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बिगबास्केट: ऑनलाइन किराना में पैठ

अलनूर पीरमोहम्मद /  August 05, 2018

 वर्षों पहले स्थानीय किराना स्टोरों की जगह बड़े खुदरा स्टोरों ने ली थी। लेकिन फिर भी पेशेवर लोग कीमत, खरीदारी में आसानी, बेहतर एवं विशेष ब्रांड चुनने और सबसे महत्त्वपूर्ण समय बचाने के लिहाज से और बेहतर अनुभव की तलाश में थे। पेशेवरों की इसी जरूरत ने हरि मेनन और उनकी टीम के लिए कारोबारी अवसरों का रास्ता खोल दिया। वर्ष 2011 में मेनन, वीएस सुधाकर, विपुल पारेख, अभिनय चौधरी और वीएस रमेश ने यह पाया कि उन पेशेवरों की तादाद बढ़ रही है, जिनके लिए पड़ोस के किराना स्टोर से सामान खरीदने जैसे उबाऊ काम में सहूलियत और बेहतर अनुभव ज्यादा मायने रखता है। उन्होंने इसे देखते हुए बिगबास्केट की स्थापना की, जो जल्द ही यूनिकॉर्न बनने की राह पर है। यूनिकॉर्न शब्द नए जमाने की उन कंपनियों के लिए इस्तेमाल किया जाता है, जिनका मूल्य 1 अरब डॉलर या उससे अधिक है। यह आइडिया सीधा सा था। ब्राउजर पर एक सूची से किराने के सामान को चुनिए और यह बिगबास्केट के जरिये आपके घर पहुंच जाएगा। असल में यह संस्थापक समूह के उसी आइडिया के समान था, जो उसके दिमाग में 1999 में फैबमार्ट डॉट कॉम शुरू करते समय था। फैबमार्ट कुछ समय बाद ऑफलाइन खुदरा किराना शृंखला फैबमॉल में तब्दील हो गई थी, जिसे 2006 में आदित्य बिड़ला समूह ने खरीद लिया।
वर्ष 2000 के दशक की शुरुआत तक ऑनलाइन खुदरा को एक कल्पना ही माना जाता था। लेकिन एक दशक बाद इसमें संभावनाएं नजर आने लगी थीं। हालांकि अब भी ऑनलाइन खुदरा बिक्री में किराने के सामान की बिक्री का हिस्सा बहुत कम है, जबकि देश के 650 अरब डॉलर से अधिक के खुदरा क्षेत्र में आधे से ज्यादा योगदान खाद्य एवं किराने के सामान की बिक्री का है। ऑनलाइन किराने का सामान बेचने में मौके इतने हैं कि यह अन्य श्रेणियों को बहुत पीछे छोड़ सकता है। यही चीज फ्लिपकार्ट और अलीबाबा को इस क्षेत्र में पैठ बनाने के लिए लुभा रही है। बिगबास्केट ने ऑनलाइन किराना क्षेत्र की अन्य कंपनियों के मुकाबले आधा दशक पहले अपनी यात्रा शुरू की थी और इसलिए वह आज भी सबसे आगे है। 

बिगबास्केट के सह-संस्थापक और सीईओ मेनन ने बिज़नेस स्टैंडर्ड को बताया, ‘हम इस क्षेत्र में अगुआ हैं और हमारा आकार अपने निकट प्रतिद्वंद्वी से करीब चौगुना है। हम तकनीक, आंकड़ों के विश्लेषण और बुनियादी ढांचे को बेहतर बनाने के लिहाज से जो कुछ करेंगे, वह इस बढ़त को बनाए रखने के लिए होगा।’ फरवरी में चीन के अलीबाबा समूह ने बिगबास्केट में हिस्सेदारी खरीदी थी। इस चरण में बिगबास्केट में 30 करोड़ डॉलर का निवेश हुआ, जिससे इस ऑनलाइन किराना कंपनी का मूल्य बढक़र 95 करोड़ डॉलर हो गया। यहां तक कि अमेरिकी दिग्गज ई-कॉमर्स कंपनी एमेजॉन ने भी बिगबास्केट में रुचि दिखाई थी। हालांकि तब तक एमेजॉन अपना किराना कारोबार शुरू कर चुकी थी। एमेजॉन बिगबास्केट का अधिग्रहण करना या उसमें निवेश करना चाहती थी। 

