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जेएलआर की वजह से टाटा मोटर्स को बड़ा नुकसान

शैली सेठ मोहिले और राम प्रसाद साहू /  August 05, 2018

अप्रैल-जून तिमाही में टाटा मोटर्स ने एक दशक में सबसे खराब मुनाफा प्रदर्शन दर्ज किया। कंपनी को इस तिमाही में 18.63 अरब रुपये का नुकसान हुआ, क्योंकि उसकी ब्रिटिश सहायक इकाई जगुआर लैंड रोवर (जेएलआर) को चीन में नियामकीय चिंता, ब्रेक्सिट से जुड़ी अनिश्चितता और ब्रिटेन तथा यूरोप में डीजल वाहनों की कमजोर मांग की वजह से भारी दबाव से जूझना पड़ा है। हालांकि जेएलआर के कमजोर प्रदर्शन की भरपाई वाहन निर्माता कपंनी की भारतीय इकाई के मजबूत प्रदर्शन से हुई है जिसका शुद्घ लाभ 11.88 अरब रुपये पर दर्ज किया गया।  टाटा मोटर्स ने इस नुकसान की तुलना में पिछले साल समान तिमाही में 32 अरब रुपये का मुनाफा दर्ज किया था। जेएलआर ने 21 करोड़ पौंड का नुकसान और 5.2 अरब पौंड का कमजोर राजस्व दर्ज किया, जो सालाना आधार पर 6.7 फीसदी कम है। भारत में वाणिज्यिक और यात्री वाहन खंडों, दोनों में मजबूत बिक्री वृद्घि की मदद से कंपनी का शुद्घ राजस्व 14 प्रतिशत बढक़र 670 अरब रुपये पर रहा। 

जून तिमाही में जेएलआर के लिए प्रमुख नकारात्मक कारकों में से एक कमजोर बिक्री रही। थोक बिक्री (वितरकों के लिए) सालाना आधार पर 5 प्रतिशत कम रही और इसे इन्वेंट्री घटाने और टेस्टिंग संबंधी समस्याओं की वजह से दबाव का सामना करना पड़ा। चीन में 1 जुलाई से बिक्री आयात शुल्क 25 प्रतिशत से घटाकर 10 प्रतिशत किए जाने और अन्य बाजारों में डीलर स्टॉक कम किए जाने के प्रयासों की वजह से प्रभावित हुई। कम परिचालन दक्षता, विदेशी मुद्रा में उतार-चढ़ाव और कुल बिक्री मिश्रण में सस्ते मॉडलों के ऊंचे योगदान से समेकित मार्जिन घटकर 7.5 प्रतिशत रह गया जो 2008-09 की सितंबर तिमाही के बाद से सबसे कम है। शुल्क कटौती को देखते हुए, कंपनी को आकर्षक कीमतों की पेशकश के लिए बाध्य होना पड़ा जिससे उसकी प्राप्तियों और मार्जिन पर दबाव पड़ा। इसके परिणामस्वरूप चीन के साथ संयुक्त उपक्रम में एबिटा सालाना आधार पर 2200 आधार अंक तक घटकर 13 फीसदी रह गया। इससे जेएलआर का मार्जिन -3.7 फीसदी पर आ गया जबकि एक साल पहले की अवधि में यह 1.2 फीसदी था।

ब्रिटिश इकाई पर दबाव के बावजूद टाटा मोटर्स के मुख्य वित्तीय अधिकारी पी बी बालाजी का कहना है कि कंपनी अल्पावधि से मध्यावधि में 4-7 फीसदी के मार्जिन को बनाए रखेगी। उन्होंने कहा, ‘पहली तिमाही जेएलआर के लिए पारंपरिक रूप से कमजोर तिमाही रही है और चौथी तिमाही मजबूत।’ बालाजी का कहना है कि उनकी यह उम्मीद पांच आगमी मॉडलों में से तीन की मजबूत ऑर्डर बुक की वजह से पैदा हुई है। इन मॉडलों में रेंज रोवर स्पोर्ट और आई-पेस शामिल हैं जिनकी खुदरा बिक्री लगातार मजबूत बनी हुई है और चीन में इन्हें नियामकीय समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। 

कंपनी के प्रबंधन का मानना है कि इसके अलावा डॉलर की तुलना में पौंड के मजबूत होने से विदेशी मुद्रा प्रभाव भी जून तिमाही जितना गंभीर नहीं होगा। बालाजी का कहना है कि लेकिन नई वास्तविकताओं को देखते हुए जेएलआर चुनौतीपूर्ण परिदृश्य से निपटने की तैयारी कर रही है। उनका कहना है कि जेएलआर वह सब कुछ करेगी जिससे उसे परिचालन दक्षता फिर से मजबूत बनाने में मदद मिले। बर्मिंघम स्थित कंपनी ने लागत को तर्कसंगत बनाने की पहल पर भी जोर दिया है। वह मांग को ध्यान में रखते हुए उत्पादन में बदलाव पर भी विचार कर रही है। तिमाही में प्रदर्शन और आगामी समस्याओं को ध्यान में रखते हुए विश्लेषकों का मानना है कि कंपनी के लिए जेएलआर के अल्पावधि मार्जिन अनुमान को पूरा करना चुनौतीपूर्ण कार्य होगा। शेयरखान के भारत ज्ञानानी का कहना है कि प्रमुख बाजारों में वृहद समस्याओं के साथ साथ इलेक्ट्रिक वाहनों की बढ़ती भागीदारी से कंपनी को अपने मुनाफा अनुमानों को पूरा करना कठिन होगा। टाटा मोटर्स का मानना है कि मध्यावधि के दौरान उसकी कुल बिक्री में इलेक्ट्रिक वाहनों का योगदान 20 प्रतिशत होगा। नई टेक्नोलॉजी और बिक्री के अभाव को देखते हुए पोर्टफोलियो के लिए मुनाफा मौजूदा इंटरनल कंबश्चन इंजन-आधारित पोर्टफोलियो की तुलना में कम रहेगा।

अमेरिका में कमजोर मांग, ब्रिटेन और यूरोपीय संघ में डीजल-संबंधित समस्याओं, ब्रेक्सिट और व्यापार युद्घ से संबंधित अनिश्चितता के बीच कंपनी को मजबूत बिक्री वृद्घि की राह पर बढऩा आसान नहीं होगा। चीन कंपनी के लिए एकमात्र विकास इंजन है क्योंकि उस बाजार में बिक्री 1 जुलाई से अप्रत्याशित शुल्क कटौती के बाद फिर से तेज होने का अनुमान है। हालांकि विश्लेषकों को अमेरिका, ब्रिटेन और यूरोपीय संघ के बाजारों में बिक्री पर दबाव की भरपाई चीन में मजबूत वृद्घि से होने का अनुमान नहीं है, क्योंकि इन तीन बाजारों (अमेरिका, ब्रिटेन और यूरोपीय संघ) का उसकी कुल बिक्री में 55-60 प्रतिशत योगदान है। विश्लेषकों का कहना है कि भारतीय व्यवसाय के संदर्भ में जहां जून तिमाही में प्रदर्शन अच्छा रहा, वहीं नए एक्सल मानकों से उद्योग की बिक्री प्रभावित होगी और इससे मार्जिन पर दबाव पड़ेगा। पहली तिमाही के कमजोर और अनिश्चित परिदृश्य को देखते हुए शेयर पर दबाव दिख सकता है। 
Keyword: ब्रिटेन, यूरोपीय संघ , EU, अमेरिका, जेएलआर,
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