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संशोधित टफ्स से पूरे कपड़ा उद्योग को फायदा

दिलीप कुमार झा / मुंबई August 05, 2018

केंद्रीय कपड़ा मंत्रालय ने सिकुड़ते कपड़ा क्षेत्र को एक बड़ी राहत देने के लिए संशोधित तकनीक उन्नयन कोष योजना (टफ्स) पेश की है ताकि इस पूरी मूल्य शृंखला के उद्यमियों को व्यापक वित्तीय एवं परिचालन लाभ मिल सकें। इस योजना को सबसे पहले वर्ष 1999 में पुरानी तकनीक की जगह नई तकनीक लागू करने के लिए पेश किया था, जिसका मकसद कपड़ा इकाइयों की परिचालन कुशलता में सुधार था। इन बीते वर्षों में टफ्स में कई बार संशोधन किया गया है ताकि इसके दायरे में नए उद्यमियों को लाया जा सके और उन्हें इस क्षेत्र में नए निवेश के लिए प्रोत्साहित किया जा सके। उद्योग के सूत्रों का अनुमान है कि टफ्स लागू होने के बाद कपड़ा क्षेत्र में अरबों रुपये का निवेश हुआ है। गुरुवार को अधिसूचित संशोधित टफ्स सहकारी बैंकों को इस योजना के तहत कपड़ा इकाइयों को तकनीकी सुधार के लिए ऋण देने की मंजूरी देती है। संशोधित टफ्स से सिंथेटिक कपड़ा क्षेत्र को बड़ा फायदा होने के आसार हैं। अब इस योजना का लाभ सीमित दायित्व साझेदारी (एलएलपी) कंपनियों को भी मिल सकेगा। 

सूती कपड़ा निर्यात संवर्धन परिषद (टेक्सप्रोसिल) के चेयरमैन उज्ज्वल लाहोटी ने कहा, ‘संशोधित टफ्स से भारत से कपड़ा निर्यात को बढ़ावा मिलेगा। यह सरकार की अच्छी पहल है, जिसमें वित्तीय एवं परिचालन मानदंडों का विस्तार किया गया है। योजना से घरेलू कपड़ा इकाइयों को भी फायदा मिलेगा।’ कपड़ा मंत्रालय ने संशोधित टफ्स को वर्ष 2016 में पूर्व तकनीकी उन्नयन कोष योजना (टफ्स) की जगह लागू किया गया था। इसे मार्च, 2022 तक की 7 साल की अवधि के लिए शुरू किया गया है। संशोधित टफ्स के वित्तीय एवं परिचालन मानकों और लागू करने की व्यवस्था की अधिसूचना फरवरी, 2016 में जारी की गई थी। सरकार इस योजना के तहत कर्ज से संबंधित सब्सिडी देती है। 

रोचक बात यह है कि पहले इस योजना में बहुत सी दिक्कतें थीं, जिन्हें सरकार के संज्ञान में लाया गया। केंद्रीय कपड़ा मंत्रालय ने योजना के लाभ लेने में उद्योग को होने वाली दिक्कतों और इसे आसान बनाने की विभिन्न भागीदारों की मांगों को मद्देनजर रखते हुए पहली बार कपड़ा इकाइयों को राज्य सरकारों द्वारा दिए जाने वाले अन्य लाभों के अलावा इस योजना का भी फायदा उठाने की मंजूरी दी। 

सिंथेटिक ऐंड रेयान टेक्सटाइल्स एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल के चेयरमैन नारायण अग्रवाल ने कहा, ‘इस उद्योग को मजबूत करने की दिशा में कपड़ा मंत्रालय का यह एक अन्य सकारात्मक कदम है। इससे रोजगार सृजन, निर्यात बढ़ाने और उत्पादकता, गुणवत्ता आदि में सुधार में मदद मिलेगी।’ नई योजना के तहत उन आवेदकों को संशोधित टफ्स के तहत सब्सिडी के लिए आवेदन करने को एकबारगी मौका मिलेगा, जिन्होंने 12 जनवरी, 2016 से पहले परिवर्तित एवं पुनर्गठित तकनीकी उन्नयन कोष योजना (आरआरटीयूएफएस) के तहत विशिष्ट पहचान क्रमांक (यूआईडी) के लिए आवेदन किया था, लेकिन फंड उपलब्ध नहीं होने के कारण उन्हें यूआईडी जारी नहीं किया गया था। 

सभी पात्र खंडों में मशीन तकनीक के लिए संशोधित निर्देशों की घोषणा हर साल 1 अप्रैल को पहले ही तकनीक सलाहकार एवं निगरानी समिति (टीएएमसी) करेगी। संशोधित दिशानिर्देश कपड़ा आयुक्त को एक तकनीकी समिति गठित करने की मंजूरी देती है, जो टीएएमसी को मशीनरी के विनिर्माताओं की एक अनुमानित सूची बनाने में मदद देगी। समिति मशीनरी और विनिर्माताओं की सूची को अद्यतन बनाने के लिए हर महीने बैठक करेगी।

रोचक बात यह है कि अनुमानित सूची से बाहर के विनिर्माताओं से मशीन की मूल लागत के 20 फीसदी तक की एक्सेसरी, अटैचमेंट, सैंपल मशीन और कलपुर्जे खरीदने पर भी सब्सिडी हासिल की जा सकती है। विलय, अधिग्रहण, एकीकरण या कंपनी के अधिग्रहण को छोडक़र टफ्स सब्सिडी के तहत खरीदे गए संयंत्र एवं मशीनरी को कपड़ा आयुक्त की पूर्व मंजूरी के बिना खरीद की तारीख के 10 साल पहले बेचा नहीं जा सकेगा। 

सरकार कपड़ा उद्यमियों को समय पर नीतिगत मदद दे रही है। पिछले साल जून में सरकार ने 60 अरब रुपये के पैकेज की घोषणा की थी। कपड़ा मंत्रालय के मुताबिक इस पैकेज से मार्च, 2018 तक 270 अरब रुपये का ताजा निवेश लाने में मदद मिली है। 

इस क्षेत्र की शीर्ष संस्था कनफेडरेशन ऑफ इंडियन टेक्सटाइल्स इंडस्ट्री (सिटी के मुताबिक वित्त वर्ष 2017-18 मे कपड़ा एवं परिधान निर्यात 4 फीसदी घटकर 2,279 अरब रुपये रहा, जो उससे पिछले वर्ष 2,382 करोड़ रुपये रहा था। कपड़ा निर्यात वित्त वर्ष 2018 के अंत में एक फीसदी घटकर 1,202 अरब रुपये रहा, जो उससे एक साल पहले 1,217 अरब रुपये था। हालांकि परिधान का निर्यात 8 फीसदी गिरकर 1,077 अरब रुपये रहा, जो वित्त वर्ष 2017 में 1,165 अरब रुपये रहा था।

Keyword: केंद्रीय, कपड़ा मंत्रालय, एक्सेसरी, अटैचमेंट, सैंपल मशीन,
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