बिगबास्केट ने दावा किया कि उसने मार्च, 2018 में 3.3 करोड़ डॉलर की बिक्री की है। इस तरह उसकी सालाना बिक्री 40 करोड़ डॉलर है। मेनन ने कहा कि वह मार्च, 2019 तक कंपनी की मासिक बिक्री दोगुनी यानी करीब 7.2 करोड़ डॉलर करना चाहते हैं। इस हिसाब से कंपनी वित्त वर्ष 2020 में किसी समय 1 अरब डॉलर की बिक्री का आंकड़ा हासिल कर लेगी। फॉरेस्टर रिसर्च के वरिष्ठ पूर्वानुमान विश्लेषक सतीश मीना के मुताबिक वर्ष 2017 में ऑनलाइन किराना खुदरा बाजार करीब 75 करोड़ डॉलर का है, जिसमें एक बड़ा हिस्सा बिगबास्केट का है। देश में 18 अरब डॉलर के ऑनलाइन खुदरा बाजार में खाद्य एवं किराने के सामान की श्रेणी का हिस्सा करीब 4 फीसदी है। वहीं भारत के कुल खुदरा बाजार में खाद्य एवं किराने का हिस्सा 55 फीसदी है। इस तरह ऑनलाइन खुदरा किराना की हिस्सेदारी बहुत कम है। 

मीना ने कहा, ‘हम किराने के सामान की ज्यादातर खरीदारी पास के स्टोरों से करते हैं और ये लोग कभी-कभी आपके घर भी डिलिवरी कर देते हैं, इसलिए इसमें ज्यादा समस्या नहीं है। अगर आप टीयर-1 शहरों से बाहर जाएंगे तो पाएंगे कि लोगों के लिए किराने का सामान खरीदना बड़ी समस्या नहीं है। इसलिए वे अब भी स्थानीय स्टोरों से खरीदारी करते हैं।’ मीना ने कहा कि ऑनलाइन किराने के सामान की खरीदारी का अनुभव अब भी जटिल है। हालांकि इस क्षेत्र में जितना निवेश हो रहा है और ऑनलाइन खरीदारी में सहज लोगों की बढ़ती तादाद को देखते हुए खरीदारी के अनुभव में आगे बदलाव आने की उम्मीद है। मेनन ने कहा कि बिगबास्केट नए शहरों में विस्तार लगातार जारी रखेगी। यह अपने उत्पादों की पेशकश बढ़ाएगी और अपने निजी ब्रांडों की संख्या बढ़ाएगी। मेनन ने कहा कि कंपनी 100 फीसदी से अधिक सालाना वृद्धि हासिल करने के लिए सबस्क्रिप्शन पर ध्यान दे रही है। कंपनी बड़े अपार्टमेंट कॉम्पलेक्स और आईटी पार्क में छोटे ऑफलाइन स्टोर भी खोलने की योजना बना रही है। 

इस साल की शुरुआत में बिगबास्केट के 80 लाख ग्राहक थे, जिन्होंने एक महीने में औसतन तीन बार इस प्लेटफॉर्म से खरीदारी की। कंपनी इस दिशा में काम कर रही है कि अगले एक साल में ये ग्राहक महीने में करीब 5 बार खरीदारी करें। हालांकि एमेजॉन और फ्लिपकार्ट अपनी साइट पर सभी श्रेणियों के 10 करोड़ से अधिक ग्राहकों का दावा करती हैं, लेकिन बार-बार खरीदारी करने वाले ग्राहकों की संख्या के लिहाज से वे बिगबास्केट के नजदीक कहीं नहीं ठहरती हैं। मेनन को भरोसा है कि बड़ी ई-कॉमर्स कंपनियों के पास पैसे की ताकत होने के बावजूद बिगबास्केट इस क्षेत्र में अगुआ बनी रहेगी। यह धीरे-धीरे ब्रेक-ईवन की तरफ बढ़ रही है। मेनन ने कहा कि कंपनी अपनी स्थापना वाले शहर बेंगलूरु में पहले ही ब्रेक-ईवन पर आ चुकी है। मीना ने कहा कि अगर बिगबास्केट ऑनलाइन किराना खुदरा की दिक्कतों को लगातार दूर करती रही तो यह ब्रांड अच्छा प्रदर्शन करेगा क्योंकि इसकी बाजार में तगड़ी पहचान है। 

Keyword: ई-कॉमर्स, कंपनी, एमेजॉन, फ्लिपकार्ट,
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