना रही है। पाइन लैब्स ने अपने डेबिट कार्डों के जरिये ग्राहकों को ईएमआई मुहैया कराना शुरू कर दिया है। यह देश में बैंकों के क्रेडिट कार्ड का आधार बढ़ाने के लिए इंतजार नहीं करना चाहती, जो इस समय महज 2.5 करोड़ है। लोगों के खर्च की प्रवृत्ति का व्यापक ब्योरा उपलब्ध होने से कंपनी उनकी साख का पता लगा पाती है। 
पाइन लैब्स के मुख्य कार्याधिकारी विक्की बिंद्रा ने कहा, ‘बैंक ऑफ बड़ौदा और पंजाब नैशनल बैंक जैसे सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों ने बहुत कम क्रेडिट कार्ड जारी किए हैं, जबकि उनके डेबिट कार्ड धारकों की संख्या बहुत अधिक है। इससे हमें सार्वजनिक क्षेत्र में जाने का मौका मिलता है, जहां हम पहले नहीं जा सके।’ पाइन लैब पहले ही डेबिट कार्ड पर ईएमआई सेवा के लिए एचडीएफसी बैंक के साथ करार कर चुकी है। यह अगली तिमाही में आईसीआईसीआई बैंक, ऐक्सिस बैंक और कुछ सार्वजनिक बैंकों के साथ करार करेगी। इस कार्यक्रम में साझेदार बैंकों ने काफी रुचि दिखाई है। पाइन लैब्स ने अगले तीन वर्षों में पीओएस मशीनों की संख्या वर्तमान 3 लाख से बढ़ाकर 10 लाख करने का महत्त्वाकांक्षी लक्ष्य तय किया है। गूगल-बीसीजी की रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत का डिजिटल भुगतान उद्योग वर्ष 2020 तक बढक़र 500 अरब डॉलर हो जाएगा, जो देश की जीडीपी में 15 फीसदी योगदान देगा। 
Keyword: पाइन लैब्स, ईएमआई, कंपनी, कंपनी पंजीयक,
